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चुनाव परिणाम 2019: ये हैं पश्चिम के वो आठ दरवाजे जहां से खुला था भाजपा की प्रचंड जीत का रास्ता

Wed, 22 May 2019 09:35 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Wed, 22 May 2019 09:35 PM IST
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Election Results 2019: Straight fight between BJP and coalition, on eight seats of west UP
लोकसभा चुनाव 2019 - फोटो : अमर उजाला

लोकसभा चुनाव के परिणामों का सिलसिला शुरू होने में अब केवल कुछ घंटें शेष बचे हैं। पश्चिमी उप्र के इन आठ द्वारों पर चुनावी भाग्य का फैसला कल सामने आ जाएगा। हालांकि इससे पहले हर किसी की धड़कनें तेज हो गई हैं। हर किसी को ये जानने की बेसब्री है कि आखिर कौन सी पार्टी देश की जनता का दिल जीतने में कामयाब रही। सहारनपुर, बिजनौर, बागपत, कैराना, मुजफ्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर ये लोकसभा सीटें नहीं बल्कि वो आठ दरवाजे हैं, जहां से पिछले चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत का रास्ता खुला था।



इस बार समीकरण बदले हैं और मुकाबले कड़े हैं। इस बार पश्चिम में जाट, मुस्लिम और अनुसूचित जाति सभी सीटों पर प्रभावी भूमिका में रही हैं। इनके वोट बड़े से बड़े नेता की जमीन खिसका सकते हैं। जाहिर है जल्द ही सभी सीटों पर नेताओं के भाग्य का फैसला हो जाएगा लेकिन इससे पहले देखें किस सीट पर क्या बना रहा समीकरण: -

Election Results 2019: Straight fight between BJP and coalition, on eight seats of west UP
हाजी याकूब कुरैशी, राजेंद्र अग्रवाल, हरेंद्र अग्रवाल

मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट: भाजपा और गठबंधन के बीच सीधा मुकाबला
भाजपा ने अपने दो बार के लगातार विजेता राजेंद्र अग्रवाल को ही मैदान में उतारा। सामने गठबंधन से हाथी पर सवार होकर हाजी याकूब कुरैशी मैदान में हैं। कांग्रेस ने टिकट बदला और हरेंद्र अग्रवाल पर दांव खेला। इस बार भाजपा की राह आसान नहीं दिख रही और मुकाबला कड़ा है। बसपा दलित मुस्लिम वोटों पर दांव खेल रही है। उसके लिए बाकी वर्गों को अपने साथ लाना बड़ी चुनौती रही है।

भाजपा अन्य वर्ग के अलावा वैश्य, ब्राह्मण, अति पिछड़ों के सहारे चुनावी मैदान में है। दो अन्य अहम बिंदू हैं। एक कांग्रेस का हरेंद्र अग्रवाल पर दांव लगाना  दूसरा राजेंद्र अग्रवाल से लोगों की नाराजगी। बहरहाल यहां सीधा मुकाबला भाजपा और गठबंधन प्रत्याशी के बीच है। उधर प्रसपा ने नासिर अली को टिकट दिया पर मुस्लिम या अन्य वोटों में बड़ी सेंध लगाने में वह कितने कामयाब रहे यह देखना भी दिलचस्प होगा।

2014 में पार्टियों को मिले मत : भाजपा : 532981, बसपा : 300655, सपा : 211759

Election Results 2019: Straight fight between BJP and coalition, on eight seats of west UP
अजित सिंह, संजीव बालियान - फोटो : अमर उजाला

मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट: दांव पर चौधरी अजित सिंह की प्रतिष्ठा
पहली बार चौधरी अजित सिंह परंपरागत सीट बागपत छोड़कर मुजफ्फरनगर से मैदान में हैं। उनका मुकाबला भाजपा के डॉ. संजीव बालियान से है। संजीव ने 2014 में मुजफ्फरनगर दंगे के बाद हुए चुनाव में चार लाख वोटों से बसपा के कादिर राणा को हराया था।

इस बार समीकरण बदले हुए है। तब सपा, बसपा और कांग्रेस ने भी अपने प्रत्याशी उतारे थे। इस बार सपा, बसपा का रालोद के साथ गठबंधन है और कांग्रेस ने भी अजित सिंह के सामने कोई प्रत्याशी नहीं उतारा है। जाट राजनीति की दिशा यहां दोनों नेताओं का भविष्य तय करेगी। खासतौर पर ये वे दो सीटे हैं जिन पर देशभर की नजरें टिकी हैं।  

2014 में पार्टियों को मिले मत : भाजपा : 653391, बसपा : 252241, सपा : 160810

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Election Results 2019: Straight fight between BJP and coalition, on eight seats of west UP
तब्बसुम हसन व प्रदीप चौधरी

कैराना लोकसभा सीट: कैराना के रण में त्रिकोणीय मुकाबला

साढ़े 16 लाख मतदाताओं वाली कैराना सीट पर इस बार त्रिकोणीय मुकाबला है। यह सीट भाजपा के पूर्व नेता स्व. हुकुम सिंह की परंपरागत सीट मानी जाती है। इस बार भाजपा ने उनकी बेटी मृगांका सिंह की जगह गंगोह से विधायक प्रदीप चौधरी पर दांव खेला है। यहां सपा ने मौजूदा सांसद तबस्सुम हसन को ही प्रत्याशी बनाया है।

2014 में इस सीट से हुकुम सिंह सांसद चुने गए थे। उनके निधन के बाद हुए उप चुनाव में रालोद के चुनाव चिह्न पर तबस्सुम बेगम चुनाव लड़ी थीं और उन्होंने मृगांका सिंह हराया था। कैराना उप चुनाव से परिणाम के बाद ही गठबंधन ने सियासी आकार लिया और एक नया समीकरण बनाया। इस बार प्रदीप चौधरी और तबस्सुम बेगम के बीच होने वाले मुकाबले को कांग्रेस प्रत्याशी हरेंद्र सिंह ने त्रिकोणीय बना दिया है।

2014 में पार्टियों को मिले मत : भाजपा : 565909, सपा : 329081, बसपा : 160414 

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Election Results 2019: Straight fight between BJP and coalition, on eight seats of west UP
जयंत चौधरी और सत्यपाल सिंह का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

बागपत लोकसभा सीट: सत्यपाल और जयंत में कड़ा मुकाबला
इस सीट पर भाजपा के केंद्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह और रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी के बीच सीधा मुकाबला है। आईपीएस की नौकरी छोड़कर राजनीति में आए सत्यपाल सिंह ने 2014 बागपत से पहला चुनाव लड़ा था और चौधरी अजित सिंह को हराया था। जयंत चौधरी 2009 में मथुरा सीट से सांसद चुने गए थे, 2014 में हेमा मालिनी से हार गए थे।

इस बार वह रालोद की परंपरागत बागपत सीट से चुनाव मैदान में हैं। वर्ष 1977 से अब तक दो अवसरों को छोड़ दें तो यहां जयंत के परिवार का ही कब्जा रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह तीन और रालोद अध्यक्ष अजित सिंह छह बार यहां से सांसद चुने गए। इस बार जयंत विजयी होते हैं या नहीं यह तो वक्त ही बताएगा।

2014 में पार्टियों को मिले मत : भाजपा : 423475, रालोद : 199516, सपा : 213609

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