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UP: आगरा में तैयार किए गए ऐसे जूते...हाई ब्लड प्रेशर को करेंगे कंट्रोल, मधुमेह मरीजों के लिए वरदान से कम नहीं

अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: आगरा ब्यूरो Updated Mon, 19 Jan 2026 10:31 AM IST
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सार

आगरा में ऐसे जूते तैयार किए गए हैं, जो पैरों को जख्मी नहीं होने देंगे। इसके साथ ही उच्च रक्तचाप नियंत्रित करने में भी सहयोगी होंगे। इन जूतों को पहनने की सलाह चिकित्सक भी दे रहे हैं। 

Shoes become armor...feet will not get injured, blood pressure will also remain under control
बनाए गए जूते।
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विस्तार
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आगरा में करीब 15 फीसदी लोग मधुमेह-उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं। मधुमेह मरीज के जख्म को ठीक होने में लंबा वक्त लगता है। गैंग्रीन बनने पर कई के पैर, अंगुली, पंजा काटने पड़ते हैं। ऐसे मरीजों के लिए एडवांस तकनीक से जूते-चप्पल बन रहे हैं। ये पैरों के लिए कवच की तरह काम करते हैं, जो जख्म से बचाव करते हुए उच्च रक्तचाप नियंत्रित करने में भी सहयोगी हैं। डॉक्टर भी मरीजों को ऐसे जूतों के उपयोग की सलाह दे रहे हैं।
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द आगरा शू फैक्टर्स फेडरेशन के अध्यक्ष विजय सामा ने बताया कि मधुमेह-उच्च रक्तचाप के मरीजों के लिए फोर लेयर में जूते बनाए जाते हैं। इसमें विशेष अपर उपयोग होता है, जिसमें एयर बैग और सीढ़ीनुमा डिजाइन होती है। चलने पर पैरों की मसाज होती है, जो रक्तचाप नियंत्रित करने और इंसुलिन बनाने में सहयोगी है। देश के साथ विदेश में भी ऐसे जूतों की मांग अधिक है।
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जूता उद्यमी आशीष जैन ने बताया कि गठिया के बाद डायबिटिक-हाइपरटेंशन रेंज के जूतों की मांग बढ़ी है। जर्मन की पांच जोन तकनीक पर एड़ी, तलवा, पंजा, अंगुली, अंगूठे पर एयरबैग होते हैं। इससे मांसपेशियों के व्यायाम से तंत्रिका तंत्र और रक्तसंचार तेजी से होता है। ऑक्सीजन का स्तर भी बढ़ता है। ये बेहद हल्के और चौड़े पंजे के हैं। अंगुलियों में घाव होने और बाहरी हल्की चोटों से भी बचाव करते हैं।

पैर सुन्न होने से जख्म का नहीं चलता पता
आगरा डायबिटिक फोरम के सचिव डॉ. सुनील बंसल ने बताया कि जिले में करीब 15 फीसदी लोग मधुमेह-उच्च रक्तचाप के मरीज हैं। मधुमेह मरीजों के पैर सुन्न होने से उन्हें चोट लगने या घाव बनने का शुरुआत में पता नहीं चलता है। सामान्य जख्म ठीक होने में डेढ़ से दो महीने का समय लगता है। मधुमेह अनियंत्रित होने पर गैंग्रीन का खतरा रहता है। ऐसे मरीजों के लिए विशेष प्रकार के जूते फायदेमंद साबित होते हैं।

 

दुर्घटना के बाद मधुमेह मरीजों के काटने पड़ते हैं अंग
आगरा सर्जंस एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सुनील शर्मा ने बताया कि दुर्घटना के बाद मधुमेह मरीजों के पैर, पंजा और अंगुलियां काटनी पड़ती हैं। इसमें कई युवा हैं। जख्म लंबे समय तक ठीक नहीं होने के चलते गैंग्रीन बन जाता है। इससे जख्म हड्डी तक पहुंच कर संक्रमण बढ़ाता है। संक्रमण को आगे बढ़ने से रोकने के लिए अंगों को काटने की नौबत आ जाती है।

 

मधुमेह मरीज इन बातों का रखें ध्यान:
- रोजाना पैरों को गुनगुने पानी से धोएं, तौलिया से पोंछकर गुणवत्ता वाली क्रीम लगाएं।
- सूती और मुलायम मोजे पहनें, दो दिन में मोजे धोएं। आकार से एक नंबर बड़ा जूता पहनें।
- रोजाना पैरों को विशेष शीशे की मदद से जांचें, जख्म, कट और घाव मिलने पर डॉक्टर को दिखाएं।
- आगे से चौड़े पंजे वाले जूतों का उपयोग करें। पहनने से पहले कील, कांटा, गिट्टी की जांच कर लें।
- नाखूनों को त्वचा से थोड़ी दूरी से काटें, सब्जी-फल समेत अन्य काटने से बचें। ग्लव्स का उपयोग करें।

 

बीमारी से बचने के लिए ये करें:
- 25 की उम्र के बाद हर तीन साल में एक बार और 40 के बाद हर साल मधुमेह की जांच कराएं।
- रोजाना 10 हजार कदम तेज गति से चलें। हरी सब्जी, फल और पौष्टिक भोजन लें।
- धूम्रपान, शराब, फास्ट फूड से बचें। घर के बने भोजन से ही पेट भरें। वजन नियंत्रित रखें।

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