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AMU: अलीगढ़ तीन बार आए, 88 साल से महफूज हैं एएमयू में गांधीजी के लिखे हुए पत्र, शहर में इन दो जगहों पर ठहरते

अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Thu, 02 Oct 2025 10:24 AM IST
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सार

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का अलीगढ़ और एएमयू से खास रिश्ता रहा। वह अलीगढ़ में तीन बार आए। एएमयू छात्रसंघ ने गांधीजी को आजीवन सदस्यता भी दी थी। गांधीजी ने अब्दुल मजीद ख्वाजा को कई पत्र लिखे जो संग्रहालय में सुरक्षित हैं।

Mahatma Gandhi relationship with Aligarh and AMU
महात्मा गांधी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के संग्रहालय में 88 साल से महात्मा गांधी के हस्तलिखित पत्र महफूज हैं। यूनिवर्सिटी छात्रसंघ ने गांधीजी को आजीवन सदस्यता भी दी थी। उन्होंने यूनिवर्सिटी परिसर में खिलाफत मूवमेंट और स्वदेशी आंदोलन को तेज धार दी थी। वह अपने जीवनकाल में तीन बार अलीगढ़ आए थे।

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संग्रहालय में 20 जुलाई 1937 को लेडी उम्मत-उल-इस्लाम (कोलोनल मोहम्मद हमीद खान, वित्त मंत्री, रियासत पटियाला की पुत्री) को लिखा गया पत्र, 29 जुलाई 1942 को एएमयू के पूर्व छात्र अब्दुल बारी को लिखा पत्र और 7 जनवरी 1937 को एएमयू छात्रसंघ के महासचिव को संबोधित पत्र हैं। गांधीजी ने अब्दुल मजीद ख्वाजा को कई पत्र लिखे जो संग्रहालय में सुरक्षित हैं।
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गांधी जी के हस्तलिखित पत्र
पत्नी कस्तूरबा के साथ भी अलीगढ़ आए गांधीजी
गांधीजी पहली बार अलीगढ़ 25 अक्तूबर 1920 को मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज (अब एएमयू) में आए थे। दूसरी बार 1925 को उन्हें एएमयू छात्रसंघ ने उन्हें मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया था। छात्रसंघ ने उनको आजीवन सदस्यता भी दी थी। तीसरी बार वर्ष 1929 को वह अपनी पत्नी कस्तूरबा गांधी के साथ अलीगढ़ आए थे।

गांधीजी से प्रभावित हो एएमयू छात्रों ने स्ट्रेची हॉल के सामने लगा दी थी विदेशी कपड़ों में आग

एएमयू के उर्दू एकेडमी के पूर्व निदेशक डॉ. राहत अबरार ने बताया कि वर्ष 1925 में गांधीजी ने खादी के कपड़े को इस्तेमाल करने की अपील की थी, जिसका असर छात्रों पर खूब पड़ा, जिन्होंने स्ट्रेची हॉल के सामने विदेशी कपड़ों को आग लगा दी।
गांधी जी के हस्तलिखित पत्र
गांधीजी का अलीगढ़ से था भावनात्मक रिश्ता
डॉ. राहत ने कहा कि मौलाना शौकत अली के खिलाफत मूवमेंट को उन्होंने समर्थन दिया था। गांधीजी का अलीगढ़ से भावनात्मक रिश्ता था। गांधीजी जब भी अलीगढ़ आए वह मुस्तफा कमाल शेरवानी की कोठी (अलीगढ़ पब्लिक स्कूल) और राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले अब्दुल मजीद ख्वाजा की (यूनिवर्सिटी के एकेडमिक टीचर्स ट्रेनिंग सेंटर) कोठी पर ठहरते थे

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