प्रयागराज : दुर्गा पूजा बारवारी में विशेष मुहूर्त में हुई संधि पूजा, आराधना में गूंजे जयकारे
दुर्गा पूजा बारवारी में संधि पूजा विशेष मुहूर्त में विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धा और भक्तिभाव से संपन्न हुई। इस पावन अनुष्ठान के दौरान पूरा पूजा परिसर मां दुर्गा की भक्ति, शक्ति और आराधना से ओतप्रोत हो उठा।
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दुर्गा पूजा बारवारी में संधि पूजा विशेष मुहूर्त में विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धा और भक्तिभाव से संपन्न हुई। इस पावन अनुष्ठान के दौरान पूरा पूजा परिसर मां दुर्गा की भक्ति, शक्ति और आराधना से ओतप्रोत हो उठा। संधि पूजा अष्टमी और नवमी तिथि के संधिकाल में की जाती है। इसे मां दुर्गा की शक्ति, पराक्रम और महिषासुर पर विजय के प्रतीक के रूप में विशेष महत्व प्राप्त है।
इस दौरान मंत्रोच्चार, पूजा-अर्चना और मां के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया। धार्मिक रीति रिवाजों के साथ आयोजित इस पूजा में श्रद्धालुओं की आस्था को नई ऊर्जा प्रदान की। भक्तों ने माँ दुर्गा से प्रार्थना की कि उनकी कृपा सभी पर बनी तथा समाज में सुख, शांति, सद्भाव, असम समृद्धि का संचार हो।
संधि पूजा के अवसर पर अध्यक्ष जयंत श्रीधर जोशी, कार्यकारी अध्यक्ष टी पी मिश्रा राजू द्विवेदी, टींकु कोहली , मीडिया प्रभारी लालू मित्तल, प्रवीण जैन, शैलेंद्र द्विवेदी, जॉय मुखर्जी, जयदीप गांगुली, सोना चटर्जी,आभा द्विवेदी, रीता गांगुली, सूक्ती बनर्जी, अमिता मुखर्जी, जयश्री घोष, स्नीगंधा बनर्जी, झुम्पा चौधरी, सीमा द्विवेदी, झूमर जैन, झूमा गांगुली, आदिति राय चौधरी, कविता मुखर्जी, सुब्रतो घोष, अंकित सिंह राजन यादव, जय अग्रवाल, सचिन रावत, चिक्की जैन, बूरो बनर्जी आदि सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।
क्या है संधि पूजा
संधि पूजा दुर्गा अष्टमी और नवमी तिथि के संधिकाल (यानी जिस समय अष्टमी तिथि समाप्त होती है और नवमी तिथि शुरू होती है, उसके ठीक अंतिम 24 मिनट और शुरुआती 24 मिनट यानी कुल 48 मिनट) के दौरान की जाती है। इस समयावधि को 'संधि काल' कहा जाता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब माँ दुर्गा चंड और मुंड असुरों का वध करने के बाद महिषासुर का वध कर रही थीं, तब अष्टमी और नवमी के संधिकाल के दौरान ही उन्होंने अपनी शक्ति का विशेष विस्तार किया था। इसे मां दुर्गा की शक्ति, पराक्रम और महिषासुर पर उनकी विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।
इस अनुष्ठान में विधि-विधान, हवन और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मां दुर्गा की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस विशेष मुहूर्त में की गई आराधना से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है।