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UP: यूपी के शिक्षिकों के लिए आया नया आदेश...'मास्साब' करेंगे कुत्तों की गिनती, किसी को काटा तो कराएंगे उपचार
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 02 Jan 2026 03:08 PM IST
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सार
आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त हो गया है, तो वहीं अब बड़ी जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश के शिक्षकों को दी गई है। आगरा में 1454 स्कूल चिन्हित किए गए हैं, जहां 545 में नोडल अधिकारी कुत्तों की जिम्मेदारी के लिए तैनात किए गए हैं।
आवारा कुत्ते
- फोटो : संवाद
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विस्तार
आवारा कुत्तों के काटने की लगातार बढ़ती घटनाओं को गंभीर जन-सुरक्षा संकट मानते हुए सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों का असर अब आगरा में साफ दिखाई देने लगा है। सु-मोटो रिट पिटीशन (सिविल) संख्या-5/2025 में 7 नवंबर 2025 को पारित आदेश के अनुपालन में उत्तर प्रदेश सरकार ने स्कूलों, अस्पतालों, खेल परिसरों, बस अड्डों (आईएसबीटी सहित) और रेलवे स्टेशनों को आवारा कुत्तों से सुरक्षित करने के लिए कार्ययोजना लागू कर दी है।
शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि शिक्षण संस्थानों, स्वास्थ्य केंद्रों और सार्वजनिक स्थलों पर कुत्तों के काटने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं, जिससे विशेष रूप से बच्चों, मरीजों, यात्रियों और आम नागरिकों की जान जोखिम में पड़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जन-सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के हित में राज्यों को ठोस और प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
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शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि शिक्षण संस्थानों, स्वास्थ्य केंद्रों और सार्वजनिक स्थलों पर कुत्तों के काटने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं, जिससे विशेष रूप से बच्चों, मरीजों, यात्रियों और आम नागरिकों की जान जोखिम में पड़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जन-सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के हित में राज्यों को ठोस और प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
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दो सप्ताह में संवेदनशील परिसरों की पहचान
निर्देशों के तहत आगरा जिला प्रशासन और नगर निकायों को दो सप्ताह के भीतर जिले के सभी सरकारी-निजी स्कूल-कॉलेज, जिला अस्पताल, सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, मेडिकल कॉलेज, खेल परिसर, बस स्टैंड-डिपो और रेलवे स्टेशनों की सूची तैयार करनी है। इसमें उन सभी परिसरों को चिन्हित किया जा रहा है, जहां आवारा कुत्तों की मौजूदगी से लोगों को खतरा है।
निर्देशों के तहत आगरा जिला प्रशासन और नगर निकायों को दो सप्ताह के भीतर जिले के सभी सरकारी-निजी स्कूल-कॉलेज, जिला अस्पताल, सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, मेडिकल कॉलेज, खेल परिसर, बस स्टैंड-डिपो और रेलवे स्टेशनों की सूची तैयार करनी है। इसमें उन सभी परिसरों को चिन्हित किया जा रहा है, जहां आवारा कुत्तों की मौजूदगी से लोगों को खतरा है।
आठ सप्ताह में फेंसिंग और गेट से सुरक्षा
चिन्हित संस्थानों के प्रधानाचार्यों और प्रभारी अधिकारियों को अपने-अपने परिसरों को सुरक्षित बनाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत बाउंड्री वॉल, फेंसिंग, प्रवेश-द्वार पर गेट और अन्य आवश्यक करने होंगे, ताकि आवारा कुत्तों का प्रवेश पूरी तरह रोका जा सके। यह कार्य प्राथमिकता के आधार पर अधिकतम आठ सप्ताह में पूरा किया जाना है।
चिन्हित संस्थानों के प्रधानाचार्यों और प्रभारी अधिकारियों को अपने-अपने परिसरों को सुरक्षित बनाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत बाउंड्री वॉल, फेंसिंग, प्रवेश-द्वार पर गेट और अन्य आवश्यक करने होंगे, ताकि आवारा कुत्तों का प्रवेश पूरी तरह रोका जा सके। यह कार्य प्राथमिकता के आधार पर अधिकतम आठ सप्ताह में पूरा किया जाना है।
हर स्कूल-अस्पताल में नोडल अधिकारी अनिवार्य
प्रत्येक स्कूल, अस्पताल, खेल परिसर, बस अड्डा और रेलवे स्टेशन में एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति अनिवार्य कर दी गई है। नोडल अधिकारी परिसर की सुरक्षा, साफ-सफाई और आवारा कुत्तों की रोकथाम से जुड़े सभी कार्यों का जिम्मेदार होगा। उसका नाम, पद और संपर्क विवरण मुख्य प्रवेश द्वार पर प्रदर्शित किया जाएगा तथा संबंधित नगर निकाय को भी इसकी सूचना दी जाएगी।
प्रत्येक स्कूल, अस्पताल, खेल परिसर, बस अड्डा और रेलवे स्टेशन में एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति अनिवार्य कर दी गई है। नोडल अधिकारी परिसर की सुरक्षा, साफ-सफाई और आवारा कुत्तों की रोकथाम से जुड़े सभी कार्यों का जिम्मेदार होगा। उसका नाम, पद और संपर्क विवरण मुख्य प्रवेश द्वार पर प्रदर्शित किया जाएगा तथा संबंधित नगर निकाय को भी इसकी सूचना दी जाएगी।
जिले में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी जितेंद्र कुमार गोंड ने 1454 परिषदीय विद्यालयों में से अब तक 545 विद्यालयों में नोडल अधिकारी नामित कर दिए हैं। जबकि शेष विद्यालयों में नामांकन की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। अकोला ब्लॉक में 22 विद्यालयों में से 2, खंदौली में 21 में से 1, फतेहाबाद में 39 में से 14, एत्मादपुर में 7 में सभी 7, बाह में 27 में से 9 और शमसाबाद में 19 में से 3 विद्यालयों में नोडल अधिकारी तैनात किए जा चुके हैं। नगरीय क्षेत्र आगरा में भी बड़ी संख्या में स्कूलों को इस व्यवस्था के दायरे में लाया गया है, हालांकि कुछ क्षेत्रों में अभी नोडल अधिकारी नामित किए जाने शेष हैं।
शासन ने बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी विद्यालयों में आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए। खंड शिक्षा अधिकारियों को संवेदनशील स्कूलों की अद्यतन रिपोर्ट तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। बीएसए ने सभी विकासखंडों से एक सप्ताह में पूरी रिपोर्ट तलब कर ली है और चेतावनी दी है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
