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अलीगढ़: हर 29वें व्यक्ति को रेबीज का खतरा, साल में 1.55 लाख को कुत्ते-बंदर ने काटा, रोजाना लग रहे 425 इंजेक्शन

Mon, 28 Sep 2026 01:20 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Mon, 28 Sep 2026 01:20 PM IST
सार

विश्व रेबीज दिवस पर अलीगढ़ की चिंताजनक तस्वीर: 44 लाख आबादी में हर साल करीब 1.55 लाख लोग कुत्ते, बंदर और अन्य जानवरों के काटने का शिकार हो रहे हैं। हर 29वां व्यक्ति रेबीज के खतरे में है। रोजाना औसत 425 लोग एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने सरकारी अस्पताल पहुंचते हैं। यह सिर्फ सरकारी आंकड़ा है, निजी अस्पतालों का नहीं।

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Aligarh Rabies Alert 1.55 Lakh Dog Bites Yearly
एएमयू विदेशी भाषा विभाग के सामने झुंड में बैठे कुत्ते - फोटो : संवाद

विस्तार

अलीगढ़ जिले की करीब 44 लाख आबादी में हर साल लगभग 1.55 लाख लोग कुत्ते, बंदर और अन्य जानवरों के काटने का शिकार हो रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक जिले में हर 29वें व्यक्ति इसी कारण से रेबीज के खतरे में जीता है। इससे बचने के लिए रोजाना औसत 425 लोग एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) लगवाने के लिए सरकारी अस्पतालों में पहुंचते हैं।

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ये आंकड़ा सिर्फ उन मरीजों का है जो सरकारी अस्पतालों रेबीज का इंजेक्शन लगवाने पहुंचते हैं। निजी अस्पतालों में पहुंचने वालों का कोई स्पष्ट आंकड़ा नहीं है। हालांकि चिकित्सक मानते हैं कि यह आंकड़ा जोड़ा जाए तो स्थिति और चिंताजनक हो सकती है।
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28 सितंबर को विश्व रेबीज दिवस है। इस बार का थीम स्ट्रॉन्गर टुगेदर यानी एकसाथ मजबूत है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस साल जनवरी से सितंबर तक आठ माह में करीब एक लाख लोगों को कुत्ते, बंदर और बिल्लियों ने काटा। इनमें 80 हजार से अधिक लोग कुत्ते, 10 हजार से अधिक बंदर और करीब 200 लोग बिल्ली के काटने के शिकार हुए। इसके अलावा करीब 1200 लोगों को नेवले ने काटा।
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जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. जगवीर सिंह वर्मा के अनुसार, अस्पताल में रोजाना करीब 90 से 94 लोग रेबीज का इंजेक्शन लगवाने पहुंचते हैं। मरीज की स्थिति और काटने की प्रकृति के आधार पर तीन श्रेणियों में एआरवी लगाया जाता है। रेबीज केवल कुत्ते के काटने से नहीं होता। बंदर, बिल्ली, नेवला, गिलहरी, चूहा जैसे संक्रमित जानवरों के काटने या खरोंच से भी संक्रमण का खतरा रहता है।

90 हजार इंजेक्शन की होती खरीदारी
थोक दवा विक्रेता आमिर आबिद ने बताया कि फफाला बाजार से मेडिकल स्टोर को हर साल 90 हजार रेबीज इंजेक्शन बेचे जाते हैं।

15 हजार कुत्तों की नसबंदी
15 हजार कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है। शहर में 55 हजार आवारा कुत्ते हैं, जिनकी गिनती हो चुकी है। इसके बाद भी शहर में आवारा कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण नहीं है। यही वजह है कि ये कुत्ते अक्सर लोगों पर हमला कर देते हैं।

एंटी रेबीज क्लीनिक में रोजाना पहुंच रहे 85 मरीज
जुलाई 2022 को प्रदेश का पहला एंटी रेबीज क्लीनिक पंडित दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय में खोला गया था। दावा है कि यह प्रदेश का आदर्श क्लीनिक है। सीएमएस डॉ. एमके माथुर ने बताया कि रेबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए करीब 85 मरीज रोजाना आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस क्लीनिक पर 24 घंटे सेवा शुरू की गई थी। यहां एक प्रशिक्षित डॉक्टर, वार्ड बॉय व फार्मासिस्ट की तैनाती है। जिस जगह कुत्ता, बंदर या बिल्ली काटे, उस घाव को धुलने की मशीन भी यहां उपलब्ध है।

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