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Ambedkar Nagar News: लोकतंत्र सेनानी रामसुख पांडेय का निधन
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लोकतंत्र सेनानी रामसुख पांडेय के पार्थिव शरीर पर तिरंगा अर्पित करने पहुंचे नायब तहसीलदार टांडा
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केदानगर। इब्राहिमपुर के अवसानपुर निवासी लोकतंत्र सेनानी रामसुख पांडेय(86) का मंगलवार शाम लखनऊ में निधन हो गया। वह पिछले कुछ समय से हृदय संबंधी बीमारी से परेशान चल रहे थे। बुधवार को उनका अंतिम संस्कार श्रृंगी ऋषि आश्रम के निकट सेवा घाट पर किया गया। पुत्र आशुतोष पांडेय लड्डू ने मुखाग्नि दी। उत्तर प्रदेश पुलिस के जवानों ने उन्हें अंतिम सलामी दी।
रामसुख पांडेय की अंतिम इच्छा के अनुसार शव यात्रा शुरू होने से पहले संघ प्रार्थना सुनाई गई। रामसुख पांडेय की प्रारंभिक शिक्षा अकबरपुर में हुई थी। स्नातक की पढ़ाई के लिए वह कोलकाता गए। कोलकाता विश्वविद्यालय से पढ़ाई के दौरान उनका जुड़ाव अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से हुआ। उन्होंने चंपत राय, अशोक सिंघल और रज्जू भैया सहित कई प्रमुख लोगों के साथ लंबे समय तक कार्य किया। वर्ष 2017 में स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने संघ के सक्रिय सेवा कार्यों से दूरी बना ली थी। रामसुख आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की बहाली के आंदोलन में सक्रिय रहे।
इस दौरान उन्हें बंगाल की विभिन्न जेलों में तीन महीने से अधिक समय तक बंदी रहना पड़ा था। इसके अलावा बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के समय उन्होंने टेरिटोरियल आर्मी में सेवा दी थी। भाजपा अयोध्या जिला प्रभारी मिथिलेश त्रिपाठी, किसान मोर्चा के पूर्व जिला अध्यक्ष आदित्य प्रसाद शुक्ला, भगवती प्रसाद मिश्र, महेंद्र सिंह, कन्हैया प्रसाद मिश्रा, करुणाकर पांडे सहित लोगों ने श्रद्धांजलि देते हुए उनके सामाजिक योगदान को याद किया।
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रामसुख पांडेय की अंतिम इच्छा के अनुसार शव यात्रा शुरू होने से पहले संघ प्रार्थना सुनाई गई। रामसुख पांडेय की प्रारंभिक शिक्षा अकबरपुर में हुई थी। स्नातक की पढ़ाई के लिए वह कोलकाता गए। कोलकाता विश्वविद्यालय से पढ़ाई के दौरान उनका जुड़ाव अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से हुआ। उन्होंने चंपत राय, अशोक सिंघल और रज्जू भैया सहित कई प्रमुख लोगों के साथ लंबे समय तक कार्य किया। वर्ष 2017 में स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने संघ के सक्रिय सेवा कार्यों से दूरी बना ली थी। रामसुख आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की बहाली के आंदोलन में सक्रिय रहे।
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इस दौरान उन्हें बंगाल की विभिन्न जेलों में तीन महीने से अधिक समय तक बंदी रहना पड़ा था। इसके अलावा बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के समय उन्होंने टेरिटोरियल आर्मी में सेवा दी थी। भाजपा अयोध्या जिला प्रभारी मिथिलेश त्रिपाठी, किसान मोर्चा के पूर्व जिला अध्यक्ष आदित्य प्रसाद शुक्ला, भगवती प्रसाद मिश्र, महेंद्र सिंह, कन्हैया प्रसाद मिश्रा, करुणाकर पांडे सहित लोगों ने श्रद्धांजलि देते हुए उनके सामाजिक योगदान को याद किया।