प्रयागराज : वीसी प्रो. अजीत चतुर्वेदी बोले- महामना का आवास मेरे लिए तीर्थस्थल जैसा
जिस घर को महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने बनाया, वहां आना तीर्थस्थल जैसी अनुभूति देता है। यह बात बीएचयू, वाराणसी के कुलपति प्रो. अजीत चतुर्वेदी ने रविवार को प्रयागराज आगमन पर अमर उजाला से बातचीत में कही।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जिस घर को महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने बनाया, वहां आना तीर्थस्थल जैसी अनुभूति देता है। यह बात बीएचयू, वाराणसी के कुलपति प्रो. अजीत चतुर्वेदी ने रविवार को प्रयागराज आगमन पर अमर उजाला से बातचीत में कही। वह यहां जॉर्जटाउन स्थित पंडित मदन मोहन मालवीय के पौत्र व बीएचयू के चांसलर रहे स्वर्गीय गिरिधर मालवीय के आवास पर उनकी पत्नी कांता मालवीय और पुत्र व पूर्व डीजीपी मनोज मालवीय से मिलने आए थे। प्रो. चतुर्वेदी ने मनोज मालवीय से बीएचयू की गतिविधियों पर भी बातचीत की। उन्होंने कहा कि बीएचयू के संस्थापक व कुलपति रहे पंडित मदन मोहन मालवीय ने प्रयागराज और वाराणसी को बहुत कुछ दिया और दोनों ही शहरों ने भारतीय संस्कृति को परिभाषित किया है।
हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर प्रो. अजीत चतुर्वेदी बोले कि महामना ने 150 पेज का नोट लिखा था जिसमें उन्होंने जोर दिया था कि विद्यार्थियाें को हिंदी की पुस्तकें अधिक पढ़ाई जाएं और प्रतिष्ठित लेखकों की पुस्तकों का अनुवाद भी हिंदी में कराया जाए। प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि महामना बीएचयू के तीसरे कुलपति रहे और उनके कार्यकाल में पूरे विश्व से उच्च कोटि के विद्वानों को बीएचयू में नियुक्ति दी गई जिसकी वजह से संस्थान आज भी शीर्ष पर है।
इस बीच प्रयागराज के वर्तमान पुलिस कमिश्नर एवं वाराणसी के पूर्व एडीजी जोन पीयूष मोर्डिया भी गिरिधर मालवीय के आवास पर पहुंचे और परिवार के साथ बैठकर कुछ पल बिताए। कमिश्नर ने कहा कि बीएचयू हो या महामना का आवास, यहां आना रोमांचित करता है। प्रयागराज से अगर कोई वाराणसी जाता है और पूछता कि वहां घूमने लायक क्या है तो सबसे पहले यही कहते हैं कि बीएचयू जरूर जाना।