कोई अकेला व्यक्ति मेरे जीजा को कैसे मार सकता है, वे तो बब्बर शेर थे। अकेले को तो वही थाम लेते। मुझे इस खुलासे पर भरोसा नहीं है। हमें तो इंसाफ चाहिए। यह बातें अजय पाठक के साले प्रवीण ने भागवत का शव आने पर जाम लगाने के दौरान कहीं। अगली स्लाइडों में जानिए अपडेट-
बब्बर शेर थे मेरे जीजा, अकेले को तो वो ही थाम लेते, आरोपी ने कैसे किए चार कत्ल, हमें यकीन नहीं
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शामली में बृहस्पतिवार को भागवत की अंतिम यात्रा के दौरान अर्थी को सड़क पर रख कर जाम लगते ही अजय पाठक का साला प्रवीण बिफर गया। रुंधे गले से बोला हमें पुलिस के खुलासे पर यकीन नहीं हो रहा, भला एक अकेला पूरे परिवार को कैसे मार सकता है। हम तो बर्बाद हो गए। हमें सही न्याय चाहिए।
प्रवीण को बिलखता देख करनाल से आए अजय पाठक के कई और रिश्तेदार भी खुद को नहीं रोक सके। पुलिस पर सवालों की झड़ी लगा दी। भीड़ में शामिल शहर के लोग भी पुलिस वालों से पूछ रहे थे कि क्या 60 हजार के लिए कोई पूरे परिवार को मार सकता है।
अजय के परिजनों ने कहा कि शहर का कोई आदमी बता दे कि अजय पर किसी के पैसे चाहिए थे। अजय तो दूसरों की मदद करने वाला था। एक ने कहा कि अजय ने तो हिमांशु की बहन की शादी में भी मदद की थी। हिमांशु ने कुछ महीने पहले ही पगड़ी पहनाकर अजय भाई को गुरु माना था, यदि वो पहले से परेशान था तो गुरु क्यों बनाया।
मुझसे एक बार बात तो कर लेते
गुस्साई भीड़ के सवालों का जवाब देते हुए आदर्श मंडी थानाध्यक्ष कर्मवीर सिंह ने लोगों से कहा कि जाम लगाने से पहले एक बार उनसे बात को करते। पुलिस इस केस को कितनी गंभीरता से ले रही है। वह खुद परिजनों को फोन करके हर एक अपडेट दे रहे थे। उन्हें विश्वास में लेकर हर काम किया। अजय पाठक मेरे भाई समान थे और भागवत उनका भतीजा। पुलिस को पता है कि ये कितनी बड़ी घटना है इसलिए हत्यारों को कड़ी सजा पुलिस दिलाएगी।
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