पहला रोजा मंगलवार को होगा। सोमवार को तरावीह और शबीना शुरू होगा। रविवार को चांद न दिखने पर शहर काजी जैनुस साजिदीन ने यह एलान किया। शहर काजी ने बताया कि उन्होंने देवबंद दारुल उलूम और दिल्ली सहित देश की सभी बड़ी मुस्लिम संस्थाओं से संपर्क किया। सभी ने चांद न दिखने की बात कही। नायब शहर काजी जैनुर राशिद्दीन ने बताया कि शाही जामा मस्जिद में छह दिवसीय शबीना कारी शफीकुर्रहमान सुनाएंगे।
आज से तरावीह और शबीना, कल पहला रोजा, खानपान का ऐसे खास ध्यान रखें रोजेदार
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मेरठ में शाही ईदगाह में कारी अफ्फान पांच दिन, मस्जिद गुलजार-ए-इब्राहिम में हाफिज मौ. हारून पांच दिन, शाही जामा मस्जिद में छह दिन के शबीने के बाद पांच दिन का दूसरा शबीना हाफिज हारून सुनाएंगे। छीपी टैंक मस्जिद में तीन दिन का शबीना कारी असद, मंसूरी वाली मस्जिद में कारी अनीस तीन दिन, मवाना बस स्टैंड पर कारी मौ. तलाह तीन दिन, गुदड़ी बाजार मस्जिद ऊंची वाली में हाफिज मौ. आबिद पांच दिन, खैरनगर पत्थर वाली मस्जिद में मुफ्ती जैनुल आबिदीन छह दिन का शबीना सुनाएंगे। खैरनगर हौज वाली मस्जिद में 10 दिन का शबीना होगा।
मुकद्दस रमजान में भीषण गर्मी और उमस भरे मौसम की वजह से रोजेदारों का कड़ा इम्तिहान होगा। दरअसल, रोजे 14-15 घंटे के होंगे। इसलिए खानपान में सावधानी बरतने की जरूरत है, ताकि रमजान में इबादत के साथ सेहत भी अच्छी रहे।
चिकित्सकों का कहना है कि सहरी या इफ्तार में हमेशा ध्यान दें कि कम तली हुई चीजें ही खाएं। तैलीय चीजें खाने से प्यास ज्यादा लगती है। फिजिशियन डॉ. तनुराज सिरोही का कहना है कि सहरी में प्रोटीन और फाइबर वाली चीजें ज्यादा लें। मल्टीग्रेन रोटी, छिलके सहित फल और पनीर आदि खा सकते हैं।
फिजिशियन डॉ. वीके बिंद्रा का कहना है कि इफ्तार की शुरुआत हल्की चीजों से करें। उन्होंने बताया कि सहरी के वक्त हरी पत्तेदार सब्जियां और सलाद खूब खाएं। इन दिनों में 14 से 15 घंटे से ज्यादा का रोजा रखना आसान नहीं है इसलिए खानपान का पूरा ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि मधुमेह, दिल और अस्थमा के मरीज रोजा रखने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।