Qalb AI: इस देश ने लॉन्च किया दुनिया का सबसे बड़ा उर्दू एआई मॉडल, क्या ChatGPT को मिलेगी टक्कर?
Urdu AI Model: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वैश्विक रेस में अब पाकिस्तान ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कर दी है। अमेरिका में पढ़ रहे एक पाकिस्तानी छात्र ने अपने साथियों के साथ मिलकर चैटजीपीटी को टक्कर देने वाला एआई एप Qalb (कल्ब) पेश किया है। इसके बाद से लगातार सवाल उठ रहे हैं कि क्या ये ChatGPT को टक्कर दे सकता है? या सिर्फ पाकिस्तान और उर्दू यूजर्स के लिए एक मजबूत समाधान है।
विस्तार
पाकिस्तान ने खास तौर पर उर्दू भाषा के लिए एक एआई मॉडल पेश किया है। जिसका नाम कल्ब रखा है। इस एप को अमेरिका में पढ़ाई कर रहे पाकिस्तानी छात्र तैमूर हसन ने अपनी छोटी टीम के साथ बनाया है। इसके लिए दावा भी किया जा रहा है कि ये दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा उर्दू स्पेशल एआई मॉडल है।
क्याें बन रहा ये चर्चा का विषय
लॉन्च के बाद से ही Qalb टेक्नोलॉजी और AI इंडस्ट्री में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसके पीछे की वजह है इसका विशाल डेटासेट है। इसे करीब 1.97 अरब टोकन पर ट्रेन किया गया है, जो उर्दू भाषा के लिए अब तक का सबसे बड़ा संग्रह है। इस मॉडल ने उर्दू बेंचमार्क टेस्ट में 90.34 का स्कोर हासिल किया है, जो पिछले बेस्ट मॉडल से 3.24 अंक ज्यादा है। इसकी उपयोगिता की बात करें तो ये खासतौर पर स्टार्टअप्स, शिक्षा जगत, वॉइस-कंट्रोल एजेंट्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के लिए कस्टमाइज किया गया है।
तैमूर के टीम में कौन-कौन शामिल?
Qalb AI को तैमूर हसन ने अपने कॉलेज रूममेट्स जवाद अहमद और मुहम्मद अवैस के साथ मिलकर बनाया है। जो कि अमेरिका की ऑबर्न यूनिवर्सिटी से मास्टर्स कर रहे हैं। आपको ये भी बता दें कि तैमूर कोई नए खिलाड़ी नहीं हैं। इसके पहले ये 13 स्टार्टअप्स बना चुके हैं और माइक्रोसॉफ्ट कप के विजेता भी रहे हैं।
ChatGPT Vs Qalb, क्या वाकई कोई मुकाबला ?
अगर चैटजीपीटी और कल्ब के बीच तुलना करें तो बात थोड़ी अलग हो जाती हैं, क्योंकि कहा जा रहा है कि कल्ब में सटीकता ज्यादा है। यानी की कल्ब एआई स्थानीय उर्दू मुहावरों, संस्कृति और व्याकरण को चैटजीपीटी की तुलना में बेहतर समझ सकता है क्योंकि इसका पूरा फोकस एक ही भाषा पर है। जबकि चैटजीपीटी एक ग्लोबल दिग्गज है जो 80 से भी ज्यादा भाषाओं में काम करता है और पश्चिमी डेटासेट पर आधारित है। तकनीकी रूप से Qalb AI को ChatGPT का विकल्प कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन टेक एक्सपर्ट्स का कहना है कि उर्दू भाषी देशों के लिए ये निश्चित रूप से अधिक प्रभावी और सटीक टूल साबित हो सकता है।
पाकिस्तान के लिए क्यों है यह खास?
पाकिस्तान में AI का उपयोग अभी शुरुआती दौर में है। कल्ब जैसे मॉडल्स आने से वहां की स्थानीय कंपनियां, सरकारी विभाग और छात्र अपनी मातृभाषा में एआई का लाभ उठा सकेंगे। यह न केवल डिजिटल विभाजन को कम करेगा, बल्कि क्षेत्रीय भाषाओं में तकनीकी विकास के नए रास्ते भी खोलेगा।