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UP का काल कोठरी जैसा छात्रावास: दो कमरों में 34 बच्चे, एक बिस्तर पर दो-दो छात्र; एक ही जगह खाना, रहना और पढ़ना

Tue, 18 Aug 2026 03:31 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, बांदा
अमर उजाला नेटवर्क, बांदा Published by: Sharukh Khan Updated Tue, 18 Aug 2026 03:31 PM IST
सार

बांदा में बीएल विद्या मंदिर निजी आवासीय विद्यालय में छात्रावास काल कोठरी जैसा है। यहां दो कमरों में 34 बच्चों को रखा गया है। एक बिस्तर पर दो-दो छात्र रहते हैं। फीस 40 हजार रुपये सालाना लेते हैं।

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Two students die residential school in Banda dungeon-like hostel 34 children in two rooms two students per bed
residential school in banda - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
बांदा शहर के झील का पुरवा स्थित बीएल विद्या मंदिर निजी आवासीय विद्यालय में छात्रों से आवासीय सुविधा के नाम पर 40 हजार रुपये सालाना फीस ली जाती है लेकिन छात्रावास की हालत बदहाल है। दो कमरों में 34 बच्चों को रखा गया है। यहां न साफ-सफाई की व्यवस्था है और न ही बच्चों के रहने के लिए जरूरी सुविधाएं। हालत यह है कि एक बिस्तर पर दो बच्चे सोते हैं।


पिछले कई वर्षों से झील का पुरवा में छह कमरों में आवासीय विद्यालय संचालित हो रहा है। ग्रामीण अंचलों के अभिभावकों से संपर्क कर उनके बच्चों को बेहतर शिक्षा देने का सपना दिखाया जाता है। इसी भरोसे पर 34 अभिभावकों ने अपने बच्चों को यहां दाखिला दिलाया है। इसके एवज में उनसे 40 हजार रुपये सालाना फीस ली जाती है। हालांकि छात्रावास की स्थिति देखकर ऐसा नहीं लगता कि यहां आवासीय सुविधा के नाम पर बच्चों को पर्याप्त इंतजाम मिल रहे हैं।
Two students die residential school in Banda dungeon-like hostel 34 children in two rooms two students per bed
विद्यालय में बने कमरे में खाली पड़े तख्त और नमी से भीगी दीवार - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
34 बच्चों के लिए दो कमरों में केवल तख्त डाले गए हैं। एक बिस्तर पर दो छात्रों के सोने की व्यवस्था है। कपड़े और अन्य सामान रखने के लिए अलमारी नहीं है। बच्चों का सामान बिस्तर के ऊपर या नीचे रखा रहता है। बिस्तरों और कपड़ों पर भी सफाई की कमी साफ नजर आती है। कमरों की दीवारें बारिश की नमी से भीगी हुई हैं।

 
Two students die residential school in Banda dungeon-like hostel 34 children in two rooms two students per bed
दोनों छात्रों के बीमार होने की जानकारी देता विपिन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गर्मी से राहत के लिए कमरों में पंखे लगाए गए हैं लेकिन बिजली जाने पर केवल एक पंखा ही चलता है। इससे बच्चों को उमस और गर्मी में परेशानी होती है। सात से आठ साल की उम्र के बच्चे छात्रावास में रहते हैं लेकिन उनके लिए शौचालय मैदान के दूसरी तरफ बना है। रात में भी बच्चों को वहां जाना पड़ता है।

 
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Two students die residential school in Banda dungeon-like hostel 34 children in two rooms two students per bed
विद्यालय पहुंचे अरुण के परिजन, नाराजगी जताते हुए - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
एक ही जगह खाना, रहने और पढ़ने की व्यवस्था
छात्रावास में बच्चों के लिए अलग मेस भी नहीं है। बच्चे जहां रहते हैं, वहीं खाना खाते हैं। रसोई में भी बच्चों की संख्या के हिसाब से विशेष इंतजाम नजर नहीं आए। ऐसे में आवासीय विद्यालय में रहने वाले छोटे बच्चों की सुविधाओं और सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
 
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Two students die residential school in Banda dungeon-like hostel 34 children in two rooms two students per bed
residential school in banda - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
परिसर में खड़ी घास, एक दिन पहले दिखा था सांप
आवासीय विद्यालय परिसर में भी सफाई की स्थिति ठीक नहीं है। भवन के आसपास खाली पड़ी जमीन में घास, झाड़ियां और जलभराव है। इससे जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा बना हुआ है। छात्रों ने बताया कि एक दिन पहले ही मैदान में काला सांप दिखाई दिया था। बाद में वह एक गड्ढे में चला गया।

 
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