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UP: रिश्वत में सियोल की सैर और नकदी, तत्कालीन जीएम ने उल्लंघन कर बदलीं टेंडर की शर्तें; चहेती फर्म बनाई पात्र

Thu, 09 Jul 2026 02:07 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, फिरोजाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, फिरोजाबाद Published by: Sharukh Khan Updated Thu, 09 Jul 2026 02:07 PM IST
सार

रक्षा मंत्रालय के अधीन फिरोजाबाद के हजरतपुर स्थित आयुध उपस्कर निर्माणी (ओईएफएच) में भ्रष्टाचार का एक सनसनीखेज मामला सीबीआई जांच में खुला है। सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा गाजियाबाद ने कारखाने के तत्कालीन मुख्य महाप्रबंधक (सीजीएम) अमित सिंह, कनिष्ठ कार्य प्रबंधकों (जेडब्ल्यूएम) और कई ठेकेदारों व छद्म (डमी) कंपनियों के खिलाफ भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश की 4 अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की हैं।

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UP Defence Factory Corruption Amit Singh then GM altered civil tender conditions in violation of guidelines
firozabad tender scam - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

सीबीआई ने 5.67 करोड़ रुपये के टेंडर घोटाले में दर्ज की गई प्राथमिकी में कई राज खोले हैं। आरोप है कि वर्ष 2022 से 2025 के बीच आरोपियों ने नियमों को ताक पर रखा और एक चहेती छद्म (डमी) फर्म मैसर्स एमएसएम एंटरप्राइजेज को करीब 5.67 करोड़ रुपये के टेंडर आवंटित कर दिए।
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सीबीआई के उप महानिरीक्षक (डीआईजी) जे. एलंचेझियन के आदेश पर मामला दर्ज कर जांच निरीक्षक भूपेश कुमार कर रहे हैं। सीबीआई की जांच में खुलासा हुआ है कि मैसर्स एमएसएम एंटरप्राइजेज फर्म, फिरोजाबाद के उसायनी की है। 
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कागजों पर इसके प्रोप्राइटर संतोष कुमार थे, लेकिन जांच में सामने आया कि इसका असली नियंत्रण और लाभ आयुध कारखाने के ही अधिकारियों के पास था। वित्तीय वर्ष 2023-24 में तत्कालीन सीजीएम अमित सिंह ने सीवीसी गाइडलाइंस का उल्लंघन कर सिविल टेंडर की शर्तें बदल दीं, ताकि चहेती फर्म को पात्र बनाया जा सके। 
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काम मिलने के बाद पकड़े जाने के डर से शर्तों को फिर पुराना जैसा कर दिया गया। फर्म के पास कोई वैध अनुभव नहीं था और इसके लिए फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र लगाए गए थे। फर्म ने जब जेम पोर्टल पर पैराशूट निर्माण सहायता के लिए बोली लगाई, तो उसके लिए कारखाने के भीतर के ही सरकारी कंप्यूटर और इंटरनेट का इस्तेमाल किया गया। 

 

सीबीआई के उप पुलिस अधीक्षक सुरेश पाल की शिकायत के अनुसार, इस धांधली के बदले भारी रिश्वत पहुंचाई गई। दीपेश गुप्ता (जेडब्ल्यूएम) को कपिल कुमार पांडेय के माध्यम से 37 लाख रुपये और मैसर्स गौरी ट्रेडर्स के जरिए 1.44 लाख रुपये मिले। मनोज कुमार को कपिल कुमार पांडेय से 15.17 लाख रुपये और मैसर्स एमएसएम एंटरप्राइजेज से 6.24 लाख रुपये मिले। 

 

आरोपी मनोज कुमार ने ही रिश्वत के एवज में तत्कालीन सीजीएम अमित सिंह और उनकी पत्नी नीलम सिंह के लिए दक्षिण कोरिया के सियोल शहर की हवाई यात्रा के टिकट बुक कराए थे। इस प्रकरण में अमित सिंह (मुख्य साजिशकर्ता): तत्कालीन जीएम/सीजीएम, दीपेश गुप्ता (तत्कालीन जेडब्ल्यूएम), मनोज कुमार (कनिष्ठ कार्य प्रबंधक), संतोष कुमार (ठेकेदार/संचालक) मैसर्स एमएसएम एंटरप्राइजेज, कपिल कुमार पांडेय (मुख्य सूत्रधार) आरोपी के रूप में दर्ज किए गए हैं।

