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Mohali News: सबूतों के अभाव में दुष्कर्म मामले का आरोपी बरी
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मोहाली। दुष्कर्म के एक चर्चित मामले में जिला अदालत ने सबूतों की कमी के चलते आरोपी को बरी कर दिया। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने लंबी सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष के वकील गुरप्रीत सिंह भट्टी और राम धीमान ने अदालत में दलील दी कि शिकायतकर्ता के आरोप तथ्यों पर खरे नहीं उतरते। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान पेश की गई एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैब) रिपोर्ट में भी यह स्पष्ट हुआ कि कथित दुष्कर्म आरोपी द्वारा नहीं किया गया था।
बचाव पक्ष के अनुसार अदालत में पेश सबूतों और गवाहों के बयानों में कई विरोधाभास सामने आए, जिससे शिकायतकर्ता की कहानी संदेह के घेरे में आ गई। करीब तीन साल तक चले ट्रायल के बाद अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोप साबित करने में असफल रहा है। इसी आधार पर कोर्ट ने आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत के इस फैसले के बाद आरोपी पक्ष ने राहत की सांस ली है। वहीं, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि आपराधिक मामलों में दोष सिद्ध करने के लिए ठोस और पुख्ता सबूत जरूरी होते हैं, अन्यथा अदालत को आरोपी को संदेह का लाभ देना पड़ता है।
मामले के अनुसार मोहाली की एक युवती ने वर्ष 2023 में हरियाणा निवासी अपने पति के खिलाफ वूमन सेल थाना में दुष्कर्म और मारपीट का केस दर्ज करवाया था। शिकायत में युवती ने आरोप लगाया था कि उसके पति ने उसके साथ जबरन संबंध बनाए। जानकारी के मुताबिक दोनों की मुलाकात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म स्नैपचैट पर हुई थी, जिसके बाद उनकी दोस्ती बढ़ी और वर्ष 2022 में दोनों ने शादी कर ली। आरोप था कि शादी के बाद भी युवती का संबंध किसी अन्य व्यक्ति के साथ था। पति के विरोध करने पर मामला विवाद में बदल गया और युवती ने अपने ही पति के खिलाफ शिकायत दर्ज करवा दी।
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बचाव पक्ष के अनुसार अदालत में पेश सबूतों और गवाहों के बयानों में कई विरोधाभास सामने आए, जिससे शिकायतकर्ता की कहानी संदेह के घेरे में आ गई। करीब तीन साल तक चले ट्रायल के बाद अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोप साबित करने में असफल रहा है। इसी आधार पर कोर्ट ने आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत के इस फैसले के बाद आरोपी पक्ष ने राहत की सांस ली है। वहीं, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि आपराधिक मामलों में दोष सिद्ध करने के लिए ठोस और पुख्ता सबूत जरूरी होते हैं, अन्यथा अदालत को आरोपी को संदेह का लाभ देना पड़ता है।
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मामले के अनुसार मोहाली की एक युवती ने वर्ष 2023 में हरियाणा निवासी अपने पति के खिलाफ वूमन सेल थाना में दुष्कर्म और मारपीट का केस दर्ज करवाया था। शिकायत में युवती ने आरोप लगाया था कि उसके पति ने उसके साथ जबरन संबंध बनाए। जानकारी के मुताबिक दोनों की मुलाकात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म स्नैपचैट पर हुई थी, जिसके बाद उनकी दोस्ती बढ़ी और वर्ष 2022 में दोनों ने शादी कर ली। आरोप था कि शादी के बाद भी युवती का संबंध किसी अन्य व्यक्ति के साथ था। पति के विरोध करने पर मामला विवाद में बदल गया और युवती ने अपने ही पति के खिलाफ शिकायत दर्ज करवा दी।