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एपीएल गेहूं घोटाला: लुधियाना कोर्ट ने 17 दोषियों को सुनाई सजा, फर्जी गेट पास से 1100 बैग गेहूं बेचा था
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना (पंजाब)
Published by: Nivedita
Updated Sat, 28 Mar 2026 08:58 AM IST
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सार
सरकारी योजना के तहत गरीबों के लिए आए 1100 से अधिक गेहूं के बैग फर्जी गेट पास के जरिए गोदामों से निकालकर निजी फ्लोर मिलों को बेच दिए गए। अदालत ने टिप्पणी की कि यह सुनियोजित साजिश थी, जिसमें जाली दस्तावेजों के जरिए सरकारी संपत्ति की हेराफेरी कर राजकोष को भारी नुकसान पहुंचाया गया।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
2012 के बहुचर्चित एपीएल गेहूं घोटाले में लुधियाना की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए 17 दोषियों को सजा सुनाई है। स्पेशल जज अमरिंदर सिंह शेरगिल की अदालत ने 13 दोषियों को पांच-पांच साल और चार दोषियों को चार-चार साल की सख्त कैद दी है। अदालत ने 23 मार्च को सभी को दोषी करार दिया था।
इस मामले में कुल 30 आरोपी थे, जिनमें से 17 को दोषी पाया गया। छह आरोपी साक्ष्यों के अभाव में बरी हुए, जबकि पांच की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है। एक आरोपी भगोड़ा है और एक के खिलाफ कार्यवाही समाप्त की गई। सजा पाने वालों में अधिकतर डिपो होल्डर, एक फ्लोर मिल मालिक और एक निजी फर्म संचालक शामिल हैं।
विजिलेंस ब्यूरो ने 1 सितंबर 2012 को इस घोटाले का खुलासा किया था। जांच में सामने आया कि सरकारी योजना के तहत गरीबों के लिए आए 1100 से अधिक गेहूं के बैग फर्जी गेट पास के जरिए गोदामों से निकालकर निजी फ्लोर मिलों को बेच दिए गए। अदालत ने टिप्पणी की कि यह सुनियोजित साजिश थी, जिसमें जाली दस्तावेजों के जरिए सरकारी संपत्ति की हेराफेरी कर राजकोष को भारी नुकसान पहुंचाया गया।
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इस मामले में कुल 30 आरोपी थे, जिनमें से 17 को दोषी पाया गया। छह आरोपी साक्ष्यों के अभाव में बरी हुए, जबकि पांच की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है। एक आरोपी भगोड़ा है और एक के खिलाफ कार्यवाही समाप्त की गई। सजा पाने वालों में अधिकतर डिपो होल्डर, एक फ्लोर मिल मालिक और एक निजी फर्म संचालक शामिल हैं।
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विजिलेंस ब्यूरो ने 1 सितंबर 2012 को इस घोटाले का खुलासा किया था। जांच में सामने आया कि सरकारी योजना के तहत गरीबों के लिए आए 1100 से अधिक गेहूं के बैग फर्जी गेट पास के जरिए गोदामों से निकालकर निजी फ्लोर मिलों को बेच दिए गए। अदालत ने टिप्पणी की कि यह सुनियोजित साजिश थी, जिसमें जाली दस्तावेजों के जरिए सरकारी संपत्ति की हेराफेरी कर राजकोष को भारी नुकसान पहुंचाया गया।