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Prayagraj News: फर्जी दस्तावेजों पर मिली नौकरी शुरू से अवैध, बर्खास्तगी के लिए विभागीय कार्यवाही जरूरी नहीं

Sat, 18 Jul 2026 01:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 18 Jul 2026 01:59 AM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि फर्जी दस्तावेजों पर मिली सरकारी नौकरी शुरू से ही अवैध होती है। ऐसे कर्मचारियों की बर्खास्तगी से पहले विभागीय जांच की कोई जरूरत नहीं होती।

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Employment obtained through forged documents is illegal from the outse
हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि फर्जी दस्तावेजों पर मिली सरकारी नौकरी शुरू से ही अवैध होती है। ऐसे कर्मचारियों की बर्खास्तगी से पहले विभागीय जांच की कोई जरूरत नहीं होती। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने राज्य सरकार की विशेष अपील स्वीकार करते हुए 2008 में एकलपीठ के आदेश को निरस्त कर दिया। साथ ही 2007 में मुरादाबाद मंडल कारागार के वरिष्ठ अधीक्षक की ओर से बंदी रक्षक रणवीर सिंह की सेवा समाप्त करने के आदेश को बरकरार रखा।

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रणवीर सिंह की नियुक्ति 1992 में अनुसूचित जनजाति (एसटी) कोटे में हुई थी। वर्ष 2007 में जेल विभाग में दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान पता चला कि नियुक्ति के समय प्रस्तुत किया गया जाति प्रमाणपत्र जिला प्रशासन की जांच में प्रमाणपत्र फर्जी पाया गया। इसके बाद उसे कारण बताओ नोटिस जारी कर सेवा समाप्त कर दी गई थी और आपराधिक मुकदमा भी दर्ज कराया गया था।
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इसके खिलाफ एकल पीठ के दाखिल याचिका पर कोर्ट ने रणवीर की बर्खास्तगी रद्द कर दी थी। कहा कि नियुक्ति के 15-16 वर्ष बाद कार्रवाई की गई, विभागीय जांच नहीं हुई और लोध तथा लोधी को समान मानते हुए कर्मचारी को आरक्षण का लाभ देने योग्य माना था। एकल पीठ के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने स्पेशल अपील दाखिल की।
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खंडपीठ ने कहा कि कर्मचारी ने जाति प्रमाणपत्र के फर्जी पाए जाने संबंधी जांच रिपोर्ट को कभी चुनौती नहीं दी। जब नियुक्ति ही धोखाधड़ी से प्राप्त की गई हो तो वह कानून की नजर में शुरू से ही अस्तित्वहीन है। ऐसे मामलों में केवल कारण बताओ नोटिस देकर कार्रवाई करना पर्याप्त है, विस्तृत विभागीय जांच आवश्यक नहीं। हालांकि, खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि अपील लंबित रहने के दौरान कर्मचारी ने जो कार्य किया, उसके एवज में मिले वेतन और अन्य भुगतान की वसूली उससे नहीं की जाएगी।

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