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High Court : शिक्षा देना सार्वजनिक कर्तव्य, निजी कॉलेजों के खिलाफ भी दाखिल होगी याचिका
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 19 Jun 2026 07:03 PM IST
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सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि निजी शिक्षण संस्थान सार्वजनिक कर्तव्य का निर्वहन करते हैं, इसलिए उनके खिलाफ संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दाखिल की जा सकती है।
अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि निजी शिक्षण संस्थान सार्वजनिक कर्तव्य का निर्वहन करते हैं, इसलिए उनके खिलाफ संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दाखिल की जा सकती है। यह आदेश न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह ने बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी के छात्र निखिल कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
याची अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी से संबद्ध एक निजी कॉलेज में आठवें सेमेस्टर का छात्र है। कॉलेज की अनुशासन समिति ने एक छात्रा के साथ विवाद और कथित रूप से शारीरिक हमले की धमकी देने की शिकायत के आधार पर 16 दिसंबर 2025 को उसे छह माह के लिए निलंबित कर दिया था। यह निलंबन अवधि 15 जून 2026 को समाप्त हो गई।
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छात्र ने याचिका दायर कर 22 जून से शुरू होने वाली मुख्य परीक्षा में शामिल होने की अनुमति मांगी थी। कॉलेज प्रशासन ने दलील दी कि संस्थान अनुच्छेद 12 के तहत राज्य की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए उसके खिलाफ रिट याचिका विचारणीय नहीं है। साथ ही निलंबन के कारण छात्र की अनिवार्य उपस्थिति पूरी नहीं होने का हवाला देते हुए उसे परीक्षा में बैठने से रोकने की बात कही गई।
कोर्ट ने फुल बेंच के पूर्व निर्णय का हवाला देते हुए माना कि शिक्षा देना एक सार्वजनिक कार्य है। कोर्ट ने यह भी पाया कि निलंबन आदेश के खिलाफ अपील का कोई प्रावधान नहीं था। अदालत ने कहा कि छात्र पहले ही छह माह की सजा भुगत चुका है। ऐसे में उपस्थिति की कमी के आधार पर परीक्षा से वंचित करना उसे दोबारा दंडित करने जैसा होगा। कोर्ट ने याचिका आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए छात्र को बिना अनिवार्य उपस्थिति की शर्त के मुख्य परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने का आदेश दिया।