Aligarh: मेडिकल कॉलेज में हड़ताल जारी होने से इमरजेंसी ठप, भटकते रहे मरीज, एक साल में पांचवी बार हुई स्ट्राइक
जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में पिछले एक वर्ष (अप्रैल 2025 से अप्रैल 2026 तक) के आंकड़ों पर गौर करें तो लगभग पांच बार प्रमुख रूप से चिकित्सा सेवाएं प्रभावित हुई हैं।
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएन मेडिकल कॉलेज में बृहस्पतिवार को महिला डॉक्टर से अभद्रता के बाद शुरू हुई डॉक्टरों की हड़ताल शुक्रवार को दूसरे दिन भी जारी रही। हड़ताल पर गए डॉक्टरों का आरोप है कि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण ऐसे हमले बार-बार हो रहे हैं। डॉक्टरों ने शुक्रवार को कुलपति प्रो. नईमा खातून मिलकर आरोपियों की गिरफ्तारी और मेडिकल कॉलेज में पुख्ता सुरक्षा इंतजाम कराने की मांग की। उधर शुक्रवार की शाम अपनी मांगों को लेकर रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) ने ट्रॉमा सेंटर में मार्च भी निकाला। इस दौरान-हमें न्याय चाहिए, हम अत्याचार नहीं सहेंगे... जैसे नारे लगाए।
बृहस्पतिवार को रेडियोडायग्नोसिस विभाग की प्रथम वर्ष की एक महिला जूनियर रेजिडेंट (जेआर-1) के साथ ड्यूटी के दौरान हुई मारपीट के विरोध में आरडीए ने हड़ताल की घोषणा की थी। डॉक्टर उस समय इमरजेंसी और ट्रॉमा सेंटर में ड्यूटी कर रही थीं, इसी दौरान घटना हुई। डॉक्टरों की आम सभा की बैठक में जिला प्रशासन और विश्वविद्यालय प्रबंधन पर उदासीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि आश्वासनों के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। सीएमओ कार्यालय में पुलिस कर्मियों ने डॉक्टरों के साथ अभद्र व्यवहार किया, जो पूरी तरह से अनुशासनहीनता है। सुरक्षा तंत्र पूरी तरह से फेल हो चुका है, जिससे चिकित्सा कर्मी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
आरडीए की प्रमुख मांगें
- आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी और मरीज द्वारा लिखित माफी मांगी जाए।
- बदसलूकी करने वाले पुलिस और प्रॉक्टोरियल स्टाफ पर सख्त कार्रवाई।
- अस्पताल में गेट-पास सिस्टम लागू हो (एक मरीज के साथ अधिकतम दो तीमारदार)
- हर डॉक्टर के वर्कस्टेशन और वार्डों में प्रशिक्षित सुरक्षा गार्डों की तैनाती।
- नॉन-एकेडमिक जूनियर रेजिडेंट्स के पदों पर तत्काल भर्ती।
डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। अस्पताल पर बढ़ते मरीजों के बोझ को देखते हुए फंडिंग और स्टाफ की कमी को दूर किया जाए। अक्सर बजट की कमी का हवाला देकर सुरक्षा और भर्ती को टाल दिया जाता है, जिससे मौजूदा डॉक्टरों पर दबाव असहनीय हो गया है। - डॉ. अख्तर अली, उपाध्यक्ष, आरडीए
आरडीए के साथ वार्ता चल रही है। गतिरोध दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। जो मांगें हैं उनमें से कुछ लागू हैं और अन्य पर विचार चल रहा है। - प्रो. मो. नवेद खान, प्रॉक्टर, एएमयू
प्लास्टिक की ट्रे में रखकर लाए थे दो दिन के नवजात को, इलाज न मिलने पर लौटे
