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पराली और कचरे से ऊर्जा: गैस संकट के बीच लुधियाना मॉडल हिट, सूरत-बांग्लादेश से बेहतर स्थिति में उद्यमी

राजीव शर्मा, संवाद, लुधियाना (पंजाब) Published by: Nivedita Updated Mon, 30 Mar 2026 01:33 PM IST
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सार

गैस किल्लत के बीच उद्योग ने पारंपरिक गैस आधारित सिस्टम पर निर्भरता घटाते हुए चावल का छिलका, पराली, दालों का अवशेष और पार्कों से निकलने वाले जैविक कचरे को ऊर्जा स्रोत के रूप में अपनाया है।

Energy from Stubble and Waste Ludhiana Model Amidst Gas Crisis
उद्योग - फोटो : संवाद
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विस्तार

वैश्विक स्तर पर ईंधन संकट गहराने के बीच लुधियाना की डाइंग और गारमेंट इंडस्ट्री ने वैकल्पिक ऊर्जा का सफल मॉडल विकसित कर नई मिसाल पेश की है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण गैस और पेट्रोलियम उत्पादों की कमी से जहां कई औद्योगिक इकाइयां प्रभावित हो रही हैं, वहीं लुधियाना के उद्यमियों ने एग्रो वेस्ट को ईंधन बनाकर उत्पादन को जारी रखा है।

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उद्योग ने पारंपरिक गैस आधारित सिस्टम पर निर्भरता घटाते हुए चावल का छिलका, पराली, दालों का अवशेष और पार्कों से निकलने वाले जैविक कचरे को ऊर्जा स्रोत के रूप में अपनाया है। इनसे स्टीम और बिजली तैयार की जा रही है, जिससे उत्पादन प्रक्रिया बिना रुकावट चल रही है।
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इस मॉडल से उद्योगों को महंगे गैस ईंधन से राहत मिली है। साथ ही किसानों की पराली निपटान की समस्या का समाधान भी निकला है। खुले में पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण में कमी आई है। यानी एक ही समाधान से उद्योग, पर्यावरण और कृषि—तीनों को लाभ मिला है।

जहां सूरत और बांग्लादेश जैसे प्रमुख टेक्सटाइल हब गैस की कमी से जूझ रहे हैं और उनकी डाइंग इंडस्ट्री प्रभावित हो रही है, वहीं लुधियाना के उद्योग इस वैकल्पिक ईंधन के सहारे बेहतर स्थिति में हैं। इससे उनकी उत्पादन क्षमता बनी हुई है और बाजार में प्रतिस्पर्धा भी मजबूत हुई है।

उद्योग पर गैस आधारित सिस्टम अपनाने का था दबाव

पंजाब डायर्स एसोसिएशन, फोकल प्वाइंट डिवीजन के प्रवक्ता व गुलाब डाइंग के संचालक राहुल वर्मा ने बताया कि कुछ साल पहले तक उद्योग पर गैस आधारित सिस्टम अपनाने का दबाव था। लेकिन उद्योगपतियों ने दूरदर्शिता दिखाते हुए बॉयलर कंपनियों के साथ मिलकर वैकल्पिक ईंधन पर काम शुरू किया। आज यही प्रयास सफल मॉडल बनकर सामने आया है।

उन्होंने कहा कि एग्रो वेस्ट आधारित बॉयलर सिस्टम लागत को नियंत्रित करता है और ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाता है, जिससे उत्पादन में रुकावट की आशंका कम हो जाती है।

हाल ही में पंजाब इन्वेस्ट समिट में उद्योग प्रतिनिधियों ने सरकार के सामने डाइंग क्लस्टर विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा है। इसमें कॉमन बॉयलर के जरिए शहर के कचरे और पराली से ऊर्जा उत्पादन करने की योजना है।

नीति लाने का दिया आश्वासन

उद्योग एवं स्थानीय निकाय मंत्री संजीव अरोड़ा ने इस प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख दिखाया है और क्लस्टर आधारित इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए नीति लाने का आश्वासन दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल बड़े स्तर पर लागू हुआ तो पंजाब के साथ-साथ देश के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों के लिए भी मार्गदर्शक बन सकता है।

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