प्रयागराज : चिल्ड्रेन अस्पताल निर्माण में लापरवाही पर फर्म ब्लैकलिस्ट, 55 लाख की सिक्योरिटी जब्त
प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय परिसर में बच्चों के अस्पताल के निर्माण में लापरवाही के मामले में शासन ने सख्त रुख अपनाया है। निर्माण कार्य से जुड़ी फर्म का अनुबंध निरस्त कर उसे पांच साल के लिए काली सूची में डाल दिया गया है। साथ ही 55 लाख रुपये की सिक्योरिटी भी जब्त की गई है। मामले में जिम्मेदार अभियंताओं के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की गई है।
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स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय परिसर में प्रस्तावित चिल्ड्रेन अस्पताल के निर्माण में लापरवाही के मामले में शासन ने कार्रवाई की है। निर्माण कार्य की जिम्मेदारी संभाल रही फर्म का अनुबंध निरस्त कर उसे पांच साल के लिए काली सूची में डाल दिया गया है। इसके साथ ही फर्म की 55 लाख रुपये की सिक्योरिटी भी जब्त कर ली गई है। मामले में तत्कालीन मुख्य अभियंता केजी दुबे, अधीक्षण अभियंता राजेश चौधरी, अधिशासी अभियंता मनीष कुमार श्रीवास्तव और सहायक अभियंता धर्मशंकर त्रिपाठी के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की गई है।
चिल्ड्रेन अस्पताल का निर्माण बच्चों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जा रहा था। परियोजना में देरी और निर्माण संबंधी शिकायतों के बाद मामले की जांच कराई गई। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर फर्म के खिलाफ कार्रवाई की गई।
पांच साल के लिए काली सूची में डाली गई फर्म
निर्माण कार्य में निर्धारित शर्तों के पालन और गुणवत्ता से जुड़े मामलों को गंभीरता से लेते हुए फर्म का अनुबंध समाप्त कर दिया गया। साथ ही उसे पांच साल तक के लिए काली सूची में डालने का निर्णय लिया गया। सिक्योरिटी के रूप में जमा 55 लाख रुपये भी जब्त कर लिए गए हैं।
चार अभियंताओं के खिलाफ भी कार्रवाई
निर्माण कार्य की निगरानी और जिम्मेदारी से जुड़े चार अभियंताओं के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की गई है। इनमें तत्कालीन मुख्य अभियंता केजी दुबे, अधीक्षण अभियंता राजेश चौधरी, अधिशासी अभियंता मनीष कुमार श्रीवास्तव और सहायक अभियंता धर्मशंकर त्रिपाठी शामिल हैं। कार्रवाई का उद्देश्य निर्माण कार्यों में जवाबदेही सुनिश्चित करना और सरकारी परियोजनाओं में निर्धारित मानकों का पालन कराना है।
बच्चों को बेहतर इलाज देने की थी योजना
प्रस्तावित चिल्ड्रेन अस्पताल में बच्चों के इलाज के लिए आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं विकसित की जानी थीं। परियोजना में 300 बिस्तरों वाला अस्पताल, चौबीस घंटे आपात चिकित्सा सेवा, ऑपरेशन थिएटर और अन्य जरूरी सुविधाएं प्रस्तावित थीं। निर्माण में सामने आई कमियों के बाद हुई कार्रवाई से परियोजना के क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।