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खतरे में ताजमहल!: स्मारक पर हो रहा सल्फर का हमला, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: आगरा ब्यूरो
Updated Tue, 02 Jun 2026 04:14 PM IST
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सार
ताजमहल को बचाने के लिए बने ताज ट्रेपेजियम जोन में प्रदूषण का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ गया है, जिससे स्मारक पर ‘सल्फर अटैक’ का खतरा गहराता जा रहा है। मथुरा-फिरोजाबाद के उद्योगों और वाहनों से निकलने वाला जहरीला धुआं तय मानकों से ऊपर पहुंचकर पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर चेतावनी बन गया है।
ताजमहल
- फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
ताजमहल के संरक्षण के लिए बने ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) में प्रदूषण नियंत्रण के दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। ताजमहल पर सल्फर का हमला हो रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट ने यह चौंकाने वाला खुलासा किया है। मथुरा और फिरोजाबाद की हवा में सल्फर डाइऑक्साइड (एसओ 2) और भरतपुर में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (एनओ 2) का स्तर निर्धारित वार्षिक मानकों को पार कर गया है।
टीटीजेड चेयरमैन एवं मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा भेजी रिपोर्ट में मथुरा रिफाइनरी और कांच उद्योगों को इस जहरीली हवा का प्रमुख स्रोत माना गया है। रिपोर्ट से स्थिति की भयावहता फिर उजागर हो गई है। फरवरी से मई 2025 तक के मॉनिटरिंग डेटा के अनुसार, सल्फर का निर्धारित वार्षिक मानक 20.0 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर है। इसके उलट, मथुरा में यह फरवरी के 19.7 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से खतरनाक उछाल लेते हुए मई में 25.06 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर पर पहुंच गया।
सबसे चिंताजनक स्थिति फिरोजाबाद की रही, जहां मार्च 2025 में सल्फर का स्तर 32.8 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया। वहीं, भरतपुर फरवरी 2025 में नाइट्रोजन गैस का स्तर भी अपने मानक (30.0 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर) को तोड़कर 32.2 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर पर जा पहुंचा। प्रदूषण नियंत्रण में सबसे बड़ी खामी औद्योगिक उत्सर्जन पर लगाम न होना मानी जा रही है। रिपोर्ट में इस वृद्धि के लिए मथुरा रिफाइनरी, फिरोजाबाद का ग्लास उद्योग और व्यावसायिक गतिविधियों में प्रयुक्त होने वाले डीजल जनरेटर (डीजी सेट) जिम्मेदार हैं।
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हाईवे पर बढ़ते भारी और बाहरी डीजल वाहनों ने एनओ 2 का ग्राफ बढ़ा दिया है। साथ ही, मार्च से मई के बीच उच्च तापमान और कम आर्द्रता के चलते प्रदूषकों का वातावरण में न फैल पाना भी एक बड़ी वजह बना। मंडलायुक्त ने इस संबंध में विभागों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं। यूपीपीसीबी आगरा के क्षेत्रीय अधिकारी अमित मिश्रा को सख्त निर्देश हैं कि हर महीने की 10 तारीख तक वायु गुणवत्ता के आंकड़े अनिवार्य रूप से प्रस्तुत किए जाएं। मानक से अधिक प्रदूषण मिलने पर संबंधित अधिकारियों से सीधे स्पष्टीकरण तलब किया जाए।
टीटीजेड चेयरमैन एवं मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा भेजी रिपोर्ट में मथुरा रिफाइनरी और कांच उद्योगों को इस जहरीली हवा का प्रमुख स्रोत माना गया है। रिपोर्ट से स्थिति की भयावहता फिर उजागर हो गई है। फरवरी से मई 2025 तक के मॉनिटरिंग डेटा के अनुसार, सल्फर का निर्धारित वार्षिक मानक 20.0 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर है। इसके उलट, मथुरा में यह फरवरी के 19.7 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से खतरनाक उछाल लेते हुए मई में 25.06 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर पर पहुंच गया।
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सबसे चिंताजनक स्थिति फिरोजाबाद की रही, जहां मार्च 2025 में सल्फर का स्तर 32.8 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया। वहीं, भरतपुर फरवरी 2025 में नाइट्रोजन गैस का स्तर भी अपने मानक (30.0 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर) को तोड़कर 32.2 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर पर जा पहुंचा। प्रदूषण नियंत्रण में सबसे बड़ी खामी औद्योगिक उत्सर्जन पर लगाम न होना मानी जा रही है। रिपोर्ट में इस वृद्धि के लिए मथुरा रिफाइनरी, फिरोजाबाद का ग्लास उद्योग और व्यावसायिक गतिविधियों में प्रयुक्त होने वाले डीजल जनरेटर (डीजी सेट) जिम्मेदार हैं।
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