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UP: अस्थायी, वर्कचार्ज कर्मचारियों को पुरानी पेंशन मामले में सरकार को राहत, हाईकोर्ट ने लगाई अंतरिम रोक

अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Fri, 03 Apr 2026 07:39 PM IST
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सार

High Court की लखनऊ पीठ ने अस्थायी और वर्कचार्ज कर्मचारियों को पुरानी पेंशन देने के आदेश पर रोक लगा दी। राज्य सरकार को राहत मिली है। मामले में अंतिम सुनवाई 27 अप्रैल को होगी, जिसमें महत्वपूर्ण कानूनी मुद्दों पर विस्तृत निर्णय लिया जाएगा।

UP Relief for Government in Old Pension Scheme Case Involving Temporary and Work-Charged Employees; High Cour
प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

एक अप्रैल 2005 के बाद नियमित हुए अस्थायी और वर्कचार्ज कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) का लाभ देने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के आदेश से राज्य सरकार को राहत मिली है।

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हाईकोर्ट के दो न्यायाधीशों की खंडपीठ ने अस्थायी व वर्कचार्ज कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने के एकल पीठ के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को निर्धारित की है, इस दिन मामले पर अंतिम सुनवाई की जाएगी।
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न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने यह आदेश लोक निर्माण विभाग की ओर से दाखिल 40 विशेष अपीलों पर एक साथ सुनवाई करते हुए दिया।राज्य सरकार ने चार नवंबर 2025 को एकल पीठ के दिए उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें अस्थायी और वर्कचार्ज कर्मचारियों की पूरी सेवा अवधि जोड़ते हुए उन्हें पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने का निर्देश दिया गया था, भले ही उनकी नियमित नियुक्ति एक अप्रैल 2005 के बाद हुई हो। सरकार की ओर से दलील दी गई कि एकल पीठ का निर्णय पूर्व में दो जजों की पीठ द्वारा दिए गए फैसलों के विपरीत है।

साथ ही यह भी कहा गया कि जिन कुछ निर्णयों पर एकल पीठ ने भरोसा किया था, उन्हें बाद में खंडपीठ द्वारा निरस्त किया जा चुका है। सुनवाई के दौरान खंडपीठ के समक्ष यह तथ्य भी कहा गया कि उत्तर प्रदेश पेंशन संशोधन अधिनियम 2021 की वैधता का मामला वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जिससे इस प्रकरण की संवेदनशीलता और बढ़ जाती है। खंडपीठ ने शुरुआती तौर पर माना कि मामले में जटिल और महत्वपूर्ण कानूनी सवाल शामिल हैं, जिनपर विस्तृत सुनवाई आवश्यक है।

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