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Mohali News: के-एरिया मोड़ पर एआई ट्रैफिक लाइटें बनीं शोपीस, हादसों का खतरा बरकरार
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जीरकपुर। शहर के व्यस्त के-एरिया मोड़ पर आधुनिक ट्रैफिक व्यवस्था के दावे फिलहाल खोखले साबित हो रहे हैं। यहां एनएचएआई की करीब दो माह पहले लगाई गई एआई बेस्ड ट्रैफिक लाइटें शोपीस बनकर खड़ी हैं। लाइटें लगने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि हादसों पर लगाम लगेगी, लेकिन उनके बंद रहने से जोखिम जस का तस बना हुआ है। रोजाना हजारों वाहनों की आवाजाही वाले इस मोड़ पर अव्यवस्थित ट्रैफिक लोगों के लिए परेशानी और खतरा दोनों बढ़ा रहा है। कंपनी मालिक सतकारदीप सिंह का कहना है कि के-एरिया मोड़ पर एआई बेस्ड ट्रैफिक लाइट लगाने में करीब 15 लाख रुपये खर्च किए गए।
सभी आठ पॉइंट पर लाइटें इंस्टॉल भी हो चुकी हैं, लेकिन टेंडर कंपनी को अभी तक मात्र एक लाख रुपये का ही भुगतान हुआ है। कंपनी का कहना है कि पूरा भुगतान मिलते ही लाइटों को चालू कर दिया जाएगा। ठेकेदार सुमित हुड्डा के अनुसार, ट्रायल के दौरान कुछ तकनीकी इश्यू सामने आए। वायरिंग लूज और छोटे तकनीकी समस्याओं के कारण सिस्टम पूरी तरह काम नहीं कर पाया। कंपनी का दावा है कि इन खामियों को जल्द ठीक कर लाइटों को चालू किया जाएगा। एनएचएआई के जनरल मैनेजर इकबाल सिंह का कहना है कि भुगतान में देरी की वजह की जांच की जा रही है। जल्द ही स्थिति स्पष्ट कर लाइटें चालू करवाई जाएंगी।
ऐसे काम करती हैं एआई बेस्ड लाइटें
एआई बेस्ड लाइटें सेंसर और कैमरों से ट्रैफिक घनत्व पहचानती हैं। इसके आधार पर सिग्नल का समय अपने आप बदलता है। ज्यादा ट्रैफिक वाले रास्ते को अधिक समय और कम ट्रैफिक वाले को कम समय दिया जाता है, जिससे जाम की समस्या कम होती है।
एआई ट्रैफिक सिस्टम के फायदे
ट्रैफिक जाम में कमी और बेहतर फ्लो, हादसों की संभावना में कमी, ईंधन बचत और प्रदूषण में कमी, रियल टाइम ट्रैफिक मैनेजमेंट, मैनुअल हस्तक्षेप की जरूरत कम
स्थानीय लोगों का गुस्सा
समाजसेवी सत्यवान ढांडा ने कहा कि लाखों के प्रोजेक्ट और आधुनिक तकनीक के बावजूद के-एरिया मोड़ पर लापरवाही और तालमेल की कमी के चलते लोगों को राहत नहीं मिल रही। यह लापरवाही वाहन चालकों के लिए जान का खतरा बनी हुई है। लोग एनएचएआई और संबंधित अधिकारियों से मांग कर रहे हैं कि भुगतान और तकनीकी खामियों को तुरंत दूर कर लाइटों को चालू किया जाए, ताकि मोड़ पर सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन सुचारू रूप से सुनिश्चित हो सके।
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सभी आठ पॉइंट पर लाइटें इंस्टॉल भी हो चुकी हैं, लेकिन टेंडर कंपनी को अभी तक मात्र एक लाख रुपये का ही भुगतान हुआ है। कंपनी का कहना है कि पूरा भुगतान मिलते ही लाइटों को चालू कर दिया जाएगा। ठेकेदार सुमित हुड्डा के अनुसार, ट्रायल के दौरान कुछ तकनीकी इश्यू सामने आए। वायरिंग लूज और छोटे तकनीकी समस्याओं के कारण सिस्टम पूरी तरह काम नहीं कर पाया। कंपनी का दावा है कि इन खामियों को जल्द ठीक कर लाइटों को चालू किया जाएगा। एनएचएआई के जनरल मैनेजर इकबाल सिंह का कहना है कि भुगतान में देरी की वजह की जांच की जा रही है। जल्द ही स्थिति स्पष्ट कर लाइटें चालू करवाई जाएंगी।
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ऐसे काम करती हैं एआई बेस्ड लाइटें
एआई बेस्ड लाइटें सेंसर और कैमरों से ट्रैफिक घनत्व पहचानती हैं। इसके आधार पर सिग्नल का समय अपने आप बदलता है। ज्यादा ट्रैफिक वाले रास्ते को अधिक समय और कम ट्रैफिक वाले को कम समय दिया जाता है, जिससे जाम की समस्या कम होती है।
एआई ट्रैफिक सिस्टम के फायदे
ट्रैफिक जाम में कमी और बेहतर फ्लो, हादसों की संभावना में कमी, ईंधन बचत और प्रदूषण में कमी, रियल टाइम ट्रैफिक मैनेजमेंट, मैनुअल हस्तक्षेप की जरूरत कम
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समाजसेवी सत्यवान ढांडा ने कहा कि लाखों के प्रोजेक्ट और आधुनिक तकनीक के बावजूद के-एरिया मोड़ पर लापरवाही और तालमेल की कमी के चलते लोगों को राहत नहीं मिल रही। यह लापरवाही वाहन चालकों के लिए जान का खतरा बनी हुई है। लोग एनएचएआई और संबंधित अधिकारियों से मांग कर रहे हैं कि भुगतान और तकनीकी खामियों को तुरंत दूर कर लाइटों को चालू किया जाए, ताकि मोड़ पर सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन सुचारू रूप से सुनिश्चित हो सके।