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अंग्रेजी सीखना स्वागत योग्य, पर मातृभाषा की कीमत पर नहीं : गुप्ता
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सचित्र
नागपुर में राज्यपाल ने भारतीय युवा संसद के राष्ट्रीय सत्र को किया संबोधित
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने रविवार को नागपुर स्थित महर्षि व्यास सभागार में आयोजित भारतीय युवा संसद के राष्ट्रीय सत्र को संबोधित किया। इस सत्र का आयोजन भारतीय युवा संसद-मीडिया फाउंडेशन और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की ओर से संयुक्त रूप से किया गया। कार्यक्रम में देशभर से लगभग 600 युवा प्रतिभागियों ने भाग लिया और राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर सार्थक लोकतांत्रिक विचार-विमर्श किया।
युवाओं को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि किसी राष्ट्र की भाषाएं केवल संचार का माध्यम नहीं होती, बल्कि वे उसकी आत्मा, स्मृति और जीवंत पहचान होती है। उन्होंने वर्तमान पीढ़ी में मातृभाषा में संवाद को लेकर बढ़ती झिझक पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे गंभीर सांस्कृतिक चेतावनी बताया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी सीखना स्वागत योग्य है, लेकिन अपनी भाषा की कीमत पर नहीं। जो बच्चा अपनी मातृभाषा में सोचता है, वह अधिक रचनात्मक, आत्मविश्वासी और अपनी संस्कृति से गहराई से जुड़ा होता है।
राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से संयुक्त राष्ट्र, जी-20 सम्मेलनों तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिंदी के प्रयोग को सांस्कृतिक आत्म सम्मान का प्रेरक उदाहरण बताया। उन्होंने हाल ही में आयोजित इंडिया एआई इंपैक्ट समिट - 2026 का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने वहां भी हिंदी में संबोधन देकर यह संदेश दिया कि भारत अपनी भाषा में ही अत्याधुनिक विषयों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर सोच, बोल और नेतृत्व कर सकता है।
इससे पूर्व, राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने नागपुर स्थित स्मृति भूमि में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रथम सरसंघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार तथा द्वितीय सरसंघचालक माधव सदाशिव गोलवलकर को उनकी समाधियों पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
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नागपुर में राज्यपाल ने भारतीय युवा संसद के राष्ट्रीय सत्र को किया संबोधित
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने रविवार को नागपुर स्थित महर्षि व्यास सभागार में आयोजित भारतीय युवा संसद के राष्ट्रीय सत्र को संबोधित किया। इस सत्र का आयोजन भारतीय युवा संसद-मीडिया फाउंडेशन और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की ओर से संयुक्त रूप से किया गया। कार्यक्रम में देशभर से लगभग 600 युवा प्रतिभागियों ने भाग लिया और राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर सार्थक लोकतांत्रिक विचार-विमर्श किया।
युवाओं को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि किसी राष्ट्र की भाषाएं केवल संचार का माध्यम नहीं होती, बल्कि वे उसकी आत्मा, स्मृति और जीवंत पहचान होती है। उन्होंने वर्तमान पीढ़ी में मातृभाषा में संवाद को लेकर बढ़ती झिझक पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे गंभीर सांस्कृतिक चेतावनी बताया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी सीखना स्वागत योग्य है, लेकिन अपनी भाषा की कीमत पर नहीं। जो बच्चा अपनी मातृभाषा में सोचता है, वह अधिक रचनात्मक, आत्मविश्वासी और अपनी संस्कृति से गहराई से जुड़ा होता है।
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राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से संयुक्त राष्ट्र, जी-20 सम्मेलनों तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिंदी के प्रयोग को सांस्कृतिक आत्म सम्मान का प्रेरक उदाहरण बताया। उन्होंने हाल ही में आयोजित इंडिया एआई इंपैक्ट समिट - 2026 का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने वहां भी हिंदी में संबोधन देकर यह संदेश दिया कि भारत अपनी भाषा में ही अत्याधुनिक विषयों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर सोच, बोल और नेतृत्व कर सकता है।
इससे पूर्व, राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने नागपुर स्थित स्मृति भूमि में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रथम सरसंघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार तथा द्वितीय सरसंघचालक माधव सदाशिव गोलवलकर को उनकी समाधियों पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।