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High Court : नाबालिग की सहमति कानूनन शून्य, शादी का वादा कर संबंध बनाना दुष्कर्म

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 22 Jan 2026 12:05 PM IST
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सार

Allahabad High Court : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि नाबालिग यौन शोषण की पीड़िता है तो कानून की नजर में उसकी सहमति का कोई महत्व नहीं रह जाता है।आरोपी ने शादी का झूठा वादा करके नाबालिग से संबंध बनाए हैं तो उसे दुष्कर्म की श्रेणी में ही रखा जाएगा।

High Court Consent of a minor is legally void, having relations after promising marriage
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि नाबालिग यौन शोषण की पीड़िता है तो कानून की नजर में उसकी सहमति का कोई महत्व नहीं रह जाता है। ऐसे में आरोपी ने शादी का झूठा वादा करके नाबालिग से संबंध बनाए हैं तो उसे दुष्कर्म की श्रेणी में ही रखा जाएगा। यह टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की एकल पीठ ने कुशीनगर निवासी आरोपी की मुकदमे की कार्यवाही रद्द करने की मांग में दायर अर्जी खारिज कर दी।

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कुशीनगर की पीड़िता ने अमरजीत पाल व अन्य के खिलाफ दुष्कर्म व पॉक्सो के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई थी। ट्रायल कोर्ट ने मामले में आरोप पत्र का संज्ञान लेकर समन आदेश जारी किया था। आरोपियों ने मुकदमे की पूरी कार्यवाही को रद्द करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में अर्जी दायर की।

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याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि पीड़िता और आरोपी के बीच संबंध पूरी तरह से सहमति पर आधारित थे। पीड़िता वास्तव में बालिग है और उसकी आयु लगभग 20 वर्ष है। मामले में आरोपी को झूठा फंसाया जा रहा है। वयस्क महिला की स्वेच्छा से बनाए गए संबंधों को दुष्कर्म नहीं माना जा सकता।

कोर्ट ने हाईस्कूल के प्रमाण पत्र को माना आयु निर्धारण साक्ष्य

प्रतिवादी अधिवक्ता ने दलील दी कि आरोपी चार साल से शादी का झांसा देकर यौन शोषण कर रहा था। जब पीड़िता और उसके परिवार ने शादी का दबाव बनाया तो आरोपी वादे से मुकर गया। इसके बाद प्राथमिकी दर्ज कराई गई। वादी पक्ष ने पीड़िता का हाईस्कूल प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया। इसके अनुसार पीड़िता घटना के समय नाबालिग थी।

कोर्ट ने कहा कि हाईस्कूल का प्रमाणपत्र उपलब्ध हो तो आयु निर्धारण के लिए उसे ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए। साथ ही कहा कि 18 वर्ष से कम आयु की लड़की के साथ बनाया गया संबंध दुष्कर्म की परिभाषा के अंतर्गत आता है, चाहे वह सहमति से ही क्यों न बनाया गया हो। न्यायालय ने पाया कि अभियुक्त ने स्वयं पीड़िता के साथ संबंध होने की बात स्वीकार की है और रिकॉर्ड के अनुसार पीड़िता नाबालिग है। इसलिए अभियुक्त के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं। इन्हीं टिप्पणियों के साथ अदालत ने मुकदमे को रद्द करने की याचिका को खारिज कर दी।

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