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High Court : भूमि के विक्रय अनुबंध के मामले में दर्ज एफआईआर पर कार्रवाई से रोक

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 23 Jan 2026 04:47 PM IST
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सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कानपुर नगर के सिविल लाइंस क्षेत्र में नजूल घोषित भूमि के कथित अवैध विक्रय अनुबंध को लेकर दर्ज एफआईआर के मामले में याचियों के विरुद्ध किसी भी प्रकार की उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।

Stay on action on FIR registered in land sale contract case
अदालत का आदेश - फोटो : istock
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कानपुर नगर के सिविल लाइंस क्षेत्र में नजूल घोषित भूमि के कथित अवैध विक्रय अनुबंध को लेकर दर्ज एफआईआर के मामले में याचियों के विरुद्ध किसी भी प्रकार की उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने नागेंद्र सिंह समेत तीन लोगों की ओर से दायर याचिका पर दिया।

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मामला कानपुर नगर के थाना कोतवाली अंतर्गत सिविल लाइंस ब्लॉक-15 स्थित एक प्लॉट से संबंधित है। याचियों नागेंद्र सिंह, जितेंद्र सिंह और नरेंद्र सिंह ने अमृतसर डायोसिस एसोसिएशन ट्रस्ट के माध्यम से उक्त भूमि के संबंध में विक्रय अनुबंध किया था। बाद में लेखपाल की ओर से यह कहते हुए एफआईआर दर्ज कराई गई कि 2024 में भूमि नजूल घोषित होने के बावजूद फर्जी दस्तावेज के आधार पर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया है।
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अधिवक्ता ने कोर्ट में दलील दी कि याची निर्दोष हैं और स्वयं इस प्रकरण में पीड़ित हैं।

विक्रय अनुबंध से पूर्व सिविल कोर्ट, कानपुर नगर के अधिवक्ता से संपत्ति का विधिवत मुआयना कराया गया था और उनकी कानूनी सलाह के आधार पर ही अनुबंध किया गया। अनुबंध के समय याचियों को यह विश्वास दिलाया गया था कि संपत्ति पर ट्रस्ट का वैध स्वामित्व है। साथ ही अधिवक्ता ने नागेंद्र सिंह की ओर से पूरक शपथपत्र दाखिल करते हुए कोर्ट में दलील दी कि कुल दो करोड़ 40 लाख रुपये की धनराशि पर अनुबंध हुआ था। इसमें से एक करोड़ रुपये आरटीजीएस के माध्यम से दिए गए थे और एक करोड़ 40 लाख रुपये के चेक दिए गए थे, जिसका भुगतान बाद में रोक दिया गया। साथ ही विक्रय अनुबंध को निरस्त कराने के लिए सिविल जज (सीनियर डिवीजन),कानपुर नगर की अदालत में वाद भी दाखिल किया गया है।

कोर्ट ने लेखपाल को नोटिस जारी कर राज्य सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। साथ ही अगली सुनवाई तक याचियों के विरुद्ध किसी भी प्रकार की उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी गई है। वहीं, कोर्ट ने याचियों को निर्देश दिया है कि 29 जनवरी को सुबह 11 बजे विवेचना अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर जांच में सहयोग करें। ऐसा न करने की स्थिति में शिकायतकर्ता के आवेदन पर दी गई अंतरिम राहत वापस ली जा सकती है।

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