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UP: जिस चंबल में थी कभी डकैतों की दहशत, आज प्रकृति का खूबसूरत आंगन; यहां है दुर्लभ जीव-जंतुओं का बसेरा

अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Fri, 05 Jun 2026 10:07 AM IST
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सार

चंबल नदी की बीहड़ वादियां अब डकैतों की पहचान से निकलकर घड़ियाल, मगरमच्छ, डॉल्फिन और दुर्लभ पक्षियों के सुरक्षित आवास के रूप में उभर रही हैं। संरक्षण प्रयासों के चलते यहां वन्यजीवों की संख्या लगातार बढ़ रही है और यह क्षेत्र जैव विविधता का महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है।

From Dacoit Stronghold to Wildlife Haven: Chambal River Witnesses Remarkable Revival of Biodiversity
चंबल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

न धूल...न धुआं, सुकून देती स्वच्छ हवा में गूंजता दुर्लभ चिड़ियों का मधुर कलरव। रहस्य और रोमांच से भरी बीहड़ की वादियों में कुलांचे मारते काले, चितकबरे हिरन। नदी के साफ पानी में खेलते घड़ियाल, मगरमच्छ, कछुए और गोते लगातीं डॉल्फिन। ये तस्वीरें हैं कभी डकैतों के लिए कुख्यात रहे चंबल के खूबसूरत आंगन की।
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चंबल नदी में रेड लिस्ट में शामिल कछुओं की आठ प्रजातियां साल, ढोर, पचेड़ा, काली ढोर, स्योत्तर, कटहवा, सुंदरी, मोरपंखी संरक्षित हो रही हैं। भले ही दुनिया में घड़ियाल, डॉल्फिन लुप्तप्राय स्थिति में हैं, लेकिन चंबल नदी में 2,938 घड़ियाल, 1,512 मगरमच्छ, 155 डॉल्फिन पर्यटकों को आकर्षित कर रही हैं।
235 प्रजाति के परिंदों में लुप्त होने की कगार पर पहुंची ब्लैक विंग्ड स्टिल्ट, रूडी शेल्डक, इंडियन स्कीमर, रिवर टर्न, ब्लैक बैलीड टर्न जैसे दुर्लभ पक्षी शामिल हैं।
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बीहड़ में काले और चितकबरे हिरन और तेंदुए भी लगातार बढ़ रहे हैं। नंदगवां पर 35 लाख की लागत से इंटर प्रिटेशन सेंटर बनाया गया है। बीहड़ को चीरती हुई नेचुरल ट्रेल बनाई गई है। चंबल सेंक्चुअरी बाह के रेंजर कुलदीप सहाय पंकज ने बताया कि चंबल की खूबसूरत वादियां दुर्लभ जलीय जीव और चिड़ियों को रास आ रही है। राष्ट्रीय चंबल सेंक्चुअरी प्रोजेक्ट की डीएफओ चांदनी सिंह के मुताबिक चंबल में घड़ियाल, मगरमच्छ और कछुओं की संख्या बढ़ रही है। यहां पक्षियों का बसेरा भी बढ़ा है।
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नदी के साफ पानी से धुले डकैतों की बदनामी के दाग
1950 से 1990 तक चंबल की वादियां डकैतों के लिए कुख्यात रही हैं। पहली महिला डकैत पुतलीबाई, लवली पांडेय, सीमा परिहार, कुसमा नाइन, मुन्नी देवी से लेकर मानसिंह, मोहर सिंह, माधौसिंह, मलखान सिंह, रूपे पंडित, जगजीवन परिहार, रज्जन गुर्जर, निर्भय गुर्जर तक की दहशत बीहड़ की वादियों में दफन है। अपने दामन पर डकैतों की बदनामी के दाग को धोने में चंबल नदी की स्वच्छ धारा कामयाब हुई है। अब चंबल नदी घड़ियाल, मगरमच्छ और कछुओं के लिए जानी जाती है।
 
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