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Janmashtami 2022: दुनिया में एकलौती है 1250 किलो वजनी सोने की बंशीधर की यह प्रतिमा, दर्शन कर हो जाएंगे निहाल
भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर मथुरा, वृंदावन, द्वारिका में भव्य आयोजन शुरू हो गए हैं। नटवर नागर की लीलाओं से जुड़ी झांकियां सजाई जा रही हैं। दुनिया भर में श्रीकृष्ण के ऐसे अनेकों मंदिर हैं, जिनकी सजावट और भव्यता अनूठी है। मगर एक मंदिर ऐसा है, जिसके बारे में जानकर आप हैरान रह जाएंगे। इस मंदिर में स्थापित भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा 32 मन सोने (एक मन में 40 किलो यानि करीब साढ़े 1250 किलोग्राम) से निर्मित है। बंशीधर की इस प्रतिमा का दिव्य दर्शन भक्तों को निहाल कर देता है। हर साल जन्माष्टमी पर यहां दर्शन-पूजन के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।
उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में अंतिम छोर पर स्थित विंढमगंज कस्बा से महज 10 किमी की दूरी पर झारखंड राज्य की सीमा में बांकी नदी के किनारे बंशीधर का ऐतिहासिक मंदिर स्थित है। यहां भगवान श्रीकृष्ण की करीब साढ़े चार फीट ऊंची प्रतिमा है। जो जमीन में काफी नीचे तक धंसे शेषनाग के फन पर निर्मित 24 पंखुड़ियों वाले विशाल कमल पुष्प पर विराजमान है। उनके बगल में ही श्रीराधारानी की अष्टधातु की प्रतिमा भी स्थापित है।
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बंशीधर मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
भगवान श्रीकृष्ण की इस प्रतिमा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि आज तक इस पर किसी तरह का पॉलिश नहीं किया गया है। बावजूद प्रतिमा की चमक धूमिल नहीं हुई है। कहीं भी पहले मंदिर बनता है, इसके बाद देवी-देवताओं की प्रतिमा स्थापित की जाती है। पर यहां पहले भगवान श्रीकृष्ण आए, इसके बाद मंदिर का निर्माण हुआ। मंदिर के नाम पर झारखंड सरकार ने शहर का नाम श्री बंशीधर नगर कर दिया।
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बंशीधर मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
नगर उंटारी राज परिवार के संरक्षण में बंसीधर मंदिर देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। यहां वृंदावन की तर्ज पर ही श्रीकृष्ण जन्मोत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। इसमें रोजाना श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं का मंचन भी हो रहा है।
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द्रौपदी मुर्मू
- फोटो : पीटीआई
श्री बंशीधर मंदिर को विकसित करने के उद्देश्य से झारखंड सरकार की ओर से श्री बंशीधर महोत्सव का शुभारंभ किया गया था। यह आयोजन वर्ष 2017 और 2018 में 2018 में हुआ। इसके बाद पिछले तीन वर्षों से श्री बंशीधर महोत्सव का आयोजन राज्य सरकार की ओर से नहीं हो सका। पहली बार बंशीधर महोत्सव का उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास व दूसरी बार तत्कालीन राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने किया था।
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बंशीधर मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
मंदिर के प्रस्तर लेख और पुजारी स्व. सिद्धेश्वर तिवारी की लिखित पुस्तक के अनुसार संवत 1885 में श्रीकृष्ण की अनन्य भक्त नगर गढ़ के महाराज स्व. भवानी सिंह की विधवा रानी शिवमणि देवी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को उपवास रखकर भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन थीं। आधी रात में भगवान श्रीकृष्ण ने रानी के स्वप्न में आकर दर्शन दिए और रानी के आग्रह पर नगर उंटारी लाने की अनुमति दी।
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