{"_id":"6a4f114846c51bd5e909b830","slug":"former-agra-arto-under-scanner-again-after-vigilance-raid-unearths-cash-and-gold-worth-crores-2026-07-09","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"13 किलो सोना, नौ Kg चांदी: रिटायर्ड ARTO की संपत्ति देख जांच एजेंसी भी हैरान, आगरा में पांच साल रही पोस्टिंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
13 किलो सोना, नौ Kg चांदी: रिटायर्ड ARTO की संपत्ति देख जांच एजेंसी भी हैरान, आगरा में पांच साल रही पोस्टिंग
Thu, 09 Jul 2026 08:52 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Thu, 09 Jul 2026 08:52 AM IST
सार
आगरा में पांच साल तक एआरटीओ प्रवर्तन रहे ललित कुमार का कार्यकाल लगातार विवादों में रहा। सेवानिवृत्ति के बाद विजिलेंस की लखनऊ स्थित आवास पर छापेमारी में करोड़ों की नकदी और सोने-चांदी के जेवर मिलने से मामला फिर सुर्खियों में आ गया।
विज्ञापन
रिटायर्ड ARTO
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आगरा में पांच वर्ष तक सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) प्रवर्तन के पद पर तैनात रहे ललित कुमार का कार्यकाल विवादों के कारण चर्चा में रहा। चालकों से कथित वसूली, वाहन चेकिंग के दौरान झगड़े और सैयां टोल प्लाजा पर हुए विवाद समेत कई मामलों में उनके खिलाफ शिकायतें सामने आती रहीं लेकिन किसी भी मामले में ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सेवानिवृत्त होने के बाद बुधवार को विजिलेंस की टीम की छापेमारी में लखनऊ स्थित आवास से सोने-चांदी के जेवर और करोड़ों की नकदी बरामद होने से ललित कुमार एक बार फिर चर्चा में आ गए।
विज्ञापन
ललित कुमार अक्तूबर 2020 में कानपुर से स्थानांतरित होकर आगरा आए थे। इससे पहले वह कानपुर में आरआई (संभागीय परिवहन निरीक्षक) के पद पर तैनात थे। आगरा में उन्होंने अक्तूबर 2020 से अक्तूबर 2025 तक एआरटीओ प्रवर्तन के रूप में कार्य किया। आगरा से ही वह सेवानिवृत्त हुए थे। इस दौरान उनका नाता विवादों से बना रहा। वाहन चेकिंग अभियानों के दौरान चालकों से विवाद, कथित अवैध वसूली के आरोप और टोल प्लाजा पर हुए विवाद जैसे मामले समय-समय पर सुर्खियों में रहे। परिवहन विभाग को उनके खिलाफ कई शिकायतें भी मिलीं।
विज्ञापन
विज्ञापन
कार्यालय स्तर पर भी विभिन्न मामलों में शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन हर बार मामला ठंडे बस्ते में चला गया। आगरा में तैनाती के दौरान लंबी छुट्टियां लेने के कारण भी उनका तत्कालीन आरटीओ से विवाद हुआ था।
संपत्तियां देख दंग रह गए अधिकारी
छापे के दौरान ललित कुमार के घर पर कई लॉकर पाए गए, जिसमें भारी मात्रा में नगदी, सोने-चांदी के बिस्किट और जेवरात आदि बरामद हुए। गहनता तलाशी में आवास में विभिन्न जगहों पर पैकेट बनाकर छिपाकर रखी गई 1.62 करोड़ रुपये की नगदी भी मिली। अधिकारियों ने बरामद किए गए करीब 22 किलो सोने-चांदी के बिस्किट एवं आभूषणों का सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त वैल्यूअर से मूल्यांकन कराया, जिसमें उनका मूल्य करीब 20 करोड़ रुपये से अधिक पाया गया।
छापे के दौरान ललित कुमार के घर पर कई लॉकर पाए गए, जिसमें भारी मात्रा में नगदी, सोने-चांदी के बिस्किट और जेवरात आदि बरामद हुए। गहनता तलाशी में आवास में विभिन्न जगहों पर पैकेट बनाकर छिपाकर रखी गई 1.62 करोड़ रुपये की नगदी भी मिली। अधिकारियों ने बरामद किए गए करीब 22 किलो सोने-चांदी के बिस्किट एवं आभूषणों का सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त वैल्यूअर से मूल्यांकन कराया, जिसमें उनका मूल्य करीब 20 करोड़ रुपये से अधिक पाया गया।
इसके अलावा तमाम संपत्तियों में निवेश के दस्तावेज भी बरामद हुए, जिनकी कीमत 13 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है। इसके अलावा टोयोटा इनोवा, हुंडई आई-20 कार, रिवाल्वर, विभिन्न बैंकों, पोस्ट आफिस, म्यूचुअल फंड, फिक्स डिपोजिट आदि में लगभग 1 करोड़ से भी अधिक के निवेश के सुबूत भी मिले। वहीं आवास की साज-सज्जा व घरेलू उपकरण आदि में भी करोड़ों रुपये खर्च होना पाया गया।
डेढ़ साल तक एआरटीओ रायबरेली में आरआई के पद पर किया कार्य
आगरा के तत्कालीन सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी ललित कुमार का रायबरेली के नूर मार्केट मिलन सिनेमा गली में मकान है। ललित कुमार ने शहर के जीआईसी में पढ़ाई की थी। साथ ही रायबरेली के जिस मकान में वह परिवार के साथ रहते थे। उनको पाटीदार के रूप में मिला था।
आगरा के तत्कालीन सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी ललित कुमार का रायबरेली के नूर मार्केट मिलन सिनेमा गली में मकान है। ललित कुमार ने शहर के जीआईसी में पढ़ाई की थी। साथ ही रायबरेली के जिस मकान में वह परिवार के साथ रहते थे। उनको पाटीदार के रूप में मिला था।
वर्ष 2010-11 में ललित कुमार रायबरेली एआरटीओ कार्यालय में आरआई के पद पर भी कार्यरत रहे थे। करीब डेढ़ साल तक वह आरआई के पद पर रायबरेली में काम करते रहे। इसके बाद स्थानांतरण हुआ था। आरआई बनने से पहले वह रोडवेज में फोरमैन थे।
मोहल्ले के लोगों ने बताया कि तीन माह पहले ललित कुमार रायबरेली आए थे। इस दौरान उन्होंने अपने किरायेदार से कब्जा लिया था। इनके मकान में तीन दुकानें हैं, जो किराये पर उठी थीं। एक किरायेदार संतोष चौधरी से दुकान पर कब्जे को लेकर विवाद हो गया था। जिसका मामला कोर्ट गया था। कोर्ट का फैसला आने के बाद ललित कुमार तीन माह पहले दुकान का कब्जा लेने आए थे।