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Shimla News: आसमान से गिरी बर्फ की चांदी से किसानों को सोने की उम्मीद
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बर्फबारी से किसानों और बागवानों को मिली राहत, चिलिंग ऑवर्स पूरा होने से उत्पादन बढ़ने की आस
जिले में नमी की कमी से पीली पड़ रही थी गेहूं
जौ और मटर जैसी रबी फसलों को मिली संजीवनी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिले में ढाई माह के सूखे के कारण सेब के बगीचों के लिए पैदा हुआ संकट दूर हो गया है। अब ऊपरी शिमला में सेब के चिलिंग ऑवर्स पूरे होने की उम्मीद बढ़ गई है। इसके अलावा बगीचों में फैल रहे रोगों पर भी प्राकृतिक रूप से नियंत्रण होगा।
जिले के मशोबरा, टुटू, जाठिया देवी सहित अन्य क्षेत्रों में भी खेतों में नमी की कमी से पीली पड़ रही गेहूं, जौ और मटर जैसी फसलों को बारिश तथा बर्फबारी से संजीवनी मिली है। बागवानी विशेषज्ञों के अनुसार चिलिंग ऑवर्स के मूल्यांकन के लिए औसतन तापमान 7 डिग्री सेल्सियस से कम होना चाहिए। 5 से 6 दिन तक औसतन तापमान 7 डिग्री सेल्सियस से कम होना जरूरी है। ऐसा हो तो चिलिंग ऑवर्स की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती है। किसानों और बागवानों ने उम्मीद जताई है कि आने वाले दिनों में बारिश और बर्फबारी होगी तो इससे खेती तथा बागवानी के लिए राहत मिलेगी। बगीचों में अभी तक पत्ते झड़ने की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई थी।
आमतौर पर दिसंबर तक सेब के बगीचों में पत्ते झड़ जाते हैं। अब पत्ते झड़ने की प्रक्रिया भी शुरू होगी और पौधा सुप्तावस्था में चला जाएगा। संयुक्त किसान मंच के संयोजक एवं बागवान हरीश चौहान ने कहा कि बारिश और बर्फबारी खेती तथा बागवानी के लिए अच्छी है। ऊपरी शिमला में सूखे के चलते बगीचों में अटके कार्य अब शुरू हो जाएंगे।
बगीचों में अटके कार्य पकड़ेंगे रफ्तार
जिले में लगातार सूखा पड़ने की वजह से ऊपरी शिमला के बगीचों में तौलिए बनाने सहित नए पौधों की रोपाई के कार्य अटक गए थे। इसके लिए बागवानों को बारिश और बर्फबारी का इंतजार था। मशोबरा के उद्यान विषय विशेषज्ञ शरद गुप्ता ने बताया कि एक हफ्ते के अंदर पौधे बिक्री के लिए मशोबरा विकास खंड में पहुंच जाएंगे। इसके बाद पहले आओ पहले पाओ के आधार पर इनकी बिक्री शुरू हो जाएगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिले में ढाई माह के सूखे के कारण सेब के बगीचों के लिए पैदा हुआ संकट दूर हो गया है। अब ऊपरी शिमला में सेब के चिलिंग ऑवर्स पूरे होने की उम्मीद बढ़ गई है। इसके अलावा बगीचों में फैल रहे रोगों पर भी प्राकृतिक रूप से नियंत्रण होगा।
जिले के मशोबरा, टुटू, जाठिया देवी सहित अन्य क्षेत्रों में भी खेतों में नमी की कमी से पीली पड़ रही गेहूं, जौ और मटर जैसी फसलों को बारिश तथा बर्फबारी से संजीवनी मिली है। बागवानी विशेषज्ञों के अनुसार चिलिंग ऑवर्स के मूल्यांकन के लिए औसतन तापमान 7 डिग्री सेल्सियस से कम होना चाहिए। 5 से 6 दिन तक औसतन तापमान 7 डिग्री सेल्सियस से कम होना जरूरी है। ऐसा हो तो चिलिंग ऑवर्स की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती है। किसानों और बागवानों ने उम्मीद जताई है कि आने वाले दिनों में बारिश और बर्फबारी होगी तो इससे खेती तथा बागवानी के लिए राहत मिलेगी। बगीचों में अभी तक पत्ते झड़ने की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई थी।
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आमतौर पर दिसंबर तक सेब के बगीचों में पत्ते झड़ जाते हैं। अब पत्ते झड़ने की प्रक्रिया भी शुरू होगी और पौधा सुप्तावस्था में चला जाएगा। संयुक्त किसान मंच के संयोजक एवं बागवान हरीश चौहान ने कहा कि बारिश और बर्फबारी खेती तथा बागवानी के लिए अच्छी है। ऊपरी शिमला में सूखे के चलते बगीचों में अटके कार्य अब शुरू हो जाएंगे।
बगीचों में अटके कार्य पकड़ेंगे रफ्तार
जिले में लगातार सूखा पड़ने की वजह से ऊपरी शिमला के बगीचों में तौलिए बनाने सहित नए पौधों की रोपाई के कार्य अटक गए थे। इसके लिए बागवानों को बारिश और बर्फबारी का इंतजार था। मशोबरा के उद्यान विषय विशेषज्ञ शरद गुप्ता ने बताया कि एक हफ्ते के अंदर पौधे बिक्री के लिए मशोबरा विकास खंड में पहुंच जाएंगे। इसके बाद पहले आओ पहले पाओ के आधार पर इनकी बिक्री शुरू हो जाएगी।