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Aligarh News: संवरा अचल सरोवर, लोकार्पण के साथ जनता को आज मिलेगी सौगात
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अचल सरोवर।
- फोटो : samvad
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शहर की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान माने जाने वाले पौराणिक अचल सरोवर की तस्वीर अब पूरी तरह से बदल चुकी है। कभी उपेक्षा और गंदगी के कारण कूड़े के ढेर में तब्दील हो चुका अचल सरोवर अब स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत नए स्वरूप में तैयार है। मंगलवार को यह लोकार्पण के बाद जनता को समर्पित किया जाएगा।
स्मार्ट सिटी परियोजना में करीब 22 करोड़ रुपये की लागत से अचल सरोवर पर विकास कार्य कराए गए हैं। परियोजना के तहत सरोवर की सफाई, सुंदरीकरण के साथ पूरे परिसर को पर्यटन एवं धार्मिक स्थल के रूप में विकसित किया गया है। अब अचल सरोवर आमजन के लिए खुलने को तैयार है। इसके बाद लोग यहां सुबह-शाम टहलने, भगवान भोलेनाथ की लगी प्रतिमा और यहां बने मंदिरों के दर्शन कर सकेंगे। इससे शहर के विकास में एक और कड़ी जुड़ जाएगी।
अचल सरोवर की है पौराणिक मान्यता
पौराणिक कथाओं के अनुसार द्वापरयुग में अचल सरोवर स्थित अचलेश्वर धाम पर भगवान श्रीकृष्ण और उनके बड़े भाई बलराम आए थे। इससे अचल की महत्ता बढ़ती चली गई। विशाल सरोवर में अज्ञातवाश के समय युधिष्ठिर के छोटे भाई नकुल और सहदेव भी यहां आए थे। उन्होंने अचल सरोवर में स्नान किया था। इन्हीं पौराणिक मान्यताओं को लेकर अचल सरोवर के चारों ओर छोटे छोटे मंदिरों का निर्माण होता चला गया और अचल क्षेत्र धर्म की नगरी के रूप में परिवर्तित हो गया। वर्तमान में अचल सरोवर के किनारे अचलेश्वरधाम, श्री गिलहराजजी मंदिर, श्री गणेश मंदिर समेत करीब 100 मंदिर हैं। इसके अलावा शहर में रामलीला आयोजन के दाैरान सरयू पार की ऐतिहासिक लीला का मंचन भी यहीं होता है।
धार्मिक गतिविधियों के साथ पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
स्मार्ट सिटी योजना में वर्ष 2019 में अचल सरोवर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया। करीब 22 करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 2022 में अचल सरोवर बनकर तैयार हुआ। अब यहां की सुंदरता और भव्यता देखते बनती है। अचल की गुमटी पर भगवान भोलेनाथ की प्रतिमा बनी हुई है। पर्यटकों के टहलने के लिए चारों ओर पथ बनाए गए हैं। मंदिर का जीर्णोद्धार, तालाब का सुंदरीकरण, प्रकाश व्यवस्था, बैठने की व्यवस्था, रेलिंग, वॉकिंग ट्रैक, आकर्षक लाइटिंग, ग्रीन एरिया, सेल्फी प्वाइंट और सुरक्षा के लिए रेलिंग लगाने समेत अन्य आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं।
सार्वजनिक शौचालय, पार्किंग व्यवस्था और सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। बच्चों के लिए ओपन स्पेस और परिवारों के बैठने के लिए विशेष जोन तैयार किए गए हैं। इसके साथ ही परिसर में व्यवस्थित वेंडिंग जोन और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए भी स्थान तैयार किया गया है। रात के समय रंग-बिरंगी रोशनी से सजा अचल ताल अब आकर्षण का केंद्र बन गया है। अब यहां धार्मिक गतिविधियों के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
अचल सरोवर को सिर्फ धार्मिक स्थल ही नहीं बल्कि शहर के प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए नियमित सफाई, रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। स्मार्ट सिटी परियोजना का उद्देश्य अचल ताल की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान को संरक्षित रखते हुए इसे आधुनिक सुविधाओं से लैस करना है। शहरवासियों को एक बेहतर सार्वजनिक स्थल मिलेगा, वहीं बाहर से आने वाले पर्यटकों को भी अलीगढ़ की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
- प्रेम प्रकाश मीणा, नगर आयुक्त
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स्मार्ट सिटी परियोजना में करीब 22 करोड़ रुपये की लागत से अचल सरोवर पर विकास कार्य कराए गए हैं। परियोजना के तहत सरोवर की सफाई, सुंदरीकरण के साथ पूरे परिसर को पर्यटन एवं धार्मिक स्थल के रूप में विकसित किया गया है। अब अचल सरोवर आमजन के लिए खुलने को तैयार है। इसके बाद लोग यहां सुबह-शाम टहलने, भगवान भोलेनाथ की लगी प्रतिमा और यहां बने मंदिरों के दर्शन कर सकेंगे। इससे शहर के विकास में एक और कड़ी जुड़ जाएगी।
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अचल सरोवर की है पौराणिक मान्यता
पौराणिक कथाओं के अनुसार द्वापरयुग में अचल सरोवर स्थित अचलेश्वर धाम पर भगवान श्रीकृष्ण और उनके बड़े भाई बलराम आए थे। इससे अचल की महत्ता बढ़ती चली गई। विशाल सरोवर में अज्ञातवाश के समय युधिष्ठिर के छोटे भाई नकुल और सहदेव भी यहां आए थे। उन्होंने अचल सरोवर में स्नान किया था। इन्हीं पौराणिक मान्यताओं को लेकर अचल सरोवर के चारों ओर छोटे छोटे मंदिरों का निर्माण होता चला गया और अचल क्षेत्र धर्म की नगरी के रूप में परिवर्तित हो गया। वर्तमान में अचल सरोवर के किनारे अचलेश्वरधाम, श्री गिलहराजजी मंदिर, श्री गणेश मंदिर समेत करीब 100 मंदिर हैं। इसके अलावा शहर में रामलीला आयोजन के दाैरान सरयू पार की ऐतिहासिक लीला का मंचन भी यहीं होता है।
धार्मिक गतिविधियों के साथ पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
स्मार्ट सिटी योजना में वर्ष 2019 में अचल सरोवर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया। करीब 22 करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 2022 में अचल सरोवर बनकर तैयार हुआ। अब यहां की सुंदरता और भव्यता देखते बनती है। अचल की गुमटी पर भगवान भोलेनाथ की प्रतिमा बनी हुई है। पर्यटकों के टहलने के लिए चारों ओर पथ बनाए गए हैं। मंदिर का जीर्णोद्धार, तालाब का सुंदरीकरण, प्रकाश व्यवस्था, बैठने की व्यवस्था, रेलिंग, वॉकिंग ट्रैक, आकर्षक लाइटिंग, ग्रीन एरिया, सेल्फी प्वाइंट और सुरक्षा के लिए रेलिंग लगाने समेत अन्य आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं।
सार्वजनिक शौचालय, पार्किंग व्यवस्था और सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। बच्चों के लिए ओपन स्पेस और परिवारों के बैठने के लिए विशेष जोन तैयार किए गए हैं। इसके साथ ही परिसर में व्यवस्थित वेंडिंग जोन और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए भी स्थान तैयार किया गया है। रात के समय रंग-बिरंगी रोशनी से सजा अचल ताल अब आकर्षण का केंद्र बन गया है। अब यहां धार्मिक गतिविधियों के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
अचल सरोवर को सिर्फ धार्मिक स्थल ही नहीं बल्कि शहर के प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए नियमित सफाई, रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। स्मार्ट सिटी परियोजना का उद्देश्य अचल ताल की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान को संरक्षित रखते हुए इसे आधुनिक सुविधाओं से लैस करना है। शहरवासियों को एक बेहतर सार्वजनिक स्थल मिलेगा, वहीं बाहर से आने वाले पर्यटकों को भी अलीगढ़ की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
- प्रेम प्रकाश मीणा, नगर आयुक्त
