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Ambedkar Nagar News: 2023 से पहले बनाए गए फर्जी जन्म प्रमाणपत्र, नहीं मिला डाटा
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अंबेडकरनगर। जिले में फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनाने का खेल गहराता जा रहा है। अब तक हुई जांच में ज्यादातर प्रमाणपत्र वर्ष 2023 से पहले जारी होने की बात सामने आ रही है। इन प्रमाणपत्रों का ब्योरा न तो जारीकर्ता अस्पताल के रजिस्टर में मिल रहा है और न ही पोर्टल पर। प्रामाणपत्रों पर किए गए हस्ताक्षर भी फर्जी मिले हैं। बुधवार को अकबरपुर सीएचसी अधीक्षक की ओर से अज्ञात के खिलाफ तहरीर कोतवाली में दे दी गई है। अब पुलिस मामले की जांच पड़ताल करेगी।
अलग-अलग सीएचसी और जिला अस्पताल से जारी किए गए 28 जन्म प्रमाणपत्रों के सत्यापन में 21 फर्जी मिले हैं। अकबरपुर सीएचसी से जारी 17 प्रमाणपत्रों में 14 फर्जी मिले हैं। यहां प्रमाणपत्रों पर किए गए डिजिटल हस्ताक्षर भी फर्जी मिले हैं। वजह यह है कि जिन अधीक्षक के हस्ताक्षर किए गए हैं उनका स्थानांतरण पूर्व में ही हो चुका है। इसके अलावा जिला अस्पताल और सीएचसी जलालपुर से भी जारी प्रमाणपत्र फर्जी मिले हैं।
सीएमओ डॉ. संजय कुमार शैवाल के आदेश के बाद बुधवार को सीएचसी अधीक्षक अकबरपुर डॉ. नूर अहमद की ओर से तहरीर अकबरपुर पुलिस को दी गई है। इसमें प्राथमिक जांच का ब्योरा देते हुए प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की गई है। अन्य स्थानों पर अब तक तहरीर नहीं दी गई है। फिलहाल इस पूरे जालसाजी के प्रकरण में विभागीय कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
इनके जारी हुए हैं प्रमाणपत्र
अकबरपुर सीएचसी से जिन के जन्म प्रमाणपत्र जारी हुए हैं, उसमें अधिकतर प्रमाणपत्र साल 2022 के ही मिले हैं। इनमें प्रमुख रूप से आनंद दिसंबर 2022, आराध्या यादव व तन्मय विश्वकर्मा अक्तूबर 2022, आफियान सितंबर 2022, सृष्टि सितंबर 2022, वीरप्रताप यादव, सितंबर 2022, अनुष्का अक्तूबर 2022, अनस सितंबर 2022, आयुष मई 2023 व अंशुमान मार्च 2022 हैं। इसके अलावा जलालपुर सीएचसी में अभिनव मिश्रा, आयुषराज, अंश यादव व अंश जायसवाल के भी जन्म प्रमाणपत्र फर्जी मिले हैं।
ऑनलाइन पोर्टल से पहले होता था खेल
जिले में साल 2020 से लेकर 2023 के आसपास जारी किए गए कई जन्म प्रमाणपत्र सत्यापन के बाद फर्जी मिले हैं। दरअसल, पहले जन्म प्रमाणपत्र की जांच के लिए कोई ऑनलाइन व्यवस्था नहीं थी। वर्ष 2023 में ऑनलाइन पोर्टल शुरू होने के बाद अब प्रमाणपत्रों का सत्यापन ऑनलाइन भी कराया जाने लगा है। इसमें अब रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है तो प्रमा पत्र का सत्यापन नहीं हो पाता है। इससे पहले रायबरेली के अलावा प्रदेश के कई अन्य जनपदों में भी इस तरीके की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिसमें एसटीएफ से लेकर अन्य जांच एजेंसियाें ने आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
गहन जांच की तैयारी
जिले के अलग-अलग अस्पतालों से फर्जी जन्म प्रमाणपत्र मिलने के मामले में सभी अधीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा इसकी गहन जांच कराने के लिए अलग से तैयारी की जा रही है।
- डॉ. संजय कुमार शैवाल, सीएमओ
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अलग-अलग सीएचसी और जिला अस्पताल से जारी किए गए 28 जन्म प्रमाणपत्रों के सत्यापन में 21 फर्जी मिले हैं। अकबरपुर सीएचसी से जारी 17 प्रमाणपत्रों में 14 फर्जी मिले हैं। यहां प्रमाणपत्रों पर किए गए डिजिटल हस्ताक्षर भी फर्जी मिले हैं। वजह यह है कि जिन अधीक्षक के हस्ताक्षर किए गए हैं उनका स्थानांतरण पूर्व में ही हो चुका है। इसके अलावा जिला अस्पताल और सीएचसी जलालपुर से भी जारी प्रमाणपत्र फर्जी मिले हैं।
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सीएमओ डॉ. संजय कुमार शैवाल के आदेश के बाद बुधवार को सीएचसी अधीक्षक अकबरपुर डॉ. नूर अहमद की ओर से तहरीर अकबरपुर पुलिस को दी गई है। इसमें प्राथमिक जांच का ब्योरा देते हुए प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की गई है। अन्य स्थानों पर अब तक तहरीर नहीं दी गई है। फिलहाल इस पूरे जालसाजी के प्रकरण में विभागीय कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
इनके जारी हुए हैं प्रमाणपत्र
अकबरपुर सीएचसी से जिन के जन्म प्रमाणपत्र जारी हुए हैं, उसमें अधिकतर प्रमाणपत्र साल 2022 के ही मिले हैं। इनमें प्रमुख रूप से आनंद दिसंबर 2022, आराध्या यादव व तन्मय विश्वकर्मा अक्तूबर 2022, आफियान सितंबर 2022, सृष्टि सितंबर 2022, वीरप्रताप यादव, सितंबर 2022, अनुष्का अक्तूबर 2022, अनस सितंबर 2022, आयुष मई 2023 व अंशुमान मार्च 2022 हैं। इसके अलावा जलालपुर सीएचसी में अभिनव मिश्रा, आयुषराज, अंश यादव व अंश जायसवाल के भी जन्म प्रमाणपत्र फर्जी मिले हैं।
ऑनलाइन पोर्टल से पहले होता था खेल
जिले में साल 2020 से लेकर 2023 के आसपास जारी किए गए कई जन्म प्रमाणपत्र सत्यापन के बाद फर्जी मिले हैं। दरअसल, पहले जन्म प्रमाणपत्र की जांच के लिए कोई ऑनलाइन व्यवस्था नहीं थी। वर्ष 2023 में ऑनलाइन पोर्टल शुरू होने के बाद अब प्रमाणपत्रों का सत्यापन ऑनलाइन भी कराया जाने लगा है। इसमें अब रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है तो प्रमा पत्र का सत्यापन नहीं हो पाता है। इससे पहले रायबरेली के अलावा प्रदेश के कई अन्य जनपदों में भी इस तरीके की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिसमें एसटीएफ से लेकर अन्य जांच एजेंसियाें ने आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
गहन जांच की तैयारी
जिले के अलग-अलग अस्पतालों से फर्जी जन्म प्रमाणपत्र मिलने के मामले में सभी अधीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा इसकी गहन जांच कराने के लिए अलग से तैयारी की जा रही है।
- डॉ. संजय कुमार शैवाल, सीएमओ

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