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यूपी: 4,500₹ में बन रहे जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र! आगरा नगर निगम में चल रहा बड़ा खेल; पड़ताल में बड़ा खुलासा
Sat, 24 Oct 2026 10:47 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Sat, 24 Oct 2026 10:47 AM IST
सार
आगरा नगर निगम के जोनल कार्यालयों में जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए कथित तौर पर दलालों द्वारा 4,500 रुपये तक मांगे जाने का मामला सामने आया है। वहीं, लोहामंडी, हरीपर्वत, छत्ता और ताजगंज जोन में हजारों आवेदन लंबित हैं। एक अक्तूबर से लागू नए नियमों के कारण विलंब से पंजीकरण कराने की प्रक्रिया जटिल हुई है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से जन्म या मृत्यु के 21 दिनों के भीतर पंजीकरण कराने की अपील की है।
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जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र काउंटर आगरा नगर निगम
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए 1 अक्तूबर से लागू किए गए नए नियमों ने लोगाें की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। यह परेशानी दलालों के लिए फायदे का सौदा बन गई है। नगर निगम के जोनल कार्यालयों में बैठे दलाल प्रमाणपत्र बनवाने के लिए लोगों को झांसा दे रहे हैं।
नियमों में बदलाव और मुश्किलें गिनाने के बाद झांसा देकर 4,500 रुपये तक वसूल रहे हैं। अमर उजाला संवाददाता ने लोहामंडी जोनल कार्यालय में जन्म प्रमाणपत्र के लिए बात की तो दलाल ने पहले सर्वर, डाटा गायब होने की मुश्किलें गिनाईं, फिर केस दिखाकर एक साल का लंबा इंतजार बताया। आखिर में 4,500 रुपये में एक माह के अंदर बिना आए ही प्रमाणपत्र पहुंचाने पर बात पक्की कर ली।
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नियमों में बदलाव और मुश्किलें गिनाने के बाद झांसा देकर 4,500 रुपये तक वसूल रहे हैं। अमर उजाला संवाददाता ने लोहामंडी जोनल कार्यालय में जन्म प्रमाणपत्र के लिए बात की तो दलाल ने पहले सर्वर, डाटा गायब होने की मुश्किलें गिनाईं, फिर केस दिखाकर एक साल का लंबा इंतजार बताया। आखिर में 4,500 रुपये में एक माह के अंदर बिना आए ही प्रमाणपत्र पहुंचाने पर बात पक्की कर ली।
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बातचीत के अंश
रिपोर्टर- बच्चे के एडमिशन के लिए जन्म प्रमाणपत्र बनवाना है।
दलाल- कितने साल पहले का जन्म है।
रिपोर्टर- जनवरी 2023 में घर पर ही जन्म हुआ है।
दलाल- 1 अक्तूबर से नियम बदल गए हैं। मुश्किल से बनेगा, एक साल लग सकता है। यह देखिए, सितंबर 2025 के अब तक नहीं बने।
रिपोर्टर- नहीं, एडमिशन के लिए फॉर्म निकलने वाले हैं। उससे पहले ही दिवाली पर चाहिए।
दलाल- दिवाली नहीं, दिसंबर में दे पाऊंगा। एसडीएम, कोर्ट दोनों जगह जाना पड़ता है।
रिपोर्टर- हम नहीं जा पाएंगे। खर्चा बताओ कितना लगेगा।
दलाल- चार हजार रुपये हमारे और 500 रुपये शपथपत्रों के।
रिपोर्टर- बच्चे के एडमिशन के लिए जन्म प्रमाणपत्र बनवाना है।
दलाल- कितने साल पहले का जन्म है।
रिपोर्टर- जनवरी 2023 में घर पर ही जन्म हुआ है।
दलाल- 1 अक्तूबर से नियम बदल गए हैं। मुश्किल से बनेगा, एक साल लग सकता है। यह देखिए, सितंबर 2025 के अब तक नहीं बने।
रिपोर्टर- नहीं, एडमिशन के लिए फॉर्म निकलने वाले हैं। उससे पहले ही दिवाली पर चाहिए।
दलाल- दिवाली नहीं, दिसंबर में दे पाऊंगा। एसडीएम, कोर्ट दोनों जगह जाना पड़ता है।
रिपोर्टर- हम नहीं जा पाएंगे। खर्चा बताओ कितना लगेगा।
दलाल- चार हजार रुपये हमारे और 500 रुपये शपथपत्रों के।
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हजारों आवेदन अटके