प्राथमिकी-02
फर्जी कोटेशन के आधार पर करीब एक करोड़ रुपये के 29 टेंडर हासिल किए

सीबीआई ने हजरतपुर स्थित ओईएफएच में स्थानीय खरीद समिति (एलपीसी) के माध्यम से हुए भ्रष्टाचार को भी पकड़ा है। इसमें आरोप है कि फर्जी कोटेशन के आधार पर करीब 1 करोड़ रुपये के 29 टेंडर हासिल किए गए। इस मामले की जांच निरीक्षक मनीष रस्तोगी को सौंपी गई है। 

सीबीआई के उप-निरीक्षक नवीन कुमार द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के अनुसार, नवंबर 2022 से 2025 के बीच स्थानीय खरीद समिति के जरिए टेंडर आवंटन में भारी हेराफेरी की गई। जांच में सामने आया कि टेंडर पाने वाली दोनों फर्मों मैसर्स आयुष एंटरप्राइजेज और मैसर्स अर्बन वॉल का वास्तविक नियंत्रण आरोपी अजीत गौतम के हाथ में था।

 

इनमें से मैसर्स आयुष एंटरप्राइजेज अजीत गौतम के बेटे आयुष गौतम की प्रोप्राइटरशिप फर्म थी, जबकि मैसर्स अर्बन वॉल उनकी पत्नी भावना गौतम के नाम पर पंजीकृत थी। तत्कालीन सीजीएम अमित सिंह के निर्देश पर इन दोनों फर्मों को टेंडर दिलाने के लिए फर्जी और मनगढ़ंत कोटेशन तैयार किए गए। 

 

अमित सिंह ने कनिष्ठ कार्य प्रबंधक दीपेश गुप्ता को बार-बार स्थानीय खरीद समिति (एलपीसी) का सदस्य मनोनीत किया, ताकि टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित किया जा सके। इस प्रशासनिक संरक्षण के बदले जेडब्ल्यूएम दीपेश गुप्ता ने 7 अक्टूबर 2022 से 20 जुलाई 2024 के बीच ठेकेदार अजीत गौतम और उनकी पत्नी भावना गौतम से 3.77 लाख रुपये की रिश्वत प्राप्त की। 

 

इस अवैध रकम के एवज में दीपेश गुप्ता ने बिना उचित मिलान और नियमों की अनदेखी करते हुए मैसर्स अर्बन वॉल के 7 सप्लाई ऑर्डरों के लिए कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र जारी कर दिए। इस प्रकरण में दीपेश गुप्ता, अजीत गौतम (निजी ठेकेदार/संचालक) निवासी नीरव निकुंज, फेज-II, केके नगर रोड, सिकंदरा, आगरा के अलावा कारखाने के कुछ अन्य अज्ञात लोक सेवकों और निजी व्यक्तियों को भी सह-आरोपी बनाया गया है, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है।

प्राथमिकी-03
सुरक्षा क्षेत्र में अवैध निर्माण की एवज में राजकुमार मित्तल ने दी 30 लाख की रिश्वत

फिरोजाबाद। सीबीआई ने हजरतपुर स्थितओईएफएच की सुरक्षा दीवार के पास हुए एक गंभीर भ्रष्टाचार मामले में भी प्राथमिकी दर्ज की है। इसमें शहर के प्रमुख उद्यमी राजकुमार मित्तल को आरोपी बनाया गया है। इस प्राथमिकी की जांच निरीक्षक संतोष कुमार को सौंपी गई है

 

सीबीआई के निरीक्षक भूपेश कुमार द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी में आरोप है कि रक्षा नियमों (वर्क्स ऑफ डिफेंस एक्ट, 1903) के तहत प्रभावी सुरक्षा और निगरानी के लिहाज से कारखाने की बाहरी बाउंड्री के चारों तरफ 30 फीट की चौड़ाई तक का क्षेत्र पूरी तरह निर्माण-मुक्त होना अनिवार्य है। एक निजी बिल्डर एवं उद्यमी राजकुमार मित्तल ने कारखाने की बाहरी दीवार से महज 20 फीट की दूरी पर करीब 18 फीट ऊंची और 289 मीटर लंबी अवैध कंक्रीट की दीवार खड़ी कर ली, जिसमें आरएमसी पिलर का इस्तेमाल किया गया था। 

कारखाने के अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा इस अवैध निर्माण की जानकारी लगातार तत्कालीन सीजीएम अमित सिंह को दी जा रही थी। इसके बावजूद उन्होंने बिल्डर को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से निर्माण कार्य रोकने के लिए कोई प्रशासनिक कदम नहीं उठाया। सीबीआई की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस अवैध निर्माण को बिना किसी बाधा के जारी रखने के एवज में राजकुमार मित्तल ने तत्कालीन सीजीएम अमित सिंह को कुल 30 लाख रुपये की रिश्वत दी थी। इस पूरी रकम को जुलाई 2024 से फरवरी 2025 के बीच सीजीएम के इशारे पर कारखाने के ही टेलर रघुनंदन शर्मा ने बिल्डर से अलग-अलग किश्तों में वसूला और आगे पहुंचाया। 