जेएन मेडिकल कॉलेज की हड़ताल मरीजों पर भारी पड़ रही है। इमरजेंसी में आसपास के जिलों से और कस्बों से 150 से अधिक मरीज आते हैं। यहां वही मरीज लाए जाते हैं जिनके इलाज से आसपास के नर्सिंग होम अथवा हॉस्पिटल हाथ खड़े कर देते हैं। ऐसी हालत में यहां से भी निराश लौटना मरीज और तीमारदारों के लिए बहुत ही पीड़ादायक होता है।
केस-1- दो दिन की मासूम की अटकी रहीं सासें
बुलंदशहर से आई उर्मिला अपने दो दिन पहले पैदा हुए पौत्र को प्लास्टिक की ट्रे में रखकर लाई थीं। बच्चे का पेट फूल चुका था। नन्हीं सी जान ऑक्सीजन के सहारे अंतिम लड़ाई लड़ रही थी। जब मेडिकल कॉलेज में इलाज नहीं मिला तो उर्मिला रो पड़ीं। रोते-बिलखते हुए वह इतना कह पाईं- पहले पता होता तो अपने बच्चे को लेकर यहां नहीं आती। उन्हें रोता देख अस्पताल में मौजूद अन्य तीमारदारों की आंखें भी नम हो गईं।
केस - 2- अपनों को बचाने की जंग, दर-दर भटकते परिजन
खैर के गांव बिरौला से आए टिंकू अपने भाई रवि को खून से लथपथ हालत में लेकर पहुंचे थे, लेकिन वहां इलाज करने वाला कोई न था। खून बहता रहा और टिंकू की उम्मीदें टूटती रहीं। मजबूर होकर उन्हें निजी अस्पताल की ओर रुख करना पड़ा। यही हाल खैर के रसूलपुर से आए चंद्रशेखर का था, जो अपनी सास कस्तूरी देवी के गिरते स्वास्थ्य को देख घबराए हुए थे, लेकिन मेडिकल कॉलेज के बंद दरवाजों ने उन्हें निराश कर दिया। सांसों की जंग लड़ रही नीतू की मां और बुलंदशहर से आए अमर सिंह के पिता राजेंद्र सिंह को भी भर्ती करने से साफ इन्कार कर दिया गया।
एक साल में पांच बार हो चुकी है मेडिकल कॉलेज में हड़ताल
जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में पिछले एक वर्ष (अप्रैल 2025 से अप्रैल 2026 तक) के आंकड़ों पर गौर करें तो लगभग पांच बार प्रमुख रूप से चिकित्सा सेवाएं प्रभावित हुई हैं। इन हड़तालों का सबसे बुरा असर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उन गरीब मरीजों पर पड़ता है जो इलाज की उम्मीद में अलीगढ़ आते हैं, क्योंकि जेएनएमसी इस क्षेत्र का सबसे बड़ा लाइफलाइन अस्पताल माना जाता है।
- अप्रैल 2026 (वर्तमान) : महिला डॉक्टर के साथ अभद्रता के विरोध में रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल।
- 22 मार्च 2026 : मरीज के तीमारदार और चिकित्सकीय स्टाफ के साथ मारपीट के बाद हड़ताल हो गई।
- जनवरी 2026 : डॉक्टरों और तीमारदारों के बीच झड़प के बाद सुरक्षा बढ़ाने की मांग को लेकर कार्य बहिष्कार।
- सितंबर 2025 : रेजिडेंट डॉक्टरों की मांगों और प्रशासनिक मुद्दों को लेकर सांकेतिक विरोध।
- जून-जुलाई 2025 : सुरक्षा गार्डों और डॉक्टरों के बीच विवाद के बाद हुई हड़ताल।
हड़ताल के मुख्य कारण
- डॉक्टरों के साथ अभद्रता- तीमारदारों या बाहरी तत्वों द्वारा ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों के साथ मारपीट या दुर्व्यवहार।
- सुरक्षा की कमी- कैंपस में पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस चौकी की सक्रियता की मांग।
- प्रशासनिक विवाद- मेडिकल कॉलेज प्रशासन और रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के बीच आपसी तालमेल की कमी।

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