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72 घंटे तक खदान में फंसा रहा मजदूर का शव: पानी से भरी मार्बल खदान बनी मौत का कुआं, बेनीवाल ने सरकार को घेरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर
Published by: नागौर ब्यूरो
Updated Sun, 31 May 2026 10:25 PM IST
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सार
मकराना की माताभर मार्बल खदान में गिरने से मजदूर रामनिवास जाट की मौत हो गई। खदान में भारी जलभराव के कारण शव 72 घंटे तक फंसा रहा। तीन दिन के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद शव बाहर निकाला गया। घटना पर सांसद हनुमान बेनीवाल ने सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाए।
रेस्क्यू के बाद निकाला शव व मृतक की तस्वीर
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
डीडवाना-कुचामन जिले के मकराना स्थित माताभर मार्बल खनन क्षेत्र में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। खदान में कार्यरत एक मजदूर का पैर फिसलने से वह पानी से भरी गहरी खदान में गिर गया, जिससे उसकी मौत हो गई। अत्यधिक जलभराव के कारण शव 72 घंटे तक खदान में फंसा रहा और लगातार तीन दिन तक चले राहत एवं बचाव अभियान के बाद रविवार को उसे बाहर निकाला जा सका।
जानकारी के अनुसार, जाखली निवासी रामनिवास जाट पुत्र हनुमानराम जाट गुरुवार देर रात खदान में काम कर रहा था। इसी दौरान उसका संतुलन बिगड़ गया और वह पानी से भरी खदान में जा गिरा। हादसा इतना गंभीर था कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई। रात का समय होने और खदान में भारी मात्रा में पानी भरा होने के कारण तत्काल रेस्क्यू शुरू नहीं किया जा सका। शुक्रवार सुबह प्रशासन, पुलिस और खनन विभाग की टीमों ने संयुक्त रूप से बचाव अभियान शुरू किया। मोटरों की सहायता से लगातार पानी निकालने का प्रयास किया गया, लेकिन खदान की गहराई और जलभराव के चलते राहत कार्य चुनौतीपूर्ण बना रहा।
तीन दिन बाद दिखा शव
लगातार तीन दिन तक पानी निकालने के बाद रविवार दोपहर करीब 12 बजे जलस्तर कम होने पर शव दिखाई दिया। इसके बाद क्रेन की मदद से शव को बाहर निकाला गया। मौके पर मौजूद मेडिकल टीम ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। घटना के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिसकर्मियों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों की बड़ी संख्या मौके पर मौजूद रही।
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हादसे पर सांसद हनुमान बेनीवाल ने उठाए सवाल
नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने इस घटना को लेकर सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि 72 घंटे तक शव खदान में फंसा रहा, लेकिन कोई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। बेनीवाल ने आरोप लगाया कि राहत एवं बचाव कार्य में लगी एसडीआरएफ टीम के पास पर्याप्त क्षमता वाली मोटरें उपलब्ध नहीं थीं, जिससे अभियान प्रभावित हुआ। उन्होंने मुख्यमंत्री से पीड़ित परिवार की स्थिति पर संवेदनशीलता दिखाने की अपील करते हुए भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एनडीआरएफ और आधुनिक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की।
ये भी पढ़ें- ‘जिन्होंने विधानसभा भेजा, उनके लिए आखिरी सांस तक लड़ूंगा’: रविंद्र भाटी ने भरी हुंकार; अब क्या होगा अगला कदम?
प्रशासन ने बताया चुनौतीपूर्ण था रेस्क्यू
मकराना उपखंड अधिकारी अंशुल सिंह ने बताया कि खदान में अत्यधिक पानी भरा होने के कारण बचाव कार्य काफी कठिन था। लगातार तीन दिनों तक पानी निकालने के बाद शव तक पहुंचा जा सका। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित विभागों ने समन्वय के साथ कार्य किया और रविवार को सफलतापूर्वक शव को बाहर निकाल लिया गया।
जानकारी के अनुसार, जाखली निवासी रामनिवास जाट पुत्र हनुमानराम जाट गुरुवार देर रात खदान में काम कर रहा था। इसी दौरान उसका संतुलन बिगड़ गया और वह पानी से भरी खदान में जा गिरा। हादसा इतना गंभीर था कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई। रात का समय होने और खदान में भारी मात्रा में पानी भरा होने के कारण तत्काल रेस्क्यू शुरू नहीं किया जा सका। शुक्रवार सुबह प्रशासन, पुलिस और खनन विभाग की टीमों ने संयुक्त रूप से बचाव अभियान शुरू किया। मोटरों की सहायता से लगातार पानी निकालने का प्रयास किया गया, लेकिन खदान की गहराई और जलभराव के चलते राहत कार्य चुनौतीपूर्ण बना रहा।
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तीन दिन बाद दिखा शव
लगातार तीन दिन तक पानी निकालने के बाद रविवार दोपहर करीब 12 बजे जलस्तर कम होने पर शव दिखाई दिया। इसके बाद क्रेन की मदद से शव को बाहर निकाला गया। मौके पर मौजूद मेडिकल टीम ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। घटना के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिसकर्मियों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों की बड़ी संख्या मौके पर मौजूद रही।
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हादसे पर सांसद हनुमान बेनीवाल ने उठाए सवाल
नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने इस घटना को लेकर सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि 72 घंटे तक शव खदान में फंसा रहा, लेकिन कोई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। बेनीवाल ने आरोप लगाया कि राहत एवं बचाव कार्य में लगी एसडीआरएफ टीम के पास पर्याप्त क्षमता वाली मोटरें उपलब्ध नहीं थीं, जिससे अभियान प्रभावित हुआ। उन्होंने मुख्यमंत्री से पीड़ित परिवार की स्थिति पर संवेदनशीलता दिखाने की अपील करते हुए भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एनडीआरएफ और आधुनिक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की।
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प्रशासन ने बताया चुनौतीपूर्ण था रेस्क्यू
मकराना उपखंड अधिकारी अंशुल सिंह ने बताया कि खदान में अत्यधिक पानी भरा होने के कारण बचाव कार्य काफी कठिन था। लगातार तीन दिनों तक पानी निकालने के बाद शव तक पहुंचा जा सका। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित विभागों ने समन्वय के साथ कार्य किया और रविवार को सफलतापूर्वक शव को बाहर निकाल लिया गया।