इतना ही नहीं, एक अन्य स्थानीय भूखंड स्वामी राहुल यादव ने भी जब अपनी जमीन पर दीवार बनानी चाही, तो आरोपी टेलर रघुनंदन शर्मा ने उससे भी 1.50 लाख से 2 लाख रुपये की रिश्वत मांगी और कहा कि इस रकम का एक हिस्सा सीजीएम के पीए को जाना है। संयुक्त औचक निरीक्षण की भनक लगते ही बाद में राजकुमार मित्तल ने इस अवैध दीवार के कुछ हिस्से को खुद ही ढहा दिया था। इस प्रकरण में तत्कालीन सीजीएम अमित सिंह, रघुनंदन शर्मा (टेलर), राजकुमार मित्तल को आरोपी बनाया गया है। इनके अलावा कुछ अन्य अज्ञात लोक सेवकों और निजी व्यक्तियों को भी जांच के दायरे में रखा गया।

प्राथमिकी- 04
कागजी हेरफेर और रिश्वत के दम पर 7 करोड़ रुपये मूल्य के 18 टेंडर
- आयुध कारखाने के पूर्व सीजीएम और दिल्ली के दो कारोबारियों पर सीबीआई का केस

सीबीआई ने ओईएफएच में सात करोड़ रुपये के एक और वित्तीय घोटाले का भी भंडाफोड़ किया है। इस मामले की विवेचना निरीक्षक ऋषभ राज को सौंपी गई है।
सीबीआई के निरीक्षक नितिन खत्री द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के अनुसार, यह पूरा घोटाला सितंबर 2022 से 2025 के बीच अंजाम दिया गया। टेंडर हासिल करने वाली मुख्य कंपनी मैसर्स एम के इंडस्ट्रीज (जो बाद में मैसर्स एम के हाईटेक प्राइवेट लिमिटेड बनी) ने फरीदाबाद के जो पते दिए थे, वहां कोई काम नहीं होता था। सीबीआई के सत्यापन में उन पतों पर त्यागी प्रॉपर्टीज और महावीर आइस एंड कोल्ड स्टोर जैसी फर्म चलती मिलीं।

फर्म ने फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र लगाकर टेंडर हासिल किए थे। डफल ट्रॉली बैग के एक टेंडर में मूल मंजूरी सिर्फ 1 हजार बैग के लिए कच्चा माल खरीदने की थी। लेकिन तत्कालीन सीजीएम अमित सिंह ने अपनी वित्तीय शक्तियों का उल्लंघन करते हुए बिना उच्च मुख्यालय की अनुमति के सीधे 5 हजार तैयार बैग खरीदने का टेंडर जारी कर दिया। जेम पोर्टल पर आए अन्य 4 बोलीदाताओं को जानबूझकर बाहर कर दिया गया ताकि टेंडर मैसर्स एम के इंडस्ट्रीज को मिले। फर्म को 84.75 लाख का भुगतान भी कर दिया गया। इस मिलीभगत का असर यह हुआ कि कारखाने को इन बैगों की कोई खास जरूरत ही नहीं थी।

21 महीनों में 5 हजार में से केवल 1,072 बैग ही इस्तेमाल हुए, जबकि 3,928 बैग कारखाने के गोदाम में बेकार पड़े रहे। इस प्रशासनिक मेहरबानी की असल वजह सीबीआई की बैंक खातों की जांच में साफ हो गई। जांच में पाया गया कि टेंडर पाने वाली फर्म मैसर्स एम के इंडस्ट्रीज के बैंक खाते से 3.40 लाख रुपये सीधे कंचन सिंह के खाते में भेजे गए थे। कंचन सिंह, तत्कालीन सीजीएम अमित सिंह की दूसरी पत्नी हैं। इस मामले में अमित सिंह, रविंदर सिंह (साझेदार/निदेशक) मैसर्स एम के इंडस्ट्रीज/मैसर्स एम के हाईटेक प्राइवेट लिमिटेड, विजय रतन (साझेदार/निदेशक) को आरोपी बनाय गया है। साथ ही कारखाने के कुछ अन्य अधिकारियों जैसे प्रेम नारायण अग्रवाल, दीपक कुमार और डी. कुहन की भूमिका तथा अन्य अज्ञात लोक सेवकों की संलिप्तता की भी गहन जांच की जा रही है।
 
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