Tomato Sauce: सावधान हो जाएं, 20 रुपये की सॉस की अजीब है हकीकत, ये है सड़े टमाटर की बनी
पिछले दिनों स्ट्रीट वेंडरों की जांच में कमजोर गुणवत्ता वाली सॉस मिली थी। इन बोतलों पर उत्पादनकर्ताओं के पते स्पष्ट नहीं थे। कई दिनों की रेकी के बाद दोनों ठिकानों पर यह कार्रवाई की गई।
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अलीगढ़ शहरभर में लगे चाट-पकौड़े, समोसे, मोमोज और चाऊमीन के स्टॉल पर मिल रही चटनी-सॉस को खाने से आप बीमार हो सकते हैं। 15 से 20 रुपये प्रति लीटर में बेची जा रही संदिग्ध गुणवत्ता की सॉस का बड़ा मामला सामने आया है। एफडीए की टीम ने सोमवार को रेकी के बाद देहली गेट और दुर्गाबाड़ी क्षेत्र में दो उत्पादन इकाइयों पर छापा मारा। इस दौरान भारी मात्रा में सॉस बनाने का माल सीज किया गया और छह नमूने जांच के लिए लिए गए। इन इकाइयों से प्रतिदिन 300 लीटर से अधिक सॉस की खपत महानगर में हो रही थी।
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी मनोज कुमार तोमर के नेतृत्व में दो टीमों ने यह कार्रवाई की। एक टीम ने देहली गेट स्थित राजकुमार वर्मा की उत्पादन इकाई पर छापा मारा। वहां रिया नाम के ब्रांड से तैयार 920 किलो पैक्ड माल जब्त किया गया। करीब 150 किलो अधबना कमजोर गुणवत्ता वाला माल भी नष्ट कराया गया।
दूसरी टीम ने दुर्गाबाड़ी मैरिस सड़क पर विशाल चावला की इकाई पर छापा मारा। यहां रॉयल मैजिक ब्रांड नाम की 180 बोतल मीठी चटनी और 200 लीटर हरी चटनी नष्ट की गई। इसके अतिरिक्त 464 बोतल मीठी चटनी, 108 लीटर हरी चटनी और 105 लीटर सोया सॉस जब्त की। दोनों इकाइयों का उत्पादन बंद करा दिया गया है और उन्हें सूचना पत्र जारी किए गए हैं।
गुणवत्ता पर गंभीर सवाल
एफडीए के सहायक आयुक्त दीनानाथ यादव ने बताया कि पिछले दिनों स्ट्रीट वेंडरों की जांच में कमजोर गुणवत्ता वाली सॉस मिली थी। इन बोतलों पर उत्पादनकर्ताओं के पते स्पष्ट नहीं थे। कई दिनों की रेकी के बाद दोनों ठिकानों पर यह कार्रवाई की गई। इकाइयों में कमजोर गुणवत्ता का रंग और कुछ अन्य रसायन अत्यधिक मात्रा में पाए गए। खराब टमाटर और अन्य खाद्य सामग्री का प्रयोग भी सामने आया। छोटे कमरों में साफ-सफाई का अभाव था और गुणवत्ता जांच का कोई साधन नहीं था।
जब्त और नष्ट किए गए उत्पाद
राजकुमार वर्मा की इकाई से विनेगर रिया गोल्ड, रेड ग्रीन सॉस रिया उत्पाद चिह्न और समोसा मसाला बीएमबी उत्पाद चिह्न के तीन नमूने लिए गए। विशाल चावला की इकाई से मीठी चटनी, हरी चटनी और सोया सॉस के कुल तीन नमूने लिए गए। राजकुमार वर्मा की इकाई से कुल 21 हजार 240 रुपये का पैक्ड माल जब्त हुआ। वहां 2250 रुपये कीमत का अधबना माल नष्ट किया गया। विशाल चावला की इकाई से 4998 रुपये की मीठी चटनी और 8000 रुपये की हरी चटनी नष्ट हुई।
स्वास्थ्य पर संभावित दुष्प्रभाव
ये सॉस कम लागत में खराब टमाटर, खाद्य रंग और कृत्रिम स्वाद बढ़ाने वाले सार से बनते हैं। हरी चटनी में भी कम गुणवत्ता वाली सामग्री मिलाई जाती है। चिली सॉस में गाढ़ापन लाने के लिए कॉर्नस्टार्च या मैदा का प्रयोग होता है। सोडियम बेंजोएट जैसे परिरक्षक भी इनमें इस्तेमाल किए जाते हैं। इनके सेवन से उच्च रक्तचाप, मोटापा, मधुमेह और एलर्जी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। पेट की समस्याएं, एसिडिटी और सीने में जलन भी इनके संभावित दुष्प्रभाव हैं।
इस सॉस की गुणवत्ता पर ये सवाल
- खराब टमाटर, कृत्रिम रंग, प्रिजरवेटिव (परिरक्षक) और विनेगर आदि अन्य रसायनों का है प्रयोग।
- बनाते समय साफ-सफाई का प्रयोग नहीं, गुणवत्ता जांच का भी कोई माध्यम इनके पास नहीं था।
- गुणवत्ता-गारंटी की जांच के बिना ही पैकिंग पर तीन माह की एक्सपायरी का किया जाता उल्लेख।
- ब्रांडेड कंपनियों के सॉस 150 से 250 रुपये लीटर, फिर ये इतनी कम कीमत में क्या गुणवत्ता देंगे।