सावन शुक्ल पंचमी पर मंगलवार को पूरा देश नागपंचमी का त्योहार मनाएगा। इस दिन नाग देव की पूजा का विधान है। कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए भी लोग नाम पंचमी पर विशेष अनुष्ठान करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में नाग देव को दूध और लावा चढ़ाने का चलन है। इस दिन लोग नाग (सांप) के दर्शन को भी काफी शुभ मानते हैं। वैसे तो देश भर में तरह-तरह के सांप पाए जाते हैं, लेकिन एक जगह ऐसी है, जहां दुनिया के तीन सबसे खतरनाक सांप बहुतायत में मिलते हैं।
इसमें तो एक सांप ऐसा है जो सिर्फ वहीं पाया जाता है और यह इतना जहरीला है कि उसके डंसने के बाद त्वरित उपचार न मिले तो बचना भी मुश्किल होता है। वह जगह है, उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में स्थित सोनभद्र। घने वन, ऊंचे पहाड़ और प्रचुर खनिज संपदा के लिए जाना जाने वाला सोनभद्र ऊर्जा की राजधानी भी है। यहां प्राकृतिक सुंदरता भी भरपूर है। इन तमाम खूबियों के साथ खतरनाक सांपों की धरती के रूप में भी इसकी पहचान है।
दुनिया के 10 सबसे जहरीले सांपों में से तीन प्रजातियां सोनभद्र में पाई जाती हैं। इन प्रजातियों में करैत, कोबरा और रसेल वाइपर शामिल हैं। यहां के जंगलों और पहाड़ों के बीच यह सांप बहुतायत में मिलते हैं। कहा जाता है कि इनके डंसने के बाद बचना मुश्किल होता है।
इन सांपों के प्रभाव से ही सोनभद्र जिले में हर साल 80 से 100 मौतें भी होती हैं। करैत और कोबरा के बारे में तो अक्सर सुनने को मिलता है, लेकिन रसेल वाइपर सिर्फ सोनभद्र में ही मिलता है। जिले के बभनी, म्योरपुर व राबर्ट्सगंज में यह सांप सबसे अधिक बार देखा गया है। इसके अलावा अन्य क्षेत्रों में भी यह कभी-कभी दिख जाते हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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सबसे बड़े वन क्षेत्र वाले रेणुकूट वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) मनमोहन मिश्र बताते हैं कि दुनिया के तीन सबसे खतरनाक सांप सोनभद्र में मौजूद हैं। यहां करैत बहुतायत मिलते हैं। करैत की दो प्रजातियां जिले में है। दूसरे नंबर पर कोबरा भी यहां हैं। इसमें सिर पर एक टोपी, दो टोपी व बगैर टोपी वाले मिलते हैं।
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सोनभद्र के जंगल में मिला कोबरा
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कोबरा को ही नाग भी कहा जाता है। तीसरा है रसेल वाइपर। इन सांपों में इतना विष होता है कि डंसने के घंटे भर में ही मौत हो सकती है। यह डंसते वक्त विष निकलने पर निर्भर करता है।