हरीपर्वत, छत्ता, लोहामंडी और ताजगंज जोन में जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए हजारों आवेदन अटके हुए हैं। सबसे खराब स्थिति लोहामंडी की है। लगातार चेतावनी के बाद भी हालात सुधर नहीं सके। लोहामंडी में 7 दिन में आवेदन वाले 2420 और एक महीने से ज्यादा वाले 2335 आवेदन लंबित हैं। इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। हरीपर्वत में 1,526, छत्ता में 1,380 और ताजगंज जोन में 619 आवेदन लंबित हैं।
हरीपर्वत, छत्ता, लोहामंडी और ताजगंज जोन में जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए हजारों आवेदन अटके हुए हैं। सबसे खराब स्थिति लोहामंडी की है। लगातार चेतावनी के बाद भी हालात सुधर नहीं सके। लोहामंडी में 7 दिन में आवेदन वाले 2420 और एक महीने से ज्यादा वाले 2335 आवेदन लंबित हैं। इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। हरीपर्वत में 1,526, छत्ता में 1,380 और ताजगंज जोन में 619 आवेदन लंबित हैं।
ये हैं नियम
1 अक्तूबर से जारी नए नियमों के तहत जन्म-मृत्यु की तारीख से 21 दिन के अंदर पंजीकरण कराना अनिवार्य है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय और मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) के महानिदेशक डॉ. पवन कुमार अरुण के आदेश के तहत 31 दिन से 1 वर्ष तक शहरी क्षेत्र के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी और ग्रामीण क्षेत्र के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी से अनुमोदन कराना होगा। एक से दो साल के बीच एसडीएम से और 2 वर्ष से अधिक समय बीतने पर प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश से पंजीकरण होगा। एसीजेएम-3 को अधिकृत किया गया है। सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने लोगों से कहा है कि जटिल प्रक्रिया से बचने के लिए जन्म या मृत्यु का पंजीकरण 21 दिन के भीतर ही करा लें।
1 अक्तूबर से जारी नए नियमों के तहत जन्म-मृत्यु की तारीख से 21 दिन के अंदर पंजीकरण कराना अनिवार्य है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय और मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) के महानिदेशक डॉ. पवन कुमार अरुण के आदेश के तहत 31 दिन से 1 वर्ष तक शहरी क्षेत्र के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी और ग्रामीण क्षेत्र के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी से अनुमोदन कराना होगा। एक से दो साल के बीच एसडीएम से और 2 वर्ष से अधिक समय बीतने पर प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश से पंजीकरण होगा। एसीजेएम-3 को अधिकृत किया गया है। सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने लोगों से कहा है कि जटिल प्रक्रिया से बचने के लिए जन्म या मृत्यु का पंजीकरण 21 दिन के भीतर ही करा लें।
नगर आयुक्त संतोष कुमार वैश्य ने बताया कि जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को लेकर नगर निगम के चारों जोन की समीक्षा की जा रही है। नए नियमों के कारण फिलहाल कुछ परेशानियां आ रही हैं। लोगों को दलालों के चक्कर में पड़ने के बजाय नगर निगम की हेल्प डेस्क या अधिकृत कर्मचारियों से संपर्क करना चाहिए।
पार्षद संजय राय ने बताया कि प्रक्रिया जटिल होने के कारण जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने में लोगों को परेशानी हो रही है और दलाल सक्रिय हैं। नगर निगम को सभी लंबित आवेदनों का जल्द निस्तारण करना चाहिए। पुरानी वेबसाइट का डाटा उपलब्ध नहीं होने से भी दिक्कतें बढ़ रही हैं।
पार्षद रवि माथुर ने बताया कि ऑनलाइन प्रक्रिया के दावों के बावजूद लोहामंडी में जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए लोगों को महीनों इंतजार करना पड़ रहा है। यहां दलाल सक्रिय हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों को व्यवस्था में सुधार कर प्रमाणपत्र जल्द जारी करने की दिशा में काम करना चाहिए।