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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Azam Khan and Abdullah get major relief from court in 'two PAN cards' case; court hands down a suspended

यूपी : आजम खां और अब्दुल्ला की जेल से हो सकती है रिहाई, जमानत मंजूर होने के बाद ईडी के वारंट पर टिकी निगाहें

Thu, 29 Oct 2026 12:37 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 29 Oct 2026 12:37 PM IST
सार

दो पैन कार्ड मामले में सपा नेता आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने दोनों की सजा निलंबित करते हुए जमानत मंजूर कर ली है। जमानत की शर्तें और जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद दोनों की रिहाई का रास्ता साफ हो हो गया है। 

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Azam Khan and Abdullah get major relief from court in 'two PAN cards' case; court hands down a suspended
आजम खां, सपा नेता। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कथित दो पैन कार्ड मामले में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को बड़ी राहत दी है। न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकलपीठ ने दोनों की सजा निलंबित करने की अर्जियां मंजूर करते हुए जमानत दे दी। अदालत के इस आदेश के बाद दोनों की जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।

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हालांकि, रिहाई के लिए जमानत की शर्तों और आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करना होगा। प्रवर्तन निदेशालय की ओर से अगर कोई वारंट नहीं जारी किया गया तो दोनों जेल से बाहर आ सकते हैं। आजम और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम फिलहाल रामपुर जेल में बंद हैं। दोनों को दो पैन कार्ड रखने के मामले में सात-सात साल की सजा सुनाई गई थी। 

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क्या है दो पैन कार्ड मामला?

अभियोजन के अनुसार, यह मामला कथित तौर पर अलग-अलग जन्मतिथियों का उल्लेख करने वाले दूसरे पैन कार्ड को बनवाने और उसके इस्तेमाल से जुड़ा है। आरोपों में चुनावी नामांकन पत्रों में दूसरे पैन कार्ड का इस्तेमाल किए जाने का मामला भी शामिल है। आजम खां और अब्दुल्ला आजम ने निचली अदालत से मिली दोषसिद्धि और सजा को आपराधिक पुनरीक्षण याचिकाओं के माध्यम से चुनौती दी है। इसी दौरान उन्होंने सजा निलंबित करने और जमानत देने की मांग की थी।

दोषसिद्धि पर रोक से अलग है सजा निलंबन

हाईकोर्ट से मिली राहत सजा निलंबित करने और जमानत देने से संबंधित है। इसे दोषसिद्धि पर रोक लगाए जाने के आदेश के समान नहीं माना जा सकता। पुनरीक्षण याचिकाओं पर अंतिम निर्णय होना अभी अलग न्यायिक प्रक्रिया है।

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