फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court Probe conducted against SRN doctors Caesarean delivery instead abortion.

हाईकोर्ट : गर्भपात की जगह सिजेरियन से प्रसव कराने पर एसआरएन के डॉक्टरों के खिलाफ होगी जांच

Thu, 24 Sep 2026 02:14 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 24 Sep 2026 02:14 PM IST
सार

13 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता की गर्भावस्था समाप्त करने के हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं होने पर अदालत ने एसआरएन अस्पताल प्रशासन और संबंधित चिकित्सकों के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। गर्भावस्था समाप्त करने के बजाय सिजेरियन से प्रसव कराने के मामले में कोर्ट ने प्रथमदृष्टया लापरवाही मानते हुए जांच के निर्देश दिए हैं।

विज्ञापन
High Court Probe conducted against SRN doctors Caesarean delivery instead abortion.
हाईकोर्ट ने दिया गर्भपात का आदेश, एसआरएन के चिकित्सकों ने करा दिया प्रसव। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 13 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता की गर्भावस्था समाप्त करने के अपने आदेश का पालन नहीं होने पर एसआरएन अस्पताल प्रशासन और संबंधित चिकित्सकों के रवैये पर नाराजगी जताई है। न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने प्रथम दृष्टया आदेश की अवहेलना मानते हुए उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को पूरे मामले की जांच स्वयं करने और दो सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

विज्ञापन


कोर्ट ने 21 सितंबर को नाबालिग की गर्भावस्था समाप्त करने का आदेश दिया था। अदालत ने एसआरएन अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को 22 सितंबर को सुरक्षित चिकित्सकीय प्रक्रिया से गर्भावस्था समाप्त करने और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम गठित करने का निर्देश दिया था। साथ ही राज्य को पीड़िता के इलाज, परिवहन और उपचार के बाद की देखभाल का पूरा खर्च उठाने को कहा था।
विज्ञापन


23 सितंबर को सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि 22 सितंबर की शाम गर्भावस्था समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई लेकिन वह सफल नहीं हुई। इसके बाद चिकित्सकों ने सिजेरियन के जरिए बच्चे का प्रसव करा दिया। नवजात को बच्चों के अस्पताल में भर्ती कराया गया। कोर्ट ने सवाल किया कि जब आदेश गर्भावस्था समाप्त करने का था तो सिजेरियन से प्रसव कराने का निर्णय किसके आदेश से लिया गया। ऑपरेशन करने वाली चिकित्सक इस संबंध में कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सकीं।

विज्ञापन
विज्ञापन

जानकारी के बावजूद एचओडी चली गईं शहर के बाहर

अदालत ने यह भी पाया कि विभागाध्यक्ष डॉ. अमृता चौरसिया को आदेश की जानकारी होने के बावजूद वह रात में शहर से बाहर चली गईं। कोर्ट ने कहा कि संबंधित चिकित्सकों की प्रथम दृष्टया जानबूझकर लापरवाही सामने आती है। पीड़िता की मां की ओर से यह आरोप भी लगाया गया कि अस्पताल प्रशासन ने दवाओं, जांच और अन्य प्रक्रियाओं के लिए उनसे पैसे मांगे।

हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को संबंधित डॉक्टरों, पीड़िता, उसकी मां और जांच अधिकारी के बयान लेकर जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दो सप्ताह के भीतर पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्तूबर को होगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed