{"_id":"6989ceae6d45daba1a028693","slug":"bulldozers-may-be-used-to-demolish-structures-in-agra-raja-ki-mandi-market-2026-02-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"UP: आगरा के राजा की मंडी बाजार पर चल सकता है बुलडोजर!, दुकानदारों की उड़ी नींद; कल तय होगा मार्केट का भविष्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP: आगरा के राजा की मंडी बाजार पर चल सकता है बुलडोजर!, दुकानदारों की उड़ी नींद; कल तय होगा मार्केट का भविष्य
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: अरुन पाराशर
Updated Mon, 09 Feb 2026 05:40 PM IST
विज्ञापन
सार
आगरा के बड़े व्यापारिक केंद्र राजा की मंडी बाजार पर संकट मंडरा रहा है। बाजार पर बुलडोजर चल सकता है। मंगलवार को प्रशासन की ओर से बाजार की पैमाइश की जाएगी। इसके बाद ही अगली कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा।
राजा की मंडी बाजार।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन
विस्तार
ताजनगरी के सबसे व्यस्त व्यापारिक केंद्र राजा की मंडी में दशकों से जमे लाभ चंद मार्केट के लिए अगले 24 घंटे बेहद निर्णायक होने वाले हैं। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद अब सारा दारोमदार राजस्व रिकॉर्ड के पन्नों पर टिक गया है। यदि मंगलवार को होने वाले सीमांकन में यह पुख्ता हो गया कि मार्केट का हिस्सा सार्वजनिक सड़क पर बना है, तो प्रशासन बिना किसी नोटिस के वहां बुलडोजर चला सकता है।
इस आदेश ने न केवल 60 दुकानदारों की रातों की नींद उड़ा दी है, बल्कि बाजार के पूरे स्वरूप के बदलने का डर भी पैदा कर दिया है। पूर्व जज के पट्टे से लेकर धोखाधड़ी के आरोपों तक की कहानी इस पूरे मामले में सामने आ रही है।
यह बेशकीमती जमीन पूर्व जज स्व. मिलाप चंद जैन को विशेष शर्तों पर पट्टे पर दी गई थी। वर्तमान में उनके वारिस इसका संचालन कर रहे हैं। हालांकि, याचिका में आरोप लगाया गया है कि पट्टे की शर्तों का उल्लंघन और धोखाधड़ी हुई, जिसके कारण पट्टा बहुत पहले ही निरस्त किया जा चुका था। बावजूद इसके, दशकों से यहां काबिज दुकानदारों से हर महीने लाखों रुपये किराया वसूला जा रहा था, जो अब इस पूरे विवाद की जड़ बन गया है।
नीचे दुकानें, ऊपर होटल
दुकानदारों के लिए कारोबार का संकट खड़ा होगा। मार्केट के निचले हिस्से में 60 दुकानें हैं, जहां पीढ़ियों से व्यापार हो रहा है। ऊपरी मंजिल पर संचालित चंद्रलोक और धर्मलोक होटल के अस्तित्व पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है। एक दुकानदार द्वारा किराए के खिलाफ उठाई गई आवाज ने आज इस पूरे मामले को कानूनी घेरे में खड़ा कर दिया है।
कल मंगलवार को 11 बजे बिना नोटिस टीम पैमाइश के लिए जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन को सख्त हिदायत दी है कि 10 फरवरी को सुबह 11 बजे मौके पर ही जमीन की नपाई की जाए। यदि राजस्व दस्तावेजों में यहां सड़क या फुटपाथ दर्ज मिला, तो उसे तत्काल अतिक्रमण मानकर मुक्त कराया जाएगा। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि किसी भी पक्ष की अनुपस्थिति में भी कार्रवाई नहीं रुकेगी। यह प्रशासनिक अमले के लिए 'करो या मरो' जैसी स्थिति है।
कानूनी पेंच, हाईकोर्ट में खिंचेगी तलवारें
भले ही सड़क का मामला कल साफ हो जाए, लेकिन उत्तर प्रदेश नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम, 2021 की धारा 18 की वैधता पर अभी बड़ी जंग बाकी है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने की छूट दी है, जिससे किराए की कानूनी जटिलताओं का नया दौर शुरू होगा। हालांकि, अदालत ने पुनर्वास की एक हल्की उम्मीद छोड़ते हुए कहा है कि प्रभावित पक्ष अपनी गुहार सक्षम प्राधिकारी के सामने लगा सकते हैं।
Trending Videos
इस आदेश ने न केवल 60 दुकानदारों की रातों की नींद उड़ा दी है, बल्कि बाजार के पूरे स्वरूप के बदलने का डर भी पैदा कर दिया है। पूर्व जज के पट्टे से लेकर धोखाधड़ी के आरोपों तक की कहानी इस पूरे मामले में सामने आ रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
यह बेशकीमती जमीन पूर्व जज स्व. मिलाप चंद जैन को विशेष शर्तों पर पट्टे पर दी गई थी। वर्तमान में उनके वारिस इसका संचालन कर रहे हैं। हालांकि, याचिका में आरोप लगाया गया है कि पट्टे की शर्तों का उल्लंघन और धोखाधड़ी हुई, जिसके कारण पट्टा बहुत पहले ही निरस्त किया जा चुका था। बावजूद इसके, दशकों से यहां काबिज दुकानदारों से हर महीने लाखों रुपये किराया वसूला जा रहा था, जो अब इस पूरे विवाद की जड़ बन गया है।
नीचे दुकानें, ऊपर होटल
दुकानदारों के लिए कारोबार का संकट खड़ा होगा। मार्केट के निचले हिस्से में 60 दुकानें हैं, जहां पीढ़ियों से व्यापार हो रहा है। ऊपरी मंजिल पर संचालित चंद्रलोक और धर्मलोक होटल के अस्तित्व पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है। एक दुकानदार द्वारा किराए के खिलाफ उठाई गई आवाज ने आज इस पूरे मामले को कानूनी घेरे में खड़ा कर दिया है।
कल मंगलवार को 11 बजे बिना नोटिस टीम पैमाइश के लिए जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन को सख्त हिदायत दी है कि 10 फरवरी को सुबह 11 बजे मौके पर ही जमीन की नपाई की जाए। यदि राजस्व दस्तावेजों में यहां सड़क या फुटपाथ दर्ज मिला, तो उसे तत्काल अतिक्रमण मानकर मुक्त कराया जाएगा। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि किसी भी पक्ष की अनुपस्थिति में भी कार्रवाई नहीं रुकेगी। यह प्रशासनिक अमले के लिए 'करो या मरो' जैसी स्थिति है।
कानूनी पेंच, हाईकोर्ट में खिंचेगी तलवारें
भले ही सड़क का मामला कल साफ हो जाए, लेकिन उत्तर प्रदेश नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम, 2021 की धारा 18 की वैधता पर अभी बड़ी जंग बाकी है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने की छूट दी है, जिससे किराए की कानूनी जटिलताओं का नया दौर शुरू होगा। हालांकि, अदालत ने पुनर्वास की एक हल्की उम्मीद छोड़ते हुए कहा है कि प्रभावित पक्ष अपनी गुहार सक्षम प्राधिकारी के सामने लगा सकते हैं।