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प्रदीप मिश्रा ने सुनाई कथा : भगवान शिव मंदिर में ही मिलें यह जरूरी नहीं, वह श्मशान में भी मिले सकते हैं

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 29 Jan 2026 03:48 PM IST
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सार

माघ मेला क्षेत्र के सेक्टर-चार स्थित सतुआ बाबा के शिविर में कथावाचक प्रदीप मिश्रा ने दूसरे दिन बुधवार को शिव महापुराण की कथा सुनाई। प्रदीप मिश्रा ने कहा, भगवान शिव मंदिर में ही मिलें, यह जरूरी नहीं है।

Pradeep Mishra narrates the story: It is not necessary that Lord Shiva is found only in the temple
सतुआ बाबा के आश्रम में कथावाचक प्रदीप मिश्रा की कथा में जुटी भीड़। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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माघ मेला क्षेत्र के सेक्टर-चार स्थित सतुआ बाबा के शिविर में कथावाचक प्रदीप मिश्रा ने दूसरे दिन बुधवार को शिव महापुराण की कथा सुनाई। प्रदीप मिश्रा ने कहा, भगवान शिव मंदिर में ही मिलें, यह जरूरी नहीं है। शिव श्मशान में भी मिल सकते हैं। वह हर जगह हैं। उन्होंने शिव को प्रसन्न करने के लिए एक लोटा जल अर्पित करने के लिए कहा। इस दौरान मनोहरा की कथा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि उसने गरीबी के चलते बिना लोटे के ही अपने मुख से भगवान शिव को जल अर्पण करना जारी रखा और एक दिन भगवान ने उसे दर्शन दिए। प्रभु मृत्युलोक में विराजमान हैं।

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शिव प्रयागराज की धरती पर भी हैं। कथावाचक ने वासुकि नाग की कथा प्रसंग से प्रयाग महात्म्य का वर्णन किया। कहा, वासुकि नाग ने देवताओं ने पूछा कि तुम त्रिवेणी पर क्या कर रहे हो तो उन्होंने बताया कि सागर मंथन के दौरान उनका शरीर बहुत कष्ट में हो गया है। इस कष्ट से मुक्ति पाने के लिए लिए त्रिवेणी आए हैं। क्योंकि यहां आने मात्र से सारे कष्ट मिट जाते हैं।
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उन्होंने कहा, जब कोई पूछे कि आप प्रयाग की धरती पर क्यों आए हैं तो उन्हें यही जवाब दें कि कष्ट से मुक्ति पाने के लिए आए हैं। विधर्मियों ने महाकुंभ को बदनाम करने की साजिश की थी ः कथावाचक प्रदीप मिश्र ने कहा कि विधर्मियों ने प्रयागराज के महाकुंभ को बदनाम करने की साजिश रची थी। आगे रहकर लोगों को धक्का देने का प्रयास किया, लेकिन वो नहीं जानते कि ये सनातनी शेर हैं। सनातनी शेर सोता नहीं जागता और इन्हीं की बदौलत आयोजन को सफल बनाया गया। अब इस बार माघ मेला भी किसी महाकुंभ से कम नहीं है।

नागवासुकि की कथा सुनाई

कथावाचक प्रदीप मिश्र ने वासुकि नाग की कथा प्रसंग से प्रयाग माहात्म्य का वर्णन किया। कहा, वासुकि नाग ने देवताओं ने पूछा कि तुम त्रिवेणी पर क्या कर रहे हो तो उन्होंने बताया कि सागर मंथन के दौरान उनका शरीर बहुत कष्ट में हो गया है। जगह-जगह घाव हो गए हैं, इस कष्ट से मुक्ति पाने के लिए लिए त्रिवेणी आए हैं। क्योंकि यहां आने मात्र से सारे कष्ट मिट जाते हैं। इस दौरान मौजूद लोगों से उन्होंने कहा कि वो भी इस बात का ध्यान रखें। जब कोई पूछे कि वो प्रयाग की धरती पर क्यों आए हैं तो उन्हें यही जवाब दें कि कष्ट से मुक्ति पाने आए हैं।

गंगा तट पर वस्त्र छोड़ने पर कहा, किसी का कपड़ा लांघना नहीं चाहिए

शिवचर्चा विशेषज्ञ कथावाचक प्रदीप मिश्र ने बुधवार को कथा के दूसरे दिन मौजूद लोगों से कहा कि लोग गंगा स्नान के लिए आते हैं और अपने वस्त्र घाट पर ही छोड़ देते हैं। सवाल किया कि आखिर क्यों घर पर कपड़ा सुखाने के लिए तार बांधा जाता है। मान्यता है कि जिसका कपड़ा लांघा जाता है, वो बीमार होता है। ऐसे में अपने वस्त्र को ऐसी जगह पर न छोड़ें बल्कि अपना दिल छोड़ें, जिससे आपका मन भागवत भक्ति में रमा रहे। अपनी विसंतियों को छोड़ें, अपने गलत विचार को छोड़ें। 

विधर्मियों ने कुंभ को बदनाम करने की साजिश की थी

पं. प्रदीप मिश्र ने कहा कि विधर्मियों ने प्रयागराज के कुंभ को बदनाम करने की साजिश रची थी। आगे रहकर लोगों को धक्का देने का प्रयास किया, लेकिन वो नहीं जानते कि ये सनातनी शेर हैं। सनातनी शेर सोता नहीं जागता और इन्हीं सनातनी शेरों ने इस आयोजन को सबसे सफल आयोजन बना दिया। अब इस बार माघ मेला भी किसी कुंभ से कम नहीं है।

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