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-15°C में 22 हजार फीट से छलांग: लद्दाख में स्वदेशी पैराशूट सिस्टम का किया सफल परीक्षण, ADRDE लैब में हुआ तैयार
Wed, 26 Aug 2026 11:30 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Wed, 26 Aug 2026 11:30 AM IST
सार
आगरा स्थित डीआरडीओ की एडीआरडीई लैब ने लद्दाख के न्योमा मुध ड्रॉप जोन में 22 हजार फीट की ऊंचाई से स्वदेशी सैन्य कॉम्बैट पैराशूट सिस्टम का सफल परीक्षण किया। माइनस 15 डिग्री तापमान में टेस्ट जंपर्स ने छलांग लगाई और पैराशूट 20 हजार फीट पर खुलने के बाद 13,700 फीट पर सुरक्षित लैंडिंग हुई।
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सैन्य कॉम्बैट पैराशूट सिस्टम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की प्रमुख प्रयोगशाला, आगरा स्थित 'एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट' (ADRDE) के वैज्ञानिको द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित 'सैन्य कॉम्बैट पैराशूट सिस्टम' का दुनिया के सबसे ऊंचे ड्रॉप ज़ोन में से एक लद्दाख के (न्योमा, मुध) में सफल परीक्षण किया गया।
इस ऐतिहासिक परीक्षण उड़ान के दौरान एडीआरडीई के टेस्ट जंपर्स चीफ टेस्ट जंपर विंग कमांडर राहुल झा, मास्टर वारंट ऑफिसर आर. जे. सिंह (वायु सेना पदक - वीरता) और मास्टर वारंट ऑफिसर विवेक तिवारी ने -15°C के भीषण तापमान में 22,000 फीट की ऊंचाई से छलांग लगाई।
स्वदेशी तकनीक का सफल प्रदर्शन
पैराशूट को समुद्र तल से 20,000 फीट की ऊंचाई पर सफलतापूर्वक खोला गया, जिसके बाद जांबाज जंपर्स ने 13,700 फीट की ऊंचाई पर सुरक्षित लैंडिंग की। इस परीक्षण में एमसीपीएस के साथ-साथ भारत में बने पैरा-कंप्यूटर, अत्याधुनिक ऑक्सीजन सिस्टम और विशेष जंपसूट सहित सभी उप-प्रणालियों का उपयोग किया गया। यह सफल परीक्षण अत्यधिक उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में एमसीपीएस की प्रभावशीलता, विश्वसनीयता और सामरिक संचालन की क्षमता को साबित करता है। यह उपलब्धि रक्षा प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता की प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है।
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इस ऐतिहासिक परीक्षण उड़ान के दौरान एडीआरडीई के टेस्ट जंपर्स चीफ टेस्ट जंपर विंग कमांडर राहुल झा, मास्टर वारंट ऑफिसर आर. जे. सिंह (वायु सेना पदक - वीरता) और मास्टर वारंट ऑफिसर विवेक तिवारी ने -15°C के भीषण तापमान में 22,000 फीट की ऊंचाई से छलांग लगाई।
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स्वदेशी तकनीक का सफल प्रदर्शन
पैराशूट को समुद्र तल से 20,000 फीट की ऊंचाई पर सफलतापूर्वक खोला गया, जिसके बाद जांबाज जंपर्स ने 13,700 फीट की ऊंचाई पर सुरक्षित लैंडिंग की। इस परीक्षण में एमसीपीएस के साथ-साथ भारत में बने पैरा-कंप्यूटर, अत्याधुनिक ऑक्सीजन सिस्टम और विशेष जंपसूट सहित सभी उप-प्रणालियों का उपयोग किया गया। यह सफल परीक्षण अत्यधिक उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में एमसीपीएस की प्रभावशीलता, विश्वसनीयता और सामरिक संचालन की क्षमता को साबित करता है। यह उपलब्धि रक्षा प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता की प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है।
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