यूपी चुनाव 2027: भाजपा के पूर्व मंत्री दलवीर सिंह का पौत्र विजय सपा में शामिल, टिकट मिलने की चर्चाएं तेज
विजय सिंह का परिवार अलीगढ़ की राजनीति में एक बड़ा नाम रहा है। दादा ठा. दलवीर सिंह ब्लॉक प्रमुख से लेकर चार बार विधायक रहे और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। उनके पिता ठाकुर राकेश सिंह और माता पुष्पलता दोनों ही चंडौस ब्लॉक के प्रमुख रह चुके हैं।
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अलीगढ़ में बरौली के पूर्व विधायक व पूर्व मंत्री दलवीर सिंह के छोटे पौत्र विजय सिंह (पप्पू) ने बृहस्पतिवार को लखनऊ में सपा की सदस्यता ले ली। वह पिछले कई महीनों से सपा के स्थानीय और प्रदेश के नेताओं के संपर्क में थे।
विजय सिंह के सपा में जाने के बाद बरौली में उनके परिवार की राजनीतिक सक्रियता फिर सुर्खियों में आ गई है। विजय सिंह और उनके बड़े भाई अजय सिंह, जो एएमयू छात्रसंघ के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव भी लड़ चुके हैं। दोनों भाई बरौली क्षेत्र में सक्रिय हैं। विजय सिंह के सदस्यता लेने पर सपा जिलाध्यक्ष लक्ष्मी धनगर बताया कि विजय सिंह दो दिन पहले उनके आवास पर आए थे। वहां पार्टी में शामिल होने को लेकर बातचीत हुई थी। इसके बाद लखनऊ में सदस्यता ग्रहण की गई।
दलवीर सिंह के अस्वस्थ होने के बाद पौत्र अजय सिंह ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में बरौली सीट के लिए भाजपा से टिकट मांगा था। मगर भाजपा नेतृत्व ने उन्हें टिकट न देकर पूर्व मंत्री जयवीर सिंह को टिकट दे दिया। विजय सिंह के सपा में आने से उन्हें बरौली विधानसभा क्षेत्र से टिकट मिलने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। विधानसभा चुनाव-2022 में बरौली सीट समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल के गठबंधन के तहत रालोद के कोटे में थी, जिससे प्रमोद गौड़ ने संयुक्त गठबंधन के प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें हार मिली थी।
विजय की राह में चुनाैतियां
समाजवादी पार्टी का दामन थामने वाले पूर्व मंत्री ठाकुर दलवीर सिंह के छोटे पौत्र विजय सिंह ने भले ही एक मजबूत और समृद्ध राजनीतिक पारिवारिक विरासत के सहारे राजनीति में कदम रखा हो, लेकिन बरौली विधानसभा क्षेत्र में उनकी राह आसान नजर नहीं आ रही है। राजनीतिक रसूख और पारिवारिक पृष्ठभूमि के बावजूद उनके सामने कई ऐसी जमीनी चुनौतियां हैं, जिनसे पार पाना बड़ी परीक्षा साबित होगा।
विजय सिंह का परिवार अलीगढ़ की राजनीति में एक बड़ा नाम रहा है। दादा ठा. दलवीर सिंह ब्लॉक प्रमुख से लेकर चार बार विधायक रहे और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। उनके पिता ठाकुर राकेश सिंह और माता पुष्पलता दोनों ही चंडौस ब्लॉक के प्रमुख रह चुके हैं। इस प्रकार, परिवार का राजनीतिक प्रभाव और क्षेत्र में गहरी पकड़ उनके लिए एक बड़ा संबल है, जिसके बल पर वे विषम परिस्थितियों को अपने पक्ष में मोड़ने का प्रयास कर सकते हैं।
दूसरी ओर चुनौतियों की बात करें तो बरौली क्षेत्र में समाजवादी पार्टी का पारंपरिक जनाधार अपेक्षाकृत सीमित माना जाता है। ऐसे में केवल पार्टी के दम पर बड़ी बढ़त बनाना एक चुनौती है।इसके साथ ही वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन तय माना जा रहा है। यदि कांग्रेस को तय कोटे के तहत सीटें मिलती हैं और यदि बरौली सीट कांग्रेस के खाते में चली जाती है, तो समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बरौली सीट पर कांग्रेस का प्रदर्शन ऐतिहासिक रूप से मजबूत रहा है, जबकि सपा अमूनन तीसरे स्थान पर रही है। यहां से कांग्रेस प्रत्याशी रहे स्वर्गीय दिनेश शर्मा 25 से 30 हजार तक वोट पाकर पार्टी को सम्मानजनक स्थिति में रखते आए हैं। सीट बंटवारे का यह समीकरण विजय सिंह के राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करेगा।इन सबके साथ ही विजय सिंह के सामने अपने पिछले चुनावी प्रदर्शन की कसौटी भी है। हाल ही में गभाना टाउन एरिया के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था, जहां अभिमन्यु राज सिंह विजयी हुए थे। ऐसे में पारिवारिक विरासत और राजनीतिक अनुभव के दम पर विजय सिंह अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत कर सकते हैं, लेकिन गठबंधन के समीकरण, स्थानीय स्तर पर पार्टी का जनाधार और पिछली चुनावी हार से सीख लेकर रणनीति पर भी विचार करना होगा।