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अलीगढ़: लोन की अवधि और किस्त मनमाने ढंग से बढ़ाना पड़ा भारी, फाइनेंस कंपनी पर लगाया जुर्माना, रिफंड का आदेश

अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Vijay Singh Pundir Updated Wed, 17 Jun 2026 03:18 PM IST
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Consumer Commission's verdict: Fine imposed on finance company
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला।
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अलीगढ़ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, अलीगढ़ ने होम लोन ग्राहकों के हक में एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने बिना ग्राहक की पूर्व सूचना और सहमति के लोन की ईएमआई और उसकी अवधि को एकतरफा बढ़ाने पर कड़ी नाराजगी जताई है। आयोग ने आधार हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता का लोन अकाउंट फाइनल करे और ग्राहक द्वारा चुकाई गई अतिरिक्त राशि को ब्याज सहित वापस करे। इसके साथ ही कंपनी पर मानसिक प्रताड़ना और अदालती खर्च के लिए जुर्माना भी लगाया गया है।

यह फैसला जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हसनैन कुरैशी और सदस्य पूर्णिमा सिंह राजपूत की पीठ द्वारा सुनाया गया। अलीगढ़ की संजय गांधी कॉलोनी के निवासी दुर्गेश कुमार शर्मा ने जुलाई 2016 में आधार हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड की अलीगढ़ शाखा से होम लोन प्लॉट प्लस कंस्ट्रक्शन के तहत ऋण के लिए आवेदन किया था। कंपनी ने उन्हें बताया था कि ब्याज दर 10 से 11 फीसदी के बीच रहेगी, 1% प्रोसेसिंग फीस होगी और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 2.5 लाख रुपये की सब्सिडी भी मिलेगी। इसके बाद कंपनी ने उन्हें कुल 7,75,000 रुपये का लोन वितरित किया। शुरुआत में उनकी मासिक किस्त  9,950 रुपये तय की गई थी।

बिना बताए 20 साल के लोन को कर दिया 30 साल का
शिकायतकर्ता दुर्गेश कुमार ने आयोग को बताया कि अक्टूबर 2017 में उनकी ईएमआई शुरू हुई। लेकिन सितंबर 2022 में कंपनी ने बिना किसी पूर्व सूचना या सहमति के उनकी ईएमआई को 9,950 रुपये से बढ़ाकर सीधे 12,387 रुपये कर दिया। इतना ही नहीं, कंपनी ने लोन चुकाने की अवधि को भी गुपचुप तरीके से 20 साल से बढ़ाकर 30 साल (वर्ष 2046 तक) कर दिया।
इसके अलावा, ग्राहक को बताए बिना ही कंपनी ने उनके नाम पर 36,548 रुपये का इंश्योरेंस (बीमा) भी जोड़ दिया था।

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8 लाख देने के बाद भी खड़ा कर दिया 9.5 लाख का बकाया
दुर्गेश कुमार ने जब जनवरी 2024 में अपने लोन का विवरण देखा, तो वे हैरान रह गए। वे 2016 से 2024 के बीच 8,00,000 रुपये से अधिक का भुगतान कर चुके थे (जो कि उनकी मूल लोन राशि 7,75,000 रुपये से भी ज़्यादा था)। लेकिन इसके बावजूद कंपनी उनके खाते में 9,50,000 रुपये का बकाया शेष  दिखा रही थी। कंपनी के इस रवैये से परेशान होकर उन्होंने उपभोक्ता आयोग की शरण ली।

कंपनी नहीं हुई हाजिर, एकतरफा चला मुकदमा
उपभोक्ता आयोग के समक्ष सुनवाई के दौरान आधार हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड की ओर से कोई भी प्रतिनिधि या वकील पक्ष रखने नहीं आया और न ही इन गंभीर आरोपों का कोई खंडन किया गया। इस पर आयोग ने कंपनी के खिलाफ एकपक्षीय  कार्रवाई करते हुए मुकदमा आगे बढ़ाया।

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उपभोक्ता आयोग की सख्त टिप्पणी और आदेश
आयोग ने मामले के दस्तावेजों को देखने के बाद स्पष्ट किया कि कंपनी द्वारा लोन की अवधि और ईएमआई को बढ़ाना पूरी तरह से एकतरफा और अनुचित था, जिससे ग्राहक बंधा हुआ नहीं है। आयोग ने माना कि ग्राहक अपने मूल लोन से अधिक की राशि पहले ही चुका चुका है, इसलिए वह रिफंड पाने का हकदार है।

अदालत ने  आदेश जारी किए हैं कि  विपक्षी फाइनेंस कंपनी ग्राहक के लोन खाते को अंतिम रूप से बंद  करे और लोन राशि से अधिक ली गई पूरी रकम को ब्याज सहित वापस करे। कंपनी को मानसिक उत्पीड़न के मुआवजे के रूप में 5,000 रुपये और मुकदमेबाजी के खर्च  के रूप में 5,000 रुपये पीड़ित ग्राहक को देने होंगे।

कंपनी को इस आदेश का पालन 45 दिनों के भीतर करना होगा। यदि कंपनी तय समय में आदेश का पालन नहीं करती है, तो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा-72 के तहत कंपनी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाया जाएगा और सजा दी जाएगी।

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