High Court : बस्ती के एसपी को आपराधिक अवमानना की चेतावनी, विवेचना अधिकारी को निलंबित करने पर कोर्ट सख्त
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट प्राप्त करने वाले विवेचनाधिकारी को निलंबित करने पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने एसपी से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। साथ ही कहा कि संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया तो आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने पर विचार करेंगे।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट प्राप्त करने वाले विवेचनाधिकारी को निलंबित करने पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने एसपी से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। साथ ही कहा कि संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया तो आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने पर विचार करेंगे। यह चेतावनी न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने याचिका पर दी है।
मामला रत्नेश कुमार उर्फ राजू शुक्ला बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य से जुड़ा है, जिसमें कोर्ट ने पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुपालन में दाखिल किए गए एसपी के व्यक्तिगत हलफनामे को पूरी तरह से असंतोषजनक करार दिया है। अदालत ने पाया कि विवेचनाधिकारी राधेश्याम त्रिपाठी को इसलिए निलंबित कर दिया गया कि उन्होंने मामले के प्रतिवादी संख्या 5 से 11 की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए न्यायालय से गैर-जमानती वारंट प्राप्त करने के लिए आवेदन किया था। बस्ती के एसपी की ओर से आदेश में यह टिप्पणी की गई थी कि विवेचक ने पर्याप्त साक्ष्य एकत्र किए बिना ही वारंट प्राप्त कर लिया, जिसे कोर्ट ने गंभीर माना है।
कोर्ट ने कहा कि गैर-जमानती वारंट केस डायरी का सूक्ष्म अवलोकन करने के बाद अदालत की ओर से अपने विवेक से जारी किया जाता है, न कि विवेचना अधिकारी की व्यक्तिगत इच्छा या केवल उनके कहने पर। एसपी की उक्त टिप्पणी प्रथम दृष्टया अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-द्वितीय बस्ती के न्यायालय की अवमानना प्रतीत होती है। पीठ ने कहा कि वारंट जारी करना न्यायालय का विशेषाधिकार है। इसमें पुलिस अधीक्षक की राय का कोई महत्व नहीं है। 10 अप्रैल को मामले में सुनवाई होगी।
कोषागार की राशि गमन मामले में आरोपी को मिली अंतरिम जमानत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चित्रकूट के कोषागार से कथित रूप से 39 लाख रुपये से अधिक की राशि के गमन मामले में आरोपी को अंतरिम जमानत दे दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने संतोष कुमार मिश्रा की याचिका पर दिया।
आरोपी संतोष कुमार मिश्रा के खिलाफ चित्रकूट के कर्वी कोतवाली नगर थाने में धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। अभियोजन के अनुसार संतोष के खाते में चित्रकूट कोषागार से 39,19,740 रुपये की राशि आई, जिसके वे पात्र नहीं थे। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दलील दी कि संतोष 77 वर्ष के वृद्ध पेंशनर हैं। 27 अक्तूबर 2025 से जेल में बंद हैं। उन्हें अंतरिम जमानत दी जाती है तो वे प्राप्त राशि वापस करने को तैयार हैं। साथ ही जांच और ट्रायल में पूरा सहयोग करेंगे।