तालीम के लिए देवबंद में आने वाले छात्रों को आसरा दे रहे छात्रावासों की अब कुंडली खंगाली जाएगी। किस छात्रावास में कितने छात्र रह रहे हैं। उनका किस संस्थान में दाखिला है, कब से रह रहे हैं। उनका पूरा ब्योरा एकत्रित करने में खुफिया विभाग जुट गया है। पता लगाया जा रहा है कि ऐसे और कितने छात्र रह रहे हैं, जिनका कहीं पर दाखिला ही नहीं है और बेवजह ही छात्रावास में रह रहे हैं।
जैश आतंकियों की गिरफ्तारी से एक्शन मोड में खुफिया तंत्र, खंगालेगी देवबंद के छात्रावासों की कुंडली
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गुरुवार को एटीएस द्वारा देवबंद के नाज मंजिल छात्रावास से आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सदस्य शाहनवाज अहमद तेली और आकिब अहमद मलिक को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद देवबंद स्थित छात्रावासों का रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। कुछ ऐसे छात्रावास भी देवबंद में हैं, जिनका कोई रिकॉर्ड खुफिया विभाग के पास नहीं है। खुफिया विभाग टीमें अब ऐसे छात्रावासों की सूची तैयार करने में जुट गई है। कुछ छात्र देवबंद के आसपास के गांवों में भी रह रहे हैं।
खुफिया विभाग छात्रावासों की सूची बनाने के साथ ही उनमें रह रहे एक-एक छात्र की जानकारी कर रहा है। पता लगाया जा रहा है कि कोई ऐसा छात्र तो नहीं रह रहा, जिसका कहीं दाखिला ही नहीं है। ऐसा कोई बाहरी युवक और छात्र देवबंद में रह रहा है तो उसका क्या मकसद है। छात्र कब से रह रहे हैं और कब तक रहेंगे। छात्र कहां का रहने वाला है और किस संस्थान में दाखिला है। साथ ही छात्रावास संचालकों को भी निर्देश दिए जा रहे हैं कि कोई भी छात्र आता है तो रजिस्टर बनाकर उसका पूरा ब्यौरा दर्ज किया जाए और पुलिस को इसकी सूचना दी जाए। उनकी गतिविधियों पर भी नजर रखी जाएगी।
हर छात्र की जानकारी रखने के दिए हैं निर्देश
एसएसपी दिनेश कुमार ने बताया कि अधिकांश छात्रावासों की सूची उपलब्ध है। सभी छात्रावासों में रहने वाले छात्रों के बारे में पूरा ब्यौरा एकत्रित कराया जा रहा है। छात्रावास में आने वाले नए छात्र के बारे में पहले जानकारी कराए जाने एवं सूचना दिए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
उर्दू बोलते थे तो जल्दी घुल मिल गए
नाज मंजिल छात्रावास में रह रहे शाहनवाज और आकिब कश्मीर के होने के बावजूद देवबंद में रहने में कोई परेशानी नहीं हुई। छात्रावास में अधिकांश छात्र आपस में उर्दू भाषा का प्रयोग करते हैं। शाहनवाज और आकिब को उर्दू की अच्छी जानकारी थी। जिस कारण वह अन्य छात्रों से उसी भाषा में बात करते थे। इसलिए अन्य छात्रों के साथ आसानी से घुल मिल गए थे।
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