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UP: 'संघ पर खड़े हो रहे सवालों का भावनात्मकता से नहीं, बौद्धिकता से दें जवाब'; जगदगुरु शंकराचार्य का आह्वान
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: अरुन पाराशर
Updated Thu, 15 Jan 2026 06:02 PM IST
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सार
उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ब्रज प्रांत कार्यालय माधव भवन का बृहस्पतिवार को लोकार्पण किया गया। इस दौरान शारदा पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि ज्ञानवान कार्यकर्ता ही विधर्मियों को करारा उत्तर दे सकते हैं क्योंकि चिंतन केवल सनातन के पास है।
आगरा में माधव भवन का लोकार्पण।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
संघ पर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठने वाले प्रश्नचिह्नों का भावनात्मक नहीं बल्कि बौद्धिक स्तर से उत्तर दिया जाना चाहिए। इस काम को करने के लिए माधव भवन को हवा महल जैसा हवा खाने का केंद्र नहीं बल्कि ऐसा केंद्र बनना चाहिए जहां अध्ययनशील कार्यकर्ता समाज को प्रभावी बौद्धिक उत्तर दे सकें। यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ब्रज प्रांत कार्यालय माधव भवन के बृहस्पतिवार को हुए लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान शारदा पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कही। उन्होंने कहा कि ज्ञानवान कार्यकर्ता ही विधर्मियों को करारा उत्तर दे सकते हैं क्योंकि चिंतन केवल सनातन के पास है। दूसरे धर्म तो अनावश्यक विमर्श खड़ा करने में माहिर हैं।
इस अवसर पर संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि किसी भी संस्था या समाज को युग के अनुरूप आगे बढ़ना होता है। पुराना माधव भवन 1977 में शुरू हुआ तो उस समय देश भर में संघ की केवल 8 हजार शाखाएं थीं। अब 90 हजार से ज्यादा शाखाएं हैं, ज्यादा कार्य और दायित्व हैं, उसकी वजह से कार्यकर्ताओं की संख्या और कार्य बढ़े हैं। संघ की गुणवत्ता और प्रमाणिकता को आगे बढ़ने के लिए एक बड़े भवन और बड़ी योजना की आवश्यकता थी। उसी की पूर्ति के लिए पुराने माधव भवन का पुनर्निर्माण किया गया है।
डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि अपनी बुद्धि-चातुर्य और रणनीतिक कार्यशैली से छत्रपति शिवाजी ने आगरा से औरंगजेब की कैद से मुक्त होकर हिन्दू समाज के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ा था। उस घटना को पूरा विश्व आश्चर्य से देखता है और उनके लिए एक यह शोध का विषय है लेकिन हम उसे एक भव्य के स्मारक के रूप में आगे नहीं बढ़ा पा रहे। उन्होंने फव्वारा चौराहे स्थित कोतवाली पर हुए गोकुलाजाट के बलिदान का भी स्मरण कराया और फतेहपुर सीकरी में राणा सांगा के क्रूर मुगल बादशाह के साथ हुए युद्ध में हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए दी गयी प्राणों की आहुति का स्मरण कराया।
कहा कि आगरा के लोग इस गौरवशाली इतिहास को भूलते जा रहे हैं। आगरा के निकट वृन्दावन, गोकुल, गोवर्धन के भक्ति आंदोलन के जरिये वहां के साधु-संतों और सनातनियों ने जो बलिदान दिया है, उसे भी हम लोग समाज के समक्ष प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि माधव भवन में ऐसी शोध की व्यवस्था होगी जो उस काल खण्ड के दस्तावेजों को सुरक्षित करे। साथ ही वर्तमान समाज के सामने बलिदान और गौरवशाली इतिहास को बाहर निकालने का काम करे।
सुझाव दिया कि शिवाजी महाराज, गोकुलाजाट एवं राणा सांगा के बलिदान स्थल पर उनके स्मारक और म्यूजियम निर्माण का कार्य करना चाहिए जिससे बाहर से आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों को ताजमहल के साथ-साथ हमारे गौरवशाली इतिहास जानने का भी अवसर प्राप्त हो सके। इस अवसर पर अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख रामलाल, अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. दिनेश, अखिल भारतीय गौ संयोजक अजीत महापात्रा, अखिल भारतीय शारीरिक प्रमुख जगदीश प्रसाद के अलावा राकेश जैन, दिनेश उपाध्याय, कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रशांत गुप्ता, परिचय केशव शर्मा व धन्यवाद ज्ञापन विजय गोयल ने किया।
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इस अवसर पर संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि किसी भी संस्था या समाज को युग के अनुरूप आगे बढ़ना होता है। पुराना माधव भवन 1977 में शुरू हुआ तो उस समय देश भर में संघ की केवल 8 हजार शाखाएं थीं। अब 90 हजार से ज्यादा शाखाएं हैं, ज्यादा कार्य और दायित्व हैं, उसकी वजह से कार्यकर्ताओं की संख्या और कार्य बढ़े हैं। संघ की गुणवत्ता और प्रमाणिकता को आगे बढ़ने के लिए एक बड़े भवन और बड़ी योजना की आवश्यकता थी। उसी की पूर्ति के लिए पुराने माधव भवन का पुनर्निर्माण किया गया है।
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डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि अपनी बुद्धि-चातुर्य और रणनीतिक कार्यशैली से छत्रपति शिवाजी ने आगरा से औरंगजेब की कैद से मुक्त होकर हिन्दू समाज के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ा था। उस घटना को पूरा विश्व आश्चर्य से देखता है और उनके लिए एक यह शोध का विषय है लेकिन हम उसे एक भव्य के स्मारक के रूप में आगे नहीं बढ़ा पा रहे। उन्होंने फव्वारा चौराहे स्थित कोतवाली पर हुए गोकुलाजाट के बलिदान का भी स्मरण कराया और फतेहपुर सीकरी में राणा सांगा के क्रूर मुगल बादशाह के साथ हुए युद्ध में हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए दी गयी प्राणों की आहुति का स्मरण कराया।
कहा कि आगरा के लोग इस गौरवशाली इतिहास को भूलते जा रहे हैं। आगरा के निकट वृन्दावन, गोकुल, गोवर्धन के भक्ति आंदोलन के जरिये वहां के साधु-संतों और सनातनियों ने जो बलिदान दिया है, उसे भी हम लोग समाज के समक्ष प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि माधव भवन में ऐसी शोध की व्यवस्था होगी जो उस काल खण्ड के दस्तावेजों को सुरक्षित करे। साथ ही वर्तमान समाज के सामने बलिदान और गौरवशाली इतिहास को बाहर निकालने का काम करे।
सुझाव दिया कि शिवाजी महाराज, गोकुलाजाट एवं राणा सांगा के बलिदान स्थल पर उनके स्मारक और म्यूजियम निर्माण का कार्य करना चाहिए जिससे बाहर से आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों को ताजमहल के साथ-साथ हमारे गौरवशाली इतिहास जानने का भी अवसर प्राप्त हो सके। इस अवसर पर अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख रामलाल, अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. दिनेश, अखिल भारतीय गौ संयोजक अजीत महापात्रा, अखिल भारतीय शारीरिक प्रमुख जगदीश प्रसाद के अलावा राकेश जैन, दिनेश उपाध्याय, कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रशांत गुप्ता, परिचय केशव शर्मा व धन्यवाद ज्ञापन विजय गोयल ने किया।
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