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Silver Rate: चांदी 3.30 लाख रुपये किलो...रिकॉर्ड तेजी ने तोड़ी सराफा कारोबार की कमर, व्यापारियों के छूटे पसीने
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Thu, 22 Jan 2026 09:23 AM IST
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सार
चांदी की कीमतों में आई अप्रत्याशित वृद्धि के बाद 200 से 300 करोड़ की उधारी का समझौता 50 से 100 करोड़ रुपये में हो रहा है। इस वजह से कारोबारियों के पसीने छूटे हुए हैं।
चांदी (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : Adobestock
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विस्तार
चांदी की कीमतों में आई अप्रत्याशित आंधी ने पायल कारोबार की कमर तोड़ दी है। कभी निवेश के लिए सुरक्षित मानी जाने वाली चांदी अब सराफा कारोबारियों के लिए गले की फांस बन गई है। उधारी के एक रुपये का समझौता चवन्नी में हो रहा है। रिकाॅर्ड तेजी से कारोबारियों के करोड़ों रुपये डूब गए हैं।
बुधवार को चांदी फिर ऑल टाइम हाई हो गई। भाव 3.30 लाख रुपये प्रति किलो पहुंच गया। इससे किनारी बाजार, चौबे जी का फाटक, एमजी रोड स्थित प्रमुख सराफा और कमला नगर, सदर बाजार से लेकर कारगिल चौराहा तक बाजार के समीकरण बिगड़ गए हैं। आलम यह है कि जिस चांदी की चमक से सराफा कारोबार रोशन था, आज उसकी बढ़ी कीमतों ने रुपया की उधारी को चवन्नी में बदल दिया है।
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बुधवार को चांदी फिर ऑल टाइम हाई हो गई। भाव 3.30 लाख रुपये प्रति किलो पहुंच गया। इससे किनारी बाजार, चौबे जी का फाटक, एमजी रोड स्थित प्रमुख सराफा और कमला नगर, सदर बाजार से लेकर कारगिल चौराहा तक बाजार के समीकरण बिगड़ गए हैं। आलम यह है कि जिस चांदी की चमक से सराफा कारोबार रोशन था, आज उसकी बढ़ी कीमतों ने रुपया की उधारी को चवन्नी में बदल दिया है।
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भाव की सबसे बड़ी मार कच्चे सौदों पर पड़ रही है। बिना भाव तय किए नकदी देकर माल उठाने वाले तेजी में उधारी नहीं चुका पा रहे। जब चांदी 1.25 से 1.75 लाख प्रति किलो थी, तब व्यापारियों ने करोड़ों का माल उधारी पर उठाया था। अब भाव तीन गुना से ज्यादा बढ़ने के कारण भुगतान का संकट खड़ा हो गया है। 200 से 300 करोड़ रुपये के लेनदेन अब महज 50 से 100 करोड़ रुपये में सेटलमेंट पर सिमट रहे हैं। कारोबारी पुराने रेट पर भुगतान करने की स्थिति में नहीं हैं और नए रेट पर माल खरीदना नामुमकिन सा हो गया है। कोई भी सराफा कारोबारी उधारी पर कुछ भी कहने से बच रहा है।
संकट में आगरा का पायल उद्योग
आगरा को चांदी की मंडी भी कहा जाता है। यह चांदी की पायलों का सबसे बड़ा निर्माण केंद्र है। हर माह औसतन 50 टन चांदी की खपत होती थी। किनारी बाजार, चौबे जी फाटक और एमजी रोड जैसे प्रमुख सराफा बाजारों से एक माह से ग्राहक नदारद हैं। ऊंचे भावों के कारण मध्यमवर्गीय परिवारों ने चांदी से दूरी बना रखी है, जिसका सीधा असर पायलों के व्यापार पर पड़ा है।
आगरा को चांदी की मंडी भी कहा जाता है। यह चांदी की पायलों का सबसे बड़ा निर्माण केंद्र है। हर माह औसतन 50 टन चांदी की खपत होती थी। किनारी बाजार, चौबे जी फाटक और एमजी रोड जैसे प्रमुख सराफा बाजारों से एक माह से ग्राहक नदारद हैं। ऊंचे भावों के कारण मध्यमवर्गीय परिवारों ने चांदी से दूरी बना रखी है, जिसका सीधा असर पायलों के व्यापार पर पड़ा है।
उधारी में तलाश रहे बीच का रास्ता
हाल ही में लखनऊ में एक बड़े कारोबारी ने आत्महत्या कर ली। मथुरा में एक सराफ का 800 किलो माल लेकर युवक लापता है। ऐसे में सराफा कारोबारी सहम गए हैं। इन घटनाओं के बाद अब कारोबारी उधारी वसूलने के बजाय बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं। आपसी बातचीत और सुलह समझौतों के जरिये नुकसान को बांटने की रणनीति अपनाई जा रही है। ताकि बाजार को पूरी तरह डूबने से बचाया जा सके।
हाल ही में लखनऊ में एक बड़े कारोबारी ने आत्महत्या कर ली। मथुरा में एक सराफ का 800 किलो माल लेकर युवक लापता है। ऐसे में सराफा कारोबारी सहम गए हैं। इन घटनाओं के बाद अब कारोबारी उधारी वसूलने के बजाय बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं। आपसी बातचीत और सुलह समझौतों के जरिये नुकसान को बांटने की रणनीति अपनाई जा रही है। ताकि बाजार को पूरी तरह डूबने से बचाया जा सके।
