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रामपुर तिराहा कांड: PAC के दो सिपाहियों ने की थी दरिंदगी, पीड़िता ने कोर्ट में बयान की थी बर्बरता की कहानी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 18 Mar 2024 05:32 PM IST
सार

Rampur Tiraha case verdict : रामपुर तिराहा कांड के मामले में अदालत ने सोमवार को फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पीएसी के दो सिपाहियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

Rampur Tiraha case: victim told tory of Two PAC constables in court
रामपुर तिराहा कांड फैसला - फोटो : अमर उजाला

एक अक्तूबर, 1994 की रात को उत्तराखंड को अलग राज्य घोषित करने की मांग के लिए देहरादून से बसों में सवार होकर आंदोलनकारी दिल्ली के लिए निकले थे। देर रात रामपुर तिराहा पर पुलिस ने आंदोलनकारियों को रोकने का प्रयास किया। आंदोलनकारी नहीं माने तो पुलिसकर्मियों ने फायरिंग कर दी, जिसमें सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी।



आंदोलन में महिला आंदोलनकारी भी शामिल थीं। हंगामे और गोलबारी के बीच रात्रि करीब एक बजे रामपुर तिराहा पर बस रुकवा ली गई। पीएसी की दो सिपाही बस में चढ़ गए और दोनों दोषियों ने महिला आंदोलनकारी के साथ छेड़छाड़ व अभद्र व्यवहार और दुष्कर्म किया।

यह भी पढ़ें: रामपुर तिराहा कांड: दोषी सिपाहियों को उम्रकैद, अर्थदंड भी लगाया, अदालत ने जलियांवाला बाग से की प्रकरण की तुलना

Rampur Tiraha case: victim told tory of Two PAC constables in court
आंदोलन में शामिल थीं महिलाएं

दोषियों ने पीड़िता से सोने की चेन और एक हजार रुपये भी लूट लिए थे। आंदोलनकारियों पर मुकदमे दर्ज किए गए। मामले में आरोपियों के खिलाफ उत्तराखंड संघर्ष समिति ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद 25 जनवरी 1995 को सीबीआई ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए थे।

Rampur Tiraha case: victim told tory of Two PAC constables in court
मुजफ्फरनगर कोर्ट में पेशी पर पहुंचे रामपुर तिराहा कांड के आरोपी और अन्य।

रामपुर तिराहा कांड की पीड़िता को जब अदालत में पेश किया गया तो बुजुर्ग महिला ने 29 साल बाद दो आरोपियों को पहचान लिया और अदालत के सामने पुलिस की बर्बरता की कहानी बयान की थी।

मामले में चली सुनवाई के दौरान जब पिछले वर्ष बुजुर्ग महिला ने दो आरोपियों को पहचान लिया और अदालत के सामने पुलिस की बर्बरता की कहानी बयान की। अदालत में प्रार्थना पत्र देकर अपने परिवार की जान को खतरा बताया। अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या-सात के पीठासीन अधिकारी शक्ति सिंह ने सुनवाई की।

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आरोपियों को लेकर जाती पुलिस - फोटो : अमर उजाला

पीड़िता ने जताया था जान का खतरा, मिल रही थीं धमकियां
उत्तराखंड़ पुलिस पौढ़ी गढ़वाल से पीड़िता को कड़ी सुरक्षा में लेकर अदालत पहुंची। गवाह ने अदालत में आरोपियों को पहचान लिया है। पीड़िता ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर कहा कि उसके परिवार को खतरा बना हुआ है। पहले भी दो बार हमले हो चुके हैं। बार-बार धमकी दी जा रही है। अदालत ने पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था के आदेश दिए थे। बयान के बाद उत्तराखंड पुलिस पीड़िता को  गवाही के बाद मुजफ्फरनगर पुलिस भी  पुरकाजी में उत्तराखंड बॉर्डर तक छोड़कर आई थी।

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जानकारी देते राजीव शर्मा, डीजीसी फौजदारी - फोटो : अमर उजाला
सोमवार को मामले में सजा के प्रश्न पर सुनवाई करते हुए अदालत ने इस कांड को जलियावाला बाग जैसी घटना के तुलना की। अदालत ने यह भी कहा कि पुलिस ने कई मामलों में वीरता का परिचय दिया प्रदेश का मान सम्मान बढ़ाया, लेकिन यह देश और न्यायालय की आत्मा को झकझोर देने वाला प्रकरण है।
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