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मथुरा लोकसभा सीट पर इस नेता के नाम है जीत का ऐसा रिकॉर्ड, जिसे अब तक कोई नहीं तोड़ पाया

Thu, 23 May 2019 08:32 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा Published by: मुकेश कुमार Updated Thu, 23 May 2019 08:32 AM IST
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Lok Sabha Chunav 2019 Result Mathura seat Atal Bihari Vajpayee Maniram Bangari
मनीराम बागड़ी - फोटो : विकीपीडिया
यूपी की चर्चित लोकसभा सीटों में शुमार मथुरा के चुनाव नतीजे पर सबकी नजरें टिकी हैं। इस सीट पर लोकसभा चुनाव का इतिहास बेहद ही रोचक है। यहां के मतदाताओं ने किसी प्रत्याशी को सिर आंखों पर बैठाया तो कभी दिग्गज नेता तक की जमानत जब्त करा दी थी। 
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पहले और दूसरे लोकसभा चुनाव में यहां से निर्दलीय प्रत्याशी ने जीत दर्ज की थी। 1962 से 1977 तक लगातार तीन बार यह सीट कांग्रेस पार्टी के कब्जे में रही। 1977 में कांग्रेस के खिलाफ चली आंधी में कांग्रेस को इस सीट से हाथ धोना पड़ा। तब भारतीय लोकदल ने जीत दर्ज की थी। 
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1977 में मथुरा लोकसभा सीट पर मिली भारतीय लोकदल की यह जीत एक कीर्तिमान बन गई। समाजवादी विचारधारा के नेता मनीराम बागड़ी के नाम यह कीर्तिमान है, जिसे तोड़ तो दूर आज तक इसके आसपास भी कोई नहीं पहुंच पाया। बागड़ी हरियाणा के हिसार के रहने वाले थे। 
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76.79 प्रतिशत वोट पाकर दर्ज की थी जीत

इस लोकसभा चुनाव में मथुरा सीट पर 3 लाख 92 हजार 137 मतों पड़े थे, जिसमें से रिकॉर्ड 76.79 प्रतिशत (2 लाख 96 हजार 518) मत प्राप्त कर मनीराम बागड़ी ने ऐसा कीर्तिमान रचा, जो 42 वर्षों से कायम है। इस सीट पर इतना वोट प्रतिशत किसी को नहीं मिला। 

बाहरी प्रत्याशी को रिकॉर्ड मतों से जिताने वाली मथुरा की जनता ने 1957 के लोकसभा चुनाव में दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जमानत तक जब्त करा दी थी। तब वाजपेयी को महज 10 फीसदी मत मिले थे। उस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी राजा महेंद्र प्रताप जीते थे। 

वहीं 1980 में इस सीट जनता दल ने जीत दर्ज की। सात साल बाद 1984 में कांग्रेस ने इस सीट पर अपनी जोरदार वापसी की थी। 1989 में चुनाव में एक बार फिर यहां से जनता दल को जीत मिली। इसके बाद लगातार चार बार भाजपा ने इस सीट पर अपना परचम लहराया।

भाजपा के तेजवीर ने लगाई थी हैट्रिक

वर्ष 1991, 1996, 1998 और 1999 लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की। इसमें भाजपा के चौधरी तेजवीर सिंह ने जीत की हैट्रिक लगाई थी। 2004 में कांग्रेस के मानवेंद्र सिंह ने यहां से वापसी की, लेकिन 2009 के चुनाव में उन्हें रालोद के जयंत चौधरी ने हराया। 

लोकसभा चुनाव 2014 में मोदी लहर में अभिनेत्री हेमा मालिनी ने 50 फीसदी से अधिक वोट से जीत दर्ज की। इस बार भी भाजपा ने हेमा मालिनी पर भरोसा जताया। इनको टक्कर देने के लिए कांग्रेस ने महेश पाठक, गठबंधन ने रालोद के कुंवर नरेंद्र सिंह को उतारा। चुनाव में इन तीनों के बीच टक्कर मारी जा रही है। कौन जीतेगा, यह 23 मई को पता चलेगा। 
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