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प्रयागराजः 20 साल के इंतजार के बाद पिता की सीट पर काबिज हुईं रीता

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 24 May 2019 02:04 AM IST
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Prayagraj: After waiting for 20 years, Rita took control of her father's seat
Reeta - फोटो : प्रयागराज
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सूबे की पर्यटन मंत्री डा. रीता बहुगुणा जोशी ने 20 साल के इंतजार के बाद अपने पिता की संसदीय सीट इलाहाबाद से अपनी किस्मत आजमाई। अपने राजनीतिक करियर के पांचवें लोकसभा चुनाव में पहली बार रीता बृहस्पतिवार को सांसद भी बन गईं। इसके पूर्व उन्होंने सपा के टिकट पर सुल्तानपुर से एवं कांग्रेस के टिकट पर इलाहाबाद से एक बार एवं दो बार लखनऊ से चुनाव लड़ चुकी हैं।
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 संगमनगरी में ही पली, बढ़ी 69 वर्षीय रीता बहुगुणा जोशी के लिए प्रयागराज की राजनीतिक जमीन नई नहीं है। शहर की पहली महिला मेयर भी वह 1995 में बनीं। तब उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था। रीता जोशी दो बार विधायक भी बन चुकी हैं। पहली बार लखनऊ कैंट से उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर वर्ष 2012 में चुनाव लड़ा। इसके बाद भाजपा के टिकट पर वर्ष 2017 में वे इसी सीट से निर्वाचित हुईं।
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गी सरकार में वे कैबिनेट मंत्री भी बनीं। रीता का राजनीतिक कद शुरू से ही बड़ा रहा है। कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष का भी वे दायित्व संभाल चुकी हैं। रीता के पिता हेमवती नंदन बहुगुणा सूबे के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। वर्ष 1971 में वे इलाहाबाद संसदीय सीट से सांसद बने थे। इसी तरह उनकी मां कमला बहुगुणा वर्ष 1977 में फूलपुर से सांसद निर्वाचित हुई थीं। माता-पिता के बाद अब रीता इलाहाबाद सीट से सांसद निर्वाचित हुई हैं। रीता के भाई विजय बहुगुणा भी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। रीता को पार्टी नेता एवं उनके समर्थक ‘दीदी’ बोलकर ही संबोधित करते हैं। 

Prayagraj: After waiting for 20 years, Rita took control of her father's seat
Reeta - फोटो : प्रयागराज
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रह चुकी हैं डा. रीता
पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुुगुणा की पुत्री डा. रीता बहुगुणा जोशी 1974 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग में बतौर लेक्चर नियुक्त हुई थीं। राजनीतिक व्यस्तता के चलते वर्ष 2008 में उन्होंने विश्वविद्यालय से वीआरएस ले लिया। क्रास्थवेट गर्ल्स कालेज से 12 वीं करने के बाद रीता ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से ही बीए और एमए किया। बाद में यहीं से उन्होंने पीएचडी भी की। ब्रिटिशकाल में अफगानों के साथ ही संबद्ध विषय पर शोध करने वालीं डा. रीता ने इतिहास की दो पुस्तकें भी लिखी हैं। डा. जोशी की शादी वर्ष 1976 में हुई। उनके पति पीसी जोशी त्रिवेणी स्ट्रक्चरल लिमिटेड में बतौर इंजीनियर कार्यरत रहे। पुत्र मयंक जोशी ओर वधु रिचा जोशी दोनों ने एमबीए किया है। 